स्वास्थ्य

घंटों मोबाइल और लैपटॉप में झुकाए रहते हैं सिर, तो ये आदत बन सकती है दर्द की वजह, डॉक्टर से जानें सही तरीका

फरीदाबाद: आजकल गर्दन में दर्द की शिकायत सिर्फ उम्रदराज लोगों तक सीमित नहीं रही है. 25 से 30 साल की उम्र के युवाओं में भी यह परेशानी तेजी से देखने को मिल रही है. घंटों मोबाइल चलाना, लैपटॉप पर झुककर काम करना और लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठे रहना इसके पीछे की वजह हो सकता है. हालांकि, गर्दन में होने वाले हर दर्द को सर्वाइकल कहना सही नहीं है. अगर दर्द के साथ हाथ में झनझनाहट, सुन्नपन, कमजोरी या उंगलियों तक परेशानी पहुंच रही है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. आखिर कम उम्र में यह समस्या क्यों बढ़ रही है और किन आदतों में बदलाव जरूरी है, इसे लेकर डॉक्टर ने जरूरी जानकारी दी है.

25–30 की उम्र में गर्दन दर्द क्यों बढ़ रहा है? इस बारे में Local18 से बातचीत में अमृता हॉस्पिटल, फरीदाबाद के फिजिकल मेडिसिन एंड रिहैबिलिटेशन विभाग के कंसल्टेंट और असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. नितीश धीमान बताते हैं कि गर्दन के दर्द का उम्र से सीधा संबंध नहीं है. पहले यह परेशानी ज्यादा उम्र के लोगों में देखने को मिलती थी, लेकिन अब 25 से 30 साल की उम्र में भी लोगों को गर्दन में दर्द की शिकायत होने लगी है.

मोबाइल और लैपटॉप कितने जिम्मेदार?

डॉ. नितीश धीमान बताते हैं कि आज के समय में मोबाइल और लैपटॉप का इस्तेमाल लगभग हर किसी की जरूरत बन चुका है. पढ़ाई से लेकर नौकरी तक इनका इस्तेमाल करना पड़ता है. परेशानी सिर्फ मोबाइल या लैपटॉप चलाने से नहीं होती, बल्कि इसे कितनी देर और किस तरीके से इस्तेमाल किया जा रहा है, यह ज्यादा महत्वपूर्ण है. लंबे समय तक गर्दन झुकाकर या एक ही स्थिति में बैठकर काम करने से दर्द बढ़ सकता है.

मोबाइल इस्तेमाल करते समय गर्दन को लंबे समय तक नीचे झुकाकर नहीं रखना चाहिए. बीच-बीच में ब्रेक लेना जरूरी है. लैपटॉप पर काम करते समय टेबल और कुर्सी का इस्तेमाल करना चाहिए. स्क्रीन आंखों के स्तर पर या उससे थोड़ी नीचे होनी चाहिए. बिस्तर पर बैठकर या लेटकर लैपटॉप चलाने से बचना चाहिए. करीब हर आधे घंटे से 45 मिनट के बीच उठकर कुछ देर चलना और गर्दन व कंधों की हल्की एक्सरसाइज करना मददगार हो सकता है.

क्या हर गर्दन दर्द को सर्वाइकल कहना सही है?

डॉ. नितीश बताते हैं कि हर गर्दन के दर्द को सर्वाइकल कहना सही नहीं है. सर्वाइकल वास्तव में गर्दन की रीढ़ की हड्डी वाले हिस्से को कहा जाता है. गर्दन में दर्द के कई कारण हो सकते हैं. मांसपेशियों, रीढ़ की हड्डी, जोड़ों, हड्डियों के बीच मौजूद डिस्क या नसों से जुड़ी परेशानी के कारण भी दर्द हो सकता है. इसलिए सिर्फ गर्दन में दर्द होने पर उसे सर्वाइकल मान लेना सही नहीं है.

हाथ में सुन्नपन और कमजोरी को न करें नजरअंदाज

डॉ. नितीश बताते हैं कि गर्दन के दर्द के साथ हाथ में सुन्नपन बढ़ना, ताकत कम होना या चीजें पकड़ने में परेशानी होना चेतावनी के संकेत हो सकते हैं. अगर किसी व्यक्ति को बोतल पकड़ने, ढक्कन खोलने या सामान्य चीजें हाथ में संभालने में दिक्कत होने लगे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. इसके अलावा चलने में संतुलन बिगड़ना भी गंभीर संकेत हो सकता है. ऐसे लक्षण गर्दन से निकलने वाली नसों पर असर पड़ने की ओर इशारा कर सकते हैं. ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर से जांच करवानी चाहिए.

गर्दन दर्द से बचने के लिए कौन-सी 3 आदतें अपनाएं?

डॉ. नितीश बताते हैं कि सबसे पहले लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठने से बचना चाहिए. मोबाइल या लैपटॉप इस्तेमाल करते समय नियमित अंतराल पर ब्रेक लेना जरूरी है. दूसरा, रोजाना शारीरिक गतिविधि और एक्सरसाइज को अपनी दिनचर्या में शामिल करना चाहिए. गर्दन और कंधों की मांसपेशियों को मजबूत रखने से लंबे समय तक आराम मिल सकता है और बार-बार होने वाले दर्द की समस्या कम हो सकती है.

तीसरा, जहां बैठकर काम करते हैं, उस जगह को सही तरीके से व्यवस्थित करना जरूरी है. कुर्सी में पर्याप्त सपोर्ट होना चाहिए. टेबल की ऊंचाई ठीक होनी चाहिए और लैपटॉप भी ऐसी ऊंचाई पर रखा जाए, जिससे काम करते समय गर्दन पर ज्यादा दबाव न पड़े. बैठने का तरीका भी सही होना चाहिए. इन आदतों को अपनाने से गर्दन में दर्द होने की संभावना कम की जा सकती है.

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