दिवाली पर महंगाई घटने से बढ़ी खुशियां

देश में जीएसटी घटने से खपत बढ़ रही है और निर्यात को भी नई गति मिल रही है। मांग व उत्पादन बढऩे से जीडीपी में वृद्धि हो रही है। रोजगार के अवसरों में भी वृद्धि हो रही है। इस परिप्रेक्ष्य में यहां यह भी उल्लेखनीय है कि वैश्विक क्रेडिट रेटिंग एजेंसी मूडीज ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि भारत में कर दरों में कमी किए जाने से निजी उपभोग को बढ़ावा मिल रहा है और आर्थिक विकास मजबूत हो रहा है…
यकीनन महंगाई दर घटने और (वस्तु एवं सेवा कर) जीएसटी की दरें घटने से देश में त्योहारी बाजार में अभूतपूर्व खरीदी का परिदृश्य दिखाई दे रहा है और दिवाली की खुशियां बढ़ गई हैं। 13 अक्तूबर को राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक सितंबर 2025 के दौरान खुदरा महंगाई घटकर 1.54 प्रतिशत रह गई। यह इससे पिछले महीने 2.07 प्रतिशत थी। यह खुदरा महंगाई दर सितंबर 2024 में 5.49 प्रतिशत थी। इस बार सितंबर 2025 में खुदरा महंगाई दर आठ साल में सबसे कम है और यह आरबीआई के लक्ष्य के निचले स्तर पर पहुंच गई है। खुदरा महंगाई में गिरावट मुख्य रूप से सब्जियों, तेल और वसा, फलों, दालों, अनाज, अंडे, ईंधन और विद्युत की महंगाई में गिरावट के कारण है। इस वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी छमाही के लिए मुद्रास्फीति के परिदृश्य के बारे में आरबीआई ने कहा कि दक्षिण-पश्चिम मानसून की अच्छी प्रगति, खरीफ की अधिक बुवाई, जलाशयों का पर्याप्त स्तर और खाद्यान्नों का पर्याप्त बफर स्टॉक खाद्य कीमतों को नरम बनाए रखेगा।
यहां यह भी उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 अक्तूबर को कृषि क्षेत्र और किसानों के लिए दिवाली का उपहार देते हुए नई दिल्ली में एक विशेष कृषि कार्यक्रम में कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में 42 हजार करोड़ रुपए से अधिक की लागत वाली कई परियोजनाओं और योजनाओं का शुभारंभ, उद्घाटन और शिलान्यास किया। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी ने कृषि क्षेत्र की दो प्रमुख पहलों, ‘प्रधानमंत्री धन धान्य कृषि योजना’ और ‘दलहन आत्मनिर्भरता मिशन’ का अनावरण किया, जिनका परिव्यय 35 हजार करोड़ रुपए से अधिक है। प्रधानमंत्री ने कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्रों में 5,450 करोड़ से अधिक मूल्य की परियोजनाओं का उद्घाटन किया और लगभग 815 करोड़ मूल्य की अतिरिक्त परियोजनाओं की आधारशिला रखी।
यह बात महत्त्वपूर्ण है कि पीएम धन धान्य कृषि योजना 24 हजार करोड़ रुपए के परिव्यय के साथ शुरू की गई है, जिसका उद्देश्य कृषि उत्पादकता में वृद्धि, फसल विविधीकरण और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाना, सिंचाई सुविधाओं में सुधार और चयनित 100 जिलों में दीर्घकालिक और अल्पकालिक ऋण की उपलब्धता को सुगम बनाना है। निसंदेह महंगाई दर के घटने और 22 सितंबर से जीएसटी सुधारों के लागू होने से इस बार दिवाली के त्योहारी बाजार में स्थानीय और स्वदेशी वस्तुओं की भी अभूतपूर्व खरीदी का परिदृश्य दिखाई दे रहा है। जीएसटी में सरलता और नए जीएसटी ढांचे के रोडमैप के तहत जीएसटी के चार टैक्स स्लैब में बदलाव करते हुए इन्हें घटाकर 5 फीसदी और 18 फीसदी स्लैब में बदलाव ने त्योहारी बाजार को नई उर्जा दी हैं। जीएसटी दरों में नए बदलाव से वर्तमान में 12 फीसदी जीएसटी वाली लगभग 99 फीसदी वस्तुएं अब पांच फीसदी के स्लैब में आ गई है। जबकि 28 फीसदी टैक्स वाली लगभग 90 फीसदी वस्तुएं 18 फीसदी के स्लैब में आ गई हैं। पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के नागरिकों को सोशल मीडिया पर पत्र लिखकर कहा कि 22 सितंबर से लागू वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) सुधार तथा आयकर में कटौती से लोगों को लगभग 2.5 लाख करोड रुपए की बचत प्राप्त होगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि इससे देशवासी बचत से हुई खुशी के साथ बचत उत्सव मनाते हुए दिखाई देंगे और ऐसे में कई परिवारों को अपनी आजीविका कमाने और युवाओं के लिए नौकरी के अवसर पैदा करने में मदद मिलेगी।
उन्होंने नागरिकों से स्वदेशी उत्पाद खरीदने और दुकानदारों से स्वदेशी उत्पाद बेचने का आग्रह भी किया। वास्तव में यह सब बातें इस बार के दीपावली के त्योहारी बाजार में दिखाई भी दे रही है। इस परिप्रेक्ष्य में उल्लेखनीय है कि आम आदमी व मध्यमवर्गीय लोगों को कीमतों में राहत और लोगों की क्रय शक्ति बढऩे से बाजार में नकदी प्रवाह भी बढ़ गया है। जो छोटे उद्योग ट्रंप टैरिफ के कारण निर्यात घटने को लेकर चिंतित हैं, उन्हें घरेलू उपभोक्ताओं की बढ़ती मांग से बड़ा सहारा मिल रहा है। इतना ही नहीं जीएसटी घटने से औद्योगिक उत्पादन बढ़ रहा है और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर से लेकर सर्विस सेक्टर तक मांग का बढ़ता हुआ नया अध्याय दिखाई दे रहा है। देश में जीएसटी घटने से खपत बढ़ रही है और निर्यात को भी नई गति मिल रही है। मांग व उत्पादन बढऩे से जीडीपी में वृद्धि हो रही है। रोजगार के अवसरों में भी वृद्धि हो रही है। इस परिप्रेक्ष्य में यहां यह भी उल्लेखनीय है कि वैश्विक क्रेडिट रेटिंग एजेंसी मूडीज ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि भारत में कर दरों में कमी किए जाने से निजी उपभोग को बढ़ावा मिल रहा है और आर्थिक विकास मजबूत हो रहा है। यह भी कोई छोटी बात नहीं है कि वैश्विक क्रेडिट रेटिंग एजेंसी फिच ने चालू वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की विकास दर के अनुमान को 6.5 फीसदी से बढ़ाकर 6.9 फीसदी कर दिया है। निसंदेह दिवाली त्योहार के सीजन में घरेलू खर्च और खपत बढ़ते हुए दिखाई दे रही है। खासतौर से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (एमएसएमई) और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के लगभग सभी पदार्थों पर जीएसटी दरों में कमी होने से खाद्य प्रसंस्करण और संबद्ध उद्योगों की बिक्री बढ़ गई है। यह बात भी महत्त्वपूर्ण है कि त्योहारी बाजार में दोपहिया वाहनों, कारों, बसों और ट्रैक्टरों पर कम जीएसटी से मांग बढ़ गई है।
चाहे आम आदमी के इस्तेमाल की चीज हो, चाहे वह किसानों से जुड़ी वस्तुएं हों, चाहे वह मध्यम वर्ग से संबंधित वस्तुएं हों, प्रत्येक क्षेत्र में एमएसएमई को दी गई बड़ी जीएसटी राहत से त्योहारी बाजार को रफ्तार मिल रही है। देश में लोगों की क्रय शक्ति बढऩे और अमरीका में डॉलर की वैल्यू घटने से इस साल त्योहारी सीजन में चांदी और सोने का भाव भी रिकॉर्ड स्तर पर दिखाई दे रहा है। बाजार में चांदी और सोने को खरीदी के लिए भी लोग बड़ा उत्साह दिखाते हुए दिखाई दे रहे हैं। इस परिप्रेक्ष्य में उल्लेखनीय है कि इस बार दीपावली का बाजार जहां करोड़ों लोगों के द्वारा स्वदेशी और वोकल फॉर लोकल की संकल्प शक्ति के साथ आत्मनिर्भर भारत की डगर पर दिखाई दे रहा है, वहीं इस वर्ष 2025 में देश के बाजारों में खरीददारों की भीड़ उमडऩे और घरेलू खपत चरम पर रहने का परिदृश्य है। जहां वर्ष 2023 में दिवाली के त्योहारी बाजार में 3.75 लाख करोड़ रुपए और वर्ष 2024 में 4.25 लाख करोड़ रुपए की खरीददारी हुई थी, वहीं इस बार त्योहारी सीजन के तहत खरीददारी 4.75 लाख करोड़ रुपए के अभूतपूर्व स्तर को छूते हुए दिखाई दे सकती है।
निश्चित रूप से देश में 13 अक्तूबर को प्रकाशित आंकड़ों के मुताबिक खुदरा महंगाई के घटकर 1.54 फीसदी रहने और 22 सितंबर से लागू नई जीएसटी व्यवस्था और दो स्लैब वाली कर प्रणाली से दिवाली के त्योहारी सीजन में अभूतपूर्व मांग दीपावली को लेकर लोगों की बढ़ी हुई खुशियों का प्रतीक भी है। उम्मीद करें कि देश में घटी हुई महंगाई और घटी हुई जीएसटी की दरों के कारण इस बार की दिवाली एक बचत उत्सव के रूप में स्वदेशी उत्पादों की बिक्री और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देते हुए देश को आत्मनिर्भर भारत की दिशा में आगे बढ़ाने में मील का पत्थर बनते हुए दिखाई देगी।
डा. जयंती लाल भंडारी




