मध्यप्रदेश

ट्विशा शर्मा केस: रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह को हाई कोर्ट से झटका, जमानत याचिका खारिज

भोपाल: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने बहू ट्विशा शर्मा की मौत के मामले में आरोपी रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह को जमानत देने से इनकार कर दिया है। जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की बेंच ने मामले की गंभीरता, जांच में जुटे सबूतों और अभी बाकी फॉरेंसिक रिपोर्ट को देखते हुए उनकी याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि मामले में आगे की जांच जारी है और कुछ अहम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

CCTV फुटेज और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का भी जिक्र

हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि मामले के तथ्यों, आरोपों की गंभीरता, जांच के दौरान जुटाई गई सामग्री और मौत से ठीक पहले की परिस्थितियों को ध्यान में रखा गया है। कोर्ट ने CCTV फुटेज और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का भी उल्लेख किया। इसके अलावा, मृतका के मोबाइल से निकाले गए डिजिटल डेटा की जांच और कुछ महत्वपूर्ण फॉरेंसिक रिपोर्ट अभी आना बाकी हैं।

जांच पूरी होने तक जमानत देने के पक्ष में नहीं कोर्ट

बेंच ने कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 193(9) के तहत आगे की जांच जारी है। ऐसे में महत्वपूर्ण फॉरेंसिक और डिजिटल एक्सट्रैक्शन रिपोर्ट का इंतजार है। इन परिस्थितियों को देखते हुए फिलहाल गिरिबाला सिंह को जमानत पर रिहा करना उचित नहीं होगा।

WhatsApp चैट में मानसिक प्रताड़ना के संकेत

कोर्ट ने केस डायरी में दर्ज सामग्री और मृतका की मां तथा ननद के साथ हुई व्हाट्सएप बातचीत का भी उल्लेख किया। बेंच के अनुसार, इन बातचीत से मृतका को कथित तौर पर लगातार मानसिक प्रताड़ना और क्रूरता का सामना करने के संकेत मिलते हैं। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि वैवाहिक रिश्ते में पति की ओर से बच्चे के पितृत्व पर सवाल उठाए जाने के कारण ट्विशा खुद को मानसिक रूप से घिरा हुआ महसूस कर रही थीं।

गर्भावस्था को लेकर विवाद का भी जिक्र

हाई कोर्ट ने केस डायरी और रिकॉर्ड की गई बातचीत के ट्रांसक्रिप्ट का हवाला देते हुए कहा कि ट्विशा और गिरिबाला सिंह के बीच गर्भावस्था को लेकर विवाद हुआ था। कोर्ट के अनुसार, यह विवाद ट्विशा की ओर से गर्भपात के लिए MTP दवाएं लेने के बाद सामने आया था। अदालत ने मामले की परिस्थितियों को एक साथ देखते हुए जमानत देने से इनकार किया।

दहेज की मांग और मौत से जुड़े आरोपों की जांच जारी

कोर्ट ने कहा कि दहेज की मांग और मौत से जुड़े आरोपों की जांच अभी पूरी नहीं हुई है। मृतका के मोबाइल फोन से निकाले गए डेटा की फॉरेंसिक जांच भी बाकी है। इससे मामले से जुड़े कुछ और तथ्य सामने आ सकते हैं। गिरिबाला सिंह की ओर से यह दलील दी गई थी कि उनके खिलाफ अपराध के लिए जरूरी मंशा का आधार नहीं बनता। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि इस दलील को केस डायरी में सामने आई दूसरी परिस्थितियों से अलग करके नहीं देखा जा सकता।

12 मई को भोपाल में हुई थी ट्विशा की मौत

33 वर्षीय ट्विशा शर्मा नोएडा में रहती थीं और पूर्व मिस पुणे विजेता थीं। 12 मई को वह भोपाल के कटारा हिल्स स्थित अपने ससुराल में फंदे पर लटकी मिली थीं। उनके परिवार ने ससुराल पक्ष पर लगातार घरेलू हिंसा और प्रताड़ना के आरोप लगाए थे। परिवार ने मौत की वास्तविक वजह जानने के लिए दूसरे पोस्टमॉर्टम की मांग भी की थी।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर CBI को सौंपी गई थी जांच

मामले में शुरुआत में कटारा हिल्स थाने में FIR दर्ज हुई थी। इसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 80(2) यानी दहेज मृत्यु, धारा 85 यानी क्रूरता और धारा 3(5) के साथ दहेज निषेध अधिनियम की धाराएं भी लगाई गई थीं। बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जांच CBI को सौंप दी गई।

पहले मिली अग्रिम जमानत हाई कोर्ट ने कर दी थी रद्द

गिरिबाला सिंह को भोपाल की ट्रायल कोर्ट ने 15 मई को अग्रिम जमानत दी थी। राज्य सरकार और ट्विशा के माता-पिता ने इस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। हाई कोर्ट ने 27 मई को उनकी अग्रिम जमानत रद्द कर दी थी। इसके बाद वह न्यायिक हिरासत में हैं। भोपाल की अदालत ने 30 जून और 14 जुलाई को उनकी न्यायिक हिरासत बढ़ाई थी।

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