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ऐसी खबरें कि मन खुशी से भर जाए

पिछले दिनों जलपाईगुड़ी, पश्चिम बंगाल से वायरल हुआ एक वीडियो सामने आया। हुआ यूं कि एक हथिनी अपने 4 दिन के बच्चे के साथ तीस्ता नदी के किनारे खड़ी थी कि अचानक बच्चा नदी में गिर पड़ा। पानी का बहाव बहुत तेज था, वह नदी में  बहने लगा और डूबने-उतराने लगा। तभी वहां अपनी नाव पर सवार कई मछुआरों ने उसे देखा। उन्होंने तेजी से अपनी नाव को बच्चे की तरफ मोड़ा। वे हर हाल में उसे बचाना चाहते थे। तेज बहाव के कारण बच्चा दूर निकल गया था। मछुआरे भी जल्दी-जल्दी नाव खेते वहां पहुंचे। एक ने बच्चे को जैसे-तैसे कान से पकड़ा, फिर दूसरे ने पेट और पीठ का सहारा देकर नाव के अंदर खींचा।

थोड़ी देर तक यह नन्हा हाथी शिशु नाव के अंदर बेसुध-सा पड़ा रहा। नाविकों ने उसे थपथपाया। पेट दबाकर पानी बाहर निकालने की कोशिश की, उसकी पीठ और सिर पर प्यार से हाथ फेरा। जब यह हाथी का बच्चा कुछ चैतन्य हुआ तो उसने अपनी सूंड नाविकों के गले में लपेट-लपेटकर आभार प्रकट किया। जब इस बच्चे ने ऐसा किया तो इन नाविकों की निश्छल हंसी देखने लायक थी। नि:स्वार्थ भाव से किया गया कोई भी काम ऐसी ही खुशी देता है। वास्तव में तो यह दृश्य इतना मधुर और मासूम है कि इसे देखते रहने का ही मन करता रहता है। न जाने कितनी बार इस वीडियो को देख चुकी हूं। बाद में नाविक उस बच्चे को उसकी मां के पास छोड़कर आए। मां ने भी सूंड उठाकर उनका आभार प्रकट किया। स्थानीय प्रशासन तक जब यह खबर पहुंची, तो इन नाविकों का सम्मान किया गया। इनके काम की सराहना हर तरफ हुई। एक ऐसी ही मशहूर यूनानी कहानी बचपन में पढ़ी थी। एंड्रोक्लीज और शेर। एंड्रोक्लीज ने एक बार शेर के पंजे में चुभा कांटा निकाला था। बाद में किसी अपराध के कारण उसे मृत्युदंड दिया गया और शेर के पिंजरे में डाल दिया गया। संयोग से शेर वही था, जिसका कांटा निकाला गया था। उसने एंड्रोक्लीज को नहीं मारा।

टालस्टाय की एक मशहूर कहानी भी है-शेर और पिल्ला। चिडिय़ाघर में एक शेर के पिंजरे में उसके भोजन के लिए पिल्ला डाला जाता है, मगर शेर उसे मारता नहीं। उससे उसकी दोस्ती हो जाती है। दोनों साथ-साथ रहते हैं, खाते, पीते, सोते हैं। लोग उनकी दोस्ती को देखकर चकित होते हैं लेकिन पिल्ले की मृत्यु हो जाती है। चिडिय़ाघर के अधिकारी सोचते हैं कि शेर उदास है। उसके पिंजरे में दूसरा पिल्ला रखा जाए, जिससे कि शेर की उससे दोस्ती हो जाए। मगर शेर अपने पुराने मित्र पिल्ले की जगह दूसरे पिल्ले को बर्दाश्त नहीं करता। बहुत-सी ऐसी दिलचस्प घटनाएं सामने आती रहती हैं। कई साल पहले विदेश की एक घटना के बारे में पढ़ा था कि एक आदमी को नदी तट पर घूमते हुए घायल मगरमच्छ मिला। वह उसे अपने घर ले आया। उसका इलाज कराया। खूब खिलाया-पिलाया। जब वह ठीक हो गया, तो एक दिन वह व्यक्ति उसे नदी में छोड़ आया। अगले दिन जब इस आदमी ने अपना दरवाजा खोला, तो देखकर दंग रह गया कि मगरमच्छ बरामदे में सोया हुआ था। 

इसी प्रकार एक आदमी ने एक घायल पैंग्विन को बचाया था। फिर उसे उसके कुनबे में छोड़ दिया था। वर्षों तक वह पैंग्विन उस आदमी से मिलने आता रहा। कौओं के बारे में कहा जाता है कि यदि आप उन्हें भोजन दें, तो वे इसे कभी नहीं भूलते। आपको तरह-तरह के उपहार लाकर देते हैं। लेकिन यदि आप उन्हें सताएं, तो वर्षों तक वे इसे याद रखते हैं और मौका मिलते ही आक्रमण कर देते हैं। किसी दुर्घटना के समय अनेक बार बिल्लियों, कुत्तों, तोतों आदि ने अपने मालिकों को बचाया है। कई बार तो होता यह है कि जानवर अपने मालिक से बिछड़ जाए, तो वह ढूंढता हुआ वापस भी आ जाता है। कई साल पहले महाराष्ट्र में एक आदमी अपने कुत्ते के साथ घर से 250 किलोमीटर दूर मेला देखने गया, लेकिन मेले में कुत्ता खो गया। मालिक ने उसे बहुत ढूंढा लेकिन वह नहीं मिला। मालिक अपने गांव लौट आया लेकिन आश्चर्य, दो महीने बाद कुत्ता लौट आया। रास्ते में पता नहीं उसने कितनी आफतों को झेला होगा, भूखा-प्यासा रहा होगा, कुत्तों ने उस पर आक्रमण भी किया होगा लेकिन वह 250 किलोमीटर की यात्रा करके वापस आ गया। गांव वाले भी चकित रह गए। उन्होंने कुत्ते का खूब स्वागत-सत्कार किया। फूल-मालाओं से उसे लाद दिया। 

न जाने मनुष्य ने कैसे यह मान लिया है कि जानवरों में कोई भावनाएं ही नहीं होतीं, जबकि जानवर बेहद भावुक होते हैं। मनुष्य चाहे अपने ऊपर किए गए अहसानों को भूल जाए, पशु-पक्षी कभी नहीं भूलते। विशेषज्ञ कहते हैं कि पेड़ भी अपनी रक्षा करने वालों को पहचानते हैं। यदि कोई उहें नुकसान पहुंचाना चाहे, तो वे भी इससे भयभीत होते हैं। यदि कोई कुल्हाड़ी लेकर किसी पेड़ की तरफ बढ़ रहा है, तो वह पेड़ इसकी सूचना दूसरे पेड़ों को भी दे देता है। इस धरती पर जितने भी तरह के जीवन हैं, उनकी अपनी-अपनी जीवनशैली है। कृतज्ञता ज्ञापन के अपने तरीके हैं। मित्रता को निभाने के संकल्प हैं। यह अलग बात है कि हम उन्हें पहचान नहीं पाते।-क्षमा शर्मा

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