छत्तीसगढ़

फर्जी आदेश के दम पर वर्षों तक सरकारी नौकरी कर रहे चार कर्मचारी बर्खास्त, एफआईआर दर्ज

खैरागढ़। राज्य शिक्षा आयोग के फर्जी आदेश के सहारे वर्षों तक सरकारी सेवा करने वाले चार कर्मचारियों को जांच के बाद जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) ने सेवा से बर्खास्त कर दिया है. इसके साथ अब उनके खिलाफ गंभीर धाराओं में आपराधिक मामला दर्ज कराया है. इस कार्रवाई से शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है.

मामला वर्ष 2021 का बताया जा रहा है, जब टीकमचंद साहू, फगेंद्र सिंहा, रजिया अहमद और अजहर अहमद को जिले के अलग-अलग स्कूलों में सहायक ग्रेड-3 तथा डाटा एंट्री ऑपरेटर के पद पर नियुक्ति दी गई थी. इसके साथ ही डोलामणी मटारी, सादाब उस्मान, आशुतोष कछवाहा और अमीन शेख भी मोहला-मानपुर जिले के विद्यालयों में पदस्थ थे. नियुक्ति के दस्तावेजों की पड़ताल में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए.

जांच में पता चला कि सितंबर 2021 में राज्य शिक्षा आयोग के तत्कालीन सचिव डॉ. ओपी मिश्रा के नाम से जारी जिस आदेश के आधार पर नियुक्तियां की गई थीं, उक्त क्रमांक का पत्र वास्तव में बैंक ऑफ बड़ौदा की विवेकानंद नगर शाखा को जारी किया गया था. इतना ही नहीं, दस्तावेजों पर मौजूद सचिव के हस्ताक्षर भी आधिकारिक रिकॉर्ड से मेल नहीं खा रहे थे.

शिक्षा विभाग से मार्गदर्शन लेने और आयोग के आदेश को फर्जी पाए जाने के बाद डीईओ लालजी द्विवेदी ने छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियम, 1966 के नियम 10(9) के तहत चारों कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया. इसके बाद उन्होंने थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर पुलिस ने धारा 420, 467, 468, 471 और 120-बी के तहत मामला पंजीबद्ध किया है.

हाई और हायर सेकेंडरी में मिली थी तैनाती

फर्जी आदेश के आधार पर शिक्षा विभाग ने मई 2022 में टीकमचंद साहू को हाईस्कूल मोहगांव, फगेंद्र सिंहा को उच्चतर माध्यमिक शाला बकरकट्टा, रजिया अहमद को उमा शाला पैलीमेटा में सहायक ग्रेड-3 और अजहर अहमद को छुईखदान बीईओ कार्यालय में डाटा एंट्री ऑपरेटर के रूप में पदस्थ किया था. इनके अलावा सीएच एंथोनी को ठाकुरटोला उमा शाला में सहायक ग्रेड-3 नियुक्त किया गया था, लेकिन उन्होंने कभी कार्यभार नहीं संभाला.

कलेक्टोरेट में भी कर चुके थे काम

जिले के गठन के बाद रजिया अहमद को कलेक्टोरेट की डीएमएफ शाखा और अजहर अहमद को अभियोजन शाखा में अटैच किया गया था. वहीं फगेंद्र सिंहा और टीकमचंद साहू से डीईओ कार्यालय में काम लिया जा रहा था. अगस्त 2025 में मामला उजागर होने के बाद चारों ने अलग-अलग कारण बताते हुए अवकाश ले लिया था, लेकिन उनके द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज और बचाव संतोषजनक नहीं पाए गए. लंबी जांच प्रक्रिया के बाद विभाग ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए नौकरी पाने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है. पुलिस अब इस पूरे रैकेट की तह तक जाने की तैयारी कर रही है.

फर्जी था नियुक्ति पत्र – डीईओ

खैरागढ़ जिला शिक्षा अधिकारी लालजी द्विवेदी ने बताया कि प्रारंभिक स्तर पर ही नियुक्ति पत्रों की सत्यता को लेकर गंभीर संदेह था, जिसके बाद राज्य शिक्षा आयोग से औपचारिक सत्यापन कराया गया. जांच में यह स्पष्ट हुआ कि जिस आदेश के आधार पर इन कर्मचारियों को नियुक्ति और पदस्थापना दी गई थी, वह फर्जी था, और सचिव के हस्ताक्षर भी वास्तविक रिकॉर्ड से मेल नहीं खाते थे.

विभाग सुनिश्चित करेगा निष्पक्ष जांच

उन्होंने कहा कि शासकीय सेवा में किसी भी प्रकार की अनियमितता या धोखाधड़ी बर्दाश्त नहीं की जा सकती, इसलिए नियमानुसार चारों कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त किया गया है, और कानूनी कार्रवाई के लिए पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई गई है. विभाग इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करेगा और यदि इसमें कोई और व्यक्ति संलिप्त पाया जाता है, तो उसके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई होगी.

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button