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10 हजार CCTV और ड्रोन की नजर, हादसा होने से पहले ही मिलेगा अलर्ट, Tata Steel में AI वाला सेफ्टी सिस्टम

नई दिल्ली: देश की प्रमुख स्टील कंपनियों में शामिल टाटा स्टील औद्योगिक सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), कंप्यूटर विजन, कनेक्टेड वर्कफोर्स सिस्टम और रिमोट ऑपरेशन जैसी तकनीकों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर रही है। कंपनी के पास फिलहाल 10,000 से ज्यादा CCTV कैमरे हैं, जिनकी मदद से AI के जरिए असुरक्षित गतिविधियों की पहचान कर हादसा होने से पहले ही अलर्ट जारी किया जा रहा है।

टाटा स्टील के वाइस प्रेसिडेंट (सेफ्टी, हेल्थ एंड सस्टेनेबिलिटी) राजीव मंगल ने बताया कि आमतौर पर कंपनियां CCTV का इस्तेमाल किसी दुर्घटना के बाद उसकी जांच के लिए करती हैं। टाटा स्टील का लक्ष्य इससे आगे जाकर तकनीक की मदद से हादसे होने से पहले उन्हें रोकना है।

15 साल में LTIFR में 38% की कमी

कंपनी ने पिछले 15 वर्षों में पूरे ग्रुप में चोट और हादसों की दर (LTIFR) में 38 फीसदी की कमी हासिल की है। अब AI आधारित निगरानी व्यवस्था के जरिए कर्मचारियों के असुरक्षित व्यवहार को रियल टाइम में पहचानने और संबंधित सुपरवाइजर को तुरंत अलर्ट भेजने पर जोर दिया जा रहा है।

रिमोट ऑपरेशन सेंटर

  • कंपनी Integrated Remote Operation Centres (iRoCs) का भी विस्तार कर रही है।
  • इनके जरिए खदानों और प्लांट में होने वाले खतरनाक कामों की निगरानी और जहां संभव हो, उनका संचालन दूर से किया जा सकेगा।
  • इन सेंटरों में CCTV फुटेज, प्लांट और मशीनरी से मिलने वाला डेटा और दूसरी महत्वपूर्ण जानकारियों को एक जगह लाया जाता है।
  • इससे कर्मचारियों की खतरनाक वातावरण में मौजूदगी कम होती है और किसी आपात स्थिति में बेहतर तालमेल बनाया जा सकता है।

ट्रकों और ड्राइवरों की सुरक्षा पर नजर

टाटा स्टील के प्लांट्स में रोज 8,000 से 10,000 ट्रक आते हैं। ड्राइवरों की थकान और नींद की पहचान के लिए कैमरों का इस्तेमाल हो रहा है। अगर ड्राइवर को झपकी आती है या वह गाड़ी चलाते समय फोन चलाता है, तो गाड़ी में तुरंत वॉर्निंग अलार्म बज जाता है।

कंपनी के डिजिटल सेफ्टी सिस्टम में रियल टाइम खतरे की पहचान, IoT मॉनिटरिंग, मशीनों की प्रेडिक्टिव हेल्थ एनालिसिस, ड्रोन, स्मार्ट सर्विलांस और GenAI आधारित सेफ्टी ऑब्जर्वेशन सिस्टम शामिल हैं।

कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स के लिए भी सुविधा

  • कंपनी की Zero Harm नीति कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों पर भी लागू होती है।
  • इनके लिए अनिवार्य इंडक्शन, क्षमता का आकलन, काम के हिसाब से ट्रेनिंग, ऑडिट और परफॉर्मेंस मॉनिटरिंग की व्यवस्था है।
  • टाटा स्टील ने सेफ्टी लीडरशिप डेवलपमेंट के लिए दो सेंटर स्थापित किए हैं।
  • कंपनी अपनी सुरक्षा व्यवस्था की तुलना दुनिया की प्रमुख स्टील कंपनियों के साथ-साथ अन्य उद्योगों की सर्वोत्तम प्रक्रियाओं से करती है।

मेंटल हेल्थ पर भी फोकस

कंपनी ने सुरक्षा का दायरा केवल दुर्घटनाओं तक सीमित नहीं रखा है। मेंटल हेल्थ, हीट स्ट्रेस, थकान और एर्गोनॉमिक्स पर भी ध्यान दिया जा रहा है। इसके लिए पांच स्तंभों वाला वेलनेस फ्रेमवर्क अपनाया गया है, जिसमें शारीरिक, भावनात्मक, व्यावसायिक, सामाजिक और वित्तीय कल्याण शामिल हैं।

2045 तक नेट जीरो का लक्ष्य

टाटा स्टील साल 2045 तक नेट जीरो कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य लेकर चल रही है। कंपनी हाइड्रोजन से स्टील बनाने की तकनीक पर काम कर रही है, हालांकि इसके लिए ग्रीन हाइड्रोजन की कीमत 4-6 डॉलर से घटकर 1.5-2 डॉलर प्रति किलो होना जरूरी है।

सेफ्टी और पर्यावरण पर ₹802 करोड़ खर्च

टाटा स्टील ने वित्त वर्ष 2025-26 में पर्यावरण, सुरक्षा और अनुपालन से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर 802.17 करोड़ रुपये खर्च किए। वित्त वर्ष 2024-25 में यह खर्च 1,036.25 करोड़ रुपये था।

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