‘माफियाओं के शिकंजे में देश’ थम नहीं रहा अवैध सिलसिला!

आज देश में जहां एक ओर भ्रष्टाचार तथा महंगाई ने लोगों का जीना दूभर कर रखा है, वहीं दूसरी ओर समाज-विरोधी विभिन्न माफिया गिरोहों द्वारा देश में अवैध गतिविधियां, हिंसा तथा रक्तपात लगातार जारी है। इन माफियाओं के हौसले इतने बढ़ चुके हैं कि वे अपने मार्ग में बाधा बनने वाले किसी भी व्यक्ति को क्षति पहुंचाने और यहां तक कि उसकी हत्या करने में जरा भी संकोच नहीं करते। यहां विभिन्न माफियाओं द्वारा इसी वर्ष मचाए उत्पात की चंद घटनाएं निम्न में दर्ज हैं :
* 21 फरवरी को ‘पानीपत’ (हरियाणा) में ‘इसराना’ क्षेत्र के ‘लुहारी’ गांव में अवैध खनन रोकने गई एन्फोर्समैंट ब्यूरो की टीम पर खनन माफिया के बदमाशों ने हमला कर दिया। उन्होंने पुलिस द्वारा जब्त किए गए मिट्टी से लदे वाहन से पुलिस कर्मियों को खींच कर नीचे उतारा और उनकी पिटाई करने के बाद उस वाहन को लेकर भाग गए।
* 8 मई को ‘पंचमहाल’ (गुजरात) जिले के ‘घुसर’ गांव में अवैध खनन रोकने पहुंचे माइनिंग सुपरवाइजर और रॉयल्टी इंस्पैक्टर को ट्रैक्टर-ट्रॉली ड्राइवरों और माफिया के गुर्गों ने बेरहमी से पीटा जिन्हें गंभीर हालत में इलाज के लिए ‘गोधरा’ के सिविल अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ा।
* 4 जून को ‘सुंदरगढ़’ (ओडिशा) में खनन माफिया के बदमाश पुलिस टीम पर दिन-दिहाड़े हमला कर पुलिस कर्मियों द्वारा जब्त किए गए अवैध रेत से लदे 3 ट्रैक्टरों को जबरन छुड़ा कर ले गए।
* 26 जून को ‘दतिया’ (मध्य प्रदेश) के ‘भगुवापुरा’ थाना क्षेत्र में अवैध रेत खनन को रोकने गई खनन विभाग की उडऩ-दस्ता टीम पर बड़ी संख्या में माफिया के बदमाशों ने हमला कर दिया और अपनी जान खतरे में देख कर अधिकारियों को वहां से भागना पड़ा।
* 1 सितम्बर को ‘गुरदासपुर’ (पंजाब) के गांव ‘बब्बेहाली’ में मेले की ड्यूटी देकर घर लौट रहे पुलिस कांस्टेबल ‘कर्णप्रीत सिंह’ पर हमला करके आरोपियों ने उसकी टांगें तोड़ दीं और मोटरसाइकिल पर उसके पीछे बैठी उसकी बहन ‘बलविंद्र कौर’ को भी घायल कर दिया। पीड़ित पुलिस कांस्टेबल ‘कर्णप्रीत सिंह’ ने आरोप लगाया कि उसने गांव में नशा तस्करी का धंधा करने वालों को पकड़वाया था जिस कारण उस पर यह हमला किया गया।
* 22 सितम्बर को ‘प्रतापगढ़’ (राजस्थान) के ‘छोटी सदरी’ वन क्षेत्र में चल रहे अवैध खनन को रोकने गए फॉरैस्ट रेंजर ‘प्रताप सिंह चूड़ावत’ तथा एक वन रक्षक को एक डम्पर के ड्राइवर ने टक्कर मार दी। इसके परिणामस्वरूप फॉरैस्ट रेंजर ‘प्रताप सिंह चूड़ावत’ काफी दूर तक डम्पर के साथ घिसटते चले गए जिससे उनकी मौत हो गई।
* 7 अक्तूबर को ‘सवाई माधोपुर’ (राजस्थान) में अवैध रूप से खनन की गई रेत से भरी ट्रैक्टर ट्राली को ‘चौथ का बरवाड़ा’ पुलिस थाने के कांस्टेबल सुरेंद्र सिंह द्वारा रोकने की कोशिश करने पर ट्रैक्टर के ड्राइवर ने कांस्टेबल को धक्का मार कर घायल कर दिया और ट्रैक्टर ट्राली लेकर भाग गया। इस घटना में एक बुजुर्ग महिला भी घायल हो गई।
* 13 सितम्बर को ‘जगतसिंहपुर’ (ओडिशा) में देर रात गश्त के दौरान नशा तस्करों ने पुलिस पर कार चढ़ाकर उन्हें कुचलने की कोशिश की जिसके परिणामस्वरूप कांस्टेबल ‘नित्यानंद सेनापति’ गंभीर रूप से घायल हो गया। पुलिस ने इस सिलसिले में मुख्य आरोपियों ‘विक्की परीजा’ और ‘जॉकी परीजा’ सहित 5 लोगों को गिरफ्तार किया।
* 13 अक्तूबर को ‘मानसा’ (पंजाब) में नशे के विरुद्ध आवाज उठाने वाले सामाजिक कार्यकत्र्ता ‘परविंदर सिंह झोटा’ की हत्या करने के आरोप में एक मैडिकल स्टोर के मालिक (नशा तस्कर) को गिरफ्तार किया गया।
* 14 अक्तूबर की रात को ‘नालंदा’ (बिहार) के शराब माफिया के ठिकाने पर छापा मारने गई पुलिस की टीम पर शराब तस्करों द्वारा की गई फायरिंग के कारण एक पुलिस कांस्टेबल ‘अजीत कुमार’ की मौत हो गई।
* 14 अक्तूबर को ही ‘बगहा’ (बिहार) के ‘नौरंगिया’ में एक शराब तस्कर ‘नागेंद्र बीन’ को पकडऩे वाली पुलिस की टीम पर उसके रिश्तेदार सहित लगभग 15 गांव वालों ने हमला कर दिया और 5 पुलिस कर्मियों को घायल करके ‘नागेंद्र बीन’ को छुड़ा लिया।
उक्त घटनाओं से स्पष्टï है कि आज विभिन्न समाज विरोधी माफियाओं की गतिविधियां किस कदर बढ़ चुकी हैं और आम आदमी ही नहीं बल्कि प्रशासन भी माफिया के हाथों बंधक बन कर रह गया है। अत: इस संबंध में माफिया के विरुद्ध कड़ा अभियान छेडऩे के साथ-साथ उनके विरुद्घ कड़ी कार्रवाई किए बगैर इस समस्या का हल संभव नहीं।—विजय कुमार




