राहुल की चुनौती क्यों स्वीकार नहीं करते मोदी

हेला ने पूछा था कि प्रधानमंत्री मोदी, आप दुनिया की सबसे स्वतंत्र प्रेस के सवाल क्यों नहीं लेते? क्या आप हमारी सरकार के विश्वास के योग्य हैं? पीएम मोदी ने इन सवालों का कोई जवाब नहीं दिया था। हेला के सवाल पर भारत में भी काफी बहस रही। तब भी लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री को आड़े हाथों लिया और पूछा कि सवालों से घबरा क्यों रहे हैं? इन विवादों को सुलझाने के लिए विदेश मंत्रालय ने भारत के लोकतंत्र का बचाव किया। पीएम मोदी के इस दौरे में दूसरी बार था, जब इन मुद्दों पर सरकार को सफाई देनी पड़ी। रिपोट्र्स विदाउट बॉर्डर्स द्वारा जारी 2026 के वल्र्ड विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक में भारत को 180 देशों में 157वां स्थान मिला है। इससे भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि प्रभावित होती है…
वास्तविक लोकतंत्र वहीं होता है, जहां सत्तापक्ष विपक्ष और पत्रकारों के सवालों के जवाब दे। देश में सत्तापक्ष का मुखिया प्रधानमंत्री होता है, इसलिए सवालों का अंतिम पड़ाव भी प्रधानमंत्री होता है। इस दृष्टि से भारतीय लोकतंत्र का यह पक्ष कमजोर माना जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सत्ता में आने के बाद से लगातार विपक्ष और पत्रकारों के सवालों की उपेक्षा के आरोप लगते रहे हैं। यह आरोप सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी लगे हैं। इतना ही नहीं, विपक्ष की आवाज दबाने के आरोपों का सामना लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा के सभापति को करना पड़ा है। सर्वाधिक आश्चर्य की बात यह है कि पीएम मोदी ने कभी भी विपक्ष के आरोपों का सीधा जवाब नहीं दिया। ऐसे मौकों पर पीएम मोदी के बजाय भाजपा के नेता और मंत्री ही सवालों के जवाब आरोपों के अंदाज में देते रहे हैं। पीएम मोदी मन की बात या दूसरे मुद्दों पर सोशल मीडिया का ही उपयोग करते रहें हैं। संसद और बाहर उठाए गए सवालों के जवाब में सत्तारूढ़ भाजपा ने उल्टे सवाल पूछ कर मुद्दों को गोलमोल करने का प्रयास किया है। विपक्ष यही आरोप संसद सत्र के दौरान लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा के सभापति पर लगाता रहा है। राहुल गांधी ने 3 दिन में 4 बार पीएम को मुद्दों पर बहस करने की चुनौती दी। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी पर विदेशी ताकतों के दबाव में काम करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि मोदी विपक्ष पर देश विरोधी होने और विदेशी ताकतों से संबंध रखने के आरोप लगाते हैं, इसलिए उन्हें इन मुद्दों पर खुली बहस करनी चाहिए। राहुल ने बहस के लिए भारत-अमेरिका ट्रेड डील, देश की आर्थिक व्यवस्था, उद्योगपति गौतम अडाणी और जेफ्री एपस्टीन से जुड़े मुद्दे उठाए।




