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भारतीय अर्थव्यवस्था होगी मजबूत, इस साल 6.3 प्रतिशत जीडीपी विकास दर

 ब्यूरो — नई दिल्लीअंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने अपनी ताजा रिपोर्ट में भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती पर भरोसा जताते हुए विकास दर के नए आंकड़े जारी किए हैं। आईएमएफ भारत जीडीपी पूर्वानुमान के अनुसार, वैश्विक उथल-पुथल के बावजूद भारत तुलनात्मक रूप से बेहतर प्रदर्शन करने की स्थिति में बना हुआ है। आईएफएम की रिपोर्ट बताती है कि भारत आने वाले वर्षों में भी दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में अपनी जगह बनाए रखेगा। घरेलू निवेश और सरकारी नीतियों के समर्थन से भारत की आर्थिक दिशा भविष्य में काफी सकारात्मक और स्थिर नजर आ रही है। आईएमएफ ने शुक्रवार को जारी अपने ताजा अनुमानों में बताया है कि वर्ष 2026 में भारत की जीडीपी विकास दर 6.3 प्रतिशत रहने की संभावना है। इसके बाद वर्ष 2027 में आर्थिक वृद्धि और बेहतर होकर 6.5 प्रतिशत तक पहुंच सकती है, जो कैलेंडर वर्ष के आधार पर जारी डेटा है।

यह वृद्धि देश में बढ़ती घरेलू मांग, निवेश गतिविधियों में निरंतरता और लागू किए गए महत्त्वपूर्ण संरचनात्मक सुधारों के कारण संभव होती दिख रही है। वैश्विक स्तर पर अर्थव्यवस्था में एक स्थिर गति से वृद्धि जारी रहने की उम्मीद है, जो पहले के अनुमानों से अब थोड़ी अधिक बताई गई है। आईएमएफ के अनुसार, वैश्विक आर्थिक विकास दर 2026 में 3.3 प्रतिशत और 2027 में 3.2 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है, जो काफी संतोषजनक है। तकनीकी निवेश में तेजी और सहायक मौद्रिक नीतियों ने वैश्विक स्तर पर व्यापार नीतियों में हुए बदलावों के प्रभाव को काफी हद तक संतुलित कर दिया है।

आम जनता के लिए राहत

आम जनता के लिए राहत की बात यह है कि दुनिया भर में महंगाई दर में आने वाले समय में बड़ी गिरावट आने का अनुमान है। हालांकि रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि अमरीका में महंगाई अपने निर्धारित लक्ष्य तक अपेक्षाकृत काफी धीमी गति से वापस लौटती हुई दिखाई देगी। महंगाई में कमी आने से वैश्विक बाजारों में स्थिरता आने की संभावना है, जिससे निवेश और उपभोग के नए रास्ते खुल सकते हैं और बाजार सुधरेगा।

संभावित जोखिम-चेतावनी

सकारात्मक अनुमानों के बावजूद, आईएमएफ ने आर्थिक परिदृश्य के लिए कई तरह के नकारात्मक जोखिमों के प्रति दुनिया के सभी देशों को आगाह भी किया है। भू-राजनीतिक तनावों में संभावित बढ़ोतरी और तकनीक से जुड़ी उम्मीदों का पुनर्मूल्यांकन वैश्विक विकास के लिए वर्तमान में सबसे प्रमुख जोखिम कारक बन सकते हैं। नीति निर्माताओं को सलाह दी गई है कि वे राजकोषीय बफर बहाल करें और दीर्घकालिक विकास सुनिश्चित करने के लिए संरचनात्मक सुधारों को प्रभावी ढंग से लागू करें।

भारत की तुलनात्मक मजबूती

वैश्विक अनिश्चितताओं के इस दौर में भारतीय अर्थव्यवस्था अन्य देशों की तुलना में काफी मजबूत, स्थिर और बहुत बेहतर प्रदर्शन करने वाली दिखाई दे रही है। भारत ने उच्च विकास और निम्न मुद्रास्फीति का एक ऐसा बेहतरीन मॉडल पेश किया है जो अब पूरी दुनिया के लिए एक बड़ा उदाहरण बन गया है। यह स्थिरता भारत को दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने और आम आदमी के जीवन स्तर में सकारात्मक सुधार लाने में काफी सहायक होगी।

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