व्यापार

भारत से सेवा निर्यात की अनुकूलताएं

यकीनन जहां भारत की एआई क्षमता और डिजिटल अर्थव्यवस्था भारत के सेवा निर्यात को मजबूती दे रही है, वहीं भारत के व्यापार समझौते भारत से सेवा निर्यात बढ़ाने के लिए नई शक्ति बनते हुए दिखाई दे रहे हैं। हाल ही में एक जून से भारत और ओमान के बीच लागू वृहद आर्थिक एवं साझेदारी समझौता (सीईपीए) भारत से ओमान को सेवा निर्यात बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इस समय भारत से ओमान को सेवा निर्यात करीब 67 करोड़ डॉलर का है। यह आगामी पांच वर्षों में 1.5 अरब से 2 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंचने की उम्मीद है। प्रमुख रूप से ओमान ने अपने 127 से अधिक सेवा उप-क्षेत्रों में भारतीय कंपनियों को प्रवेश की अनुमति दी है। इस समझौते के तहत ओमान में भारतीय पेशेवरों, चिकित्सा, शिक्षा, डिजिटल, विकास और पर्यटन के क्षेत्रों में अभूतपूर्व वृद्धि की उम्मीद है। उल्लेखनीय है कि भारत के विभिन्न व्यापार समझौतों में सेवा निर्यात बढ़ाने को प्राथमिकता दी गई है। पिछले माह 15 से 20 मई तक प्रधानमंत्री मोदी ने पांच देशों- संयुक्त अरब अमीरात, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली की आधिकारिक यात्रा के दौरान इन देशों के साथ जो द्विपक्षीय व्यापार समझौते किए हैं, उनसे भारत की नई पीढ़ी के लिए सेवा निर्यात में आगे बढऩे की संभावनाएं उभरकर दिखाई दे रही हैं। विगत 27 अप्रैल को भारत और न्यूजीलैंड के बीच एक ऐतिहासिक एफटीए पर हस्ताक्षर हुए हैं।

न्यूजीलैंड के साथ किए गए इस एफटीए का अत्यधिक मजबूत पक्ष भारत से सेवा निर्यात बढ़ाना और भारत से पेशेवरों को न्यूजीलैंड में अच्छे अवसरों के लिए आगे बढ़ाना भी है। यह भी महत्वपूर्ण है कि पिछले वर्ष 2025 में भारत के द्वारा ब्रिटेन के साथ किए गए एफटीए का भी इसी वर्ष 2026 में आगामी महीनों में कार्यान्वयन शुरू होगा। साथ ही भारत-यूरोपीय संघ एफटीए का क्रियान्वयन भी इसी वर्ष संभावित है। इस समझौते को सभी समझौतों की जननी कहा गया है। अब मॉरीशस, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), ऑस्ट्रेलिया और चार यूरोपीय देशों आइसलैंड, स्विट्जरलैंड, नॉर्वे और लिकटेंस्टाइन के समूह यूरोपियन फ्री ट्रेड एसोसिएशन (एफ्टा) के साथ सफलतापूर्वक कार्यान्वित हो रहे एफटीए के और अधिक लाभ मिलते हुए दिखाई देंगे। इतना ही नहीं कनाडा, इजरायल, रूस, पेरू, चिली, दक्षिण अफ्रीका और मेक्सिको के साथ जो मुक्त व्यापार समझौते अंतिम चरण में हैं, उन लगभग सभी समझौतों में भारत से सेवा निर्यात बढ़ाने के प्रावधानों को प्राथमिकता दी गई है। इस परिप्रेक्ष्य में उल्लेखनीय है कि हाल ही में अमरीकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने नई दिल्ली में अपनी आधिकारिक यात्रा के दौरान भारत और अमरीका के बीच जिस बहुप्रतीक्षित व्यापार समझौते को कुछ ही सप्ताह में अंतिम रूप दिए जाने की बात कही है, उससे भी अमरीका को भारत से सेवा निर्यात बढ़ेगा। हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के द्वारा ‘अर्थव्यवस्था की स्थिति’ पर जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिम एशिया संकट की चुनौतियों के बीच भी भारत से बढ़ता सेवाओं का निर्यात (सर्विस एक्सपोर्ट) भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहा है। देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में सेवा क्षेत्र का करीब 53.6 प्रतिशत योगदान है।

पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में भारत के कुल 863.11 अरब डॉलर के निर्यात में भारत से सेवा निर्यात की हिस्सेदारी सर्वोच्च स्तर पर पहुंचते हुए 421.32 अरब डॉलर रही है। अब जहां मार्च 2026 में भारत से सेवाओं का निर्यात 35.20 अरब डॉलर का रहा, वहीं यह सेवा निर्यात अप्रैल 2026 में बढक़र 37.24 अरब डॉलर हो गया है। पिछले 11 वर्षों में सेवा निर्यात ढाई गुना से भी अधिक हो गया है। ऐसे में एक ओर भारत मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) और द्विपक्षीय व्यापार समझौतों के माध्यम से सेवा निर्यात बढ़ाने की राह पर आगे बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) भारत से सेवा निर्यात बढ़ाने के मद्देनजर गेम चेंजर की अहम भूमिका निभाते हुए दिखाई दे रहे हैं। इससे जहां भारत का कुल निर्यात बढ़ेगा, वहीं भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में भी वृद्धि होगी। उल्लेखनीय है कि हाल ही में प्रकाशित नैसकॉम और जिनोव रिपोर्ट मई 2026 के मुताबिक भारत 2177 जीसीसी के साथ दुनिया के सबसे बड़े और प्रमुख जीसीसी केंद्र के रूप में उभरकर दिखाई दे रहा है। भारत जीसीसी के डिलीवरी इंजन (बेक ऑफिस) से बदलकर एंटर प्राइज नर्व सेंटर (डिसीजन मेकिंग) हब और वैश्विक नवाचार के पावर हाउस के रूप में स्थापित हो गया है। दुनिया के करीब 55 प्रतिशत से अधिक जीसीसी भारत में हैं। साथ ही भारत की जीडीपी में भारत के जीसीसी का योगदान 1.5 प्रतिशत से अधिक है। गौरतलब है कि भारत में बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा जीसीसी की तेजी से नई स्थापनाओं के कारण सेवा निर्यात तेजी से बढ़ रहा है। जीसीसी प्रमुख रूप से आईटी सपोर्ट, कस्टमर सर्विस, फाइनेंस, एचआर और रिसर्च एंड डेवलपमेंट पर ध्यान केंद्रित करती हैं। भारत में एआई इंटरनेट ऑफ थिंग्स, कृत्रिम बुद्धिमता और डेटा एनालिटिक्स जैसे क्षेत्रों में शोध एवं विकास और जबरदस्त स्टार्टअप माहौल और सरकार के द्वारा दिए जा रहे अभूतपूर्व प्रोत्साहनों के चलते अमरीका, यूरोप और एशियाई देशों की बड़ी-बड़ी कंपनियां अपने ग्लोबल इन हाउस सेंटर तेजी से शुरू करते हुए दिखाई दे रही हैं।

गौरतलब है कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के नवीनतम विश्व आर्थिक परिदृश्य में प्रकाशित सेवा निर्यात से संबंधित रिपोर्ट में कहा गया है भारत से सेवाओं का निर्यात रफ्तार से बढ़ रहा है। वैश्विक सेवाओं के निर्यात में भारत की हिस्सेदारी 2005 में 1.9 फीसदी से बढक़र इस समय करीब 4.3 फीसदी हो गई। वैश्विक सेवा निर्यात में भारत ने सातवां स्थान हासिल कर लिया है। वर्ष 2001 में सेवा निर्यात के मामले में भारत 24वें स्थान पर था। सेवा निर्यात के क्षेत्र की यह उपलब्धि मुख्य रूप से टेलीकॉम, आईटी और बिजनेस सेवाओं की बदौलत संभव हो पाई है। ये क्षेत्र देश के कुल सेवा निर्यात का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा रखते हैं। इनके साथ-साथ भारत सांस्कृतिक और मनोरंजन सेवा निर्यात में भी आगे है। सेवा निर्यात की मौजूदा प्रगति देश में हो रहे सेवा क्षेत्रों में संरचनात्मक सुधारों, तकनीकी विकास और नई पीढ़ी की उच्च कौशल युक्त क्षमताओं के लाभों का परिणाम भी है। खास बात यह भी है कि आर्टिफिशियल इंटेलीजेंसी कौशल के कारण भारत का सेवा निर्यात तेजी से बढ़ रहा है। एआई कौशल की पहुंच में भारत, अमरीका के ठीक पीछे है।

नि:संदेह सेवा निर्यात का वैश्विक केंद्र बनने के लिए भारत को और अधिक एआई क्षमता और क्षमतापूर्ण डिजिटल अर्थव्यवस्था के साथ सेवा निर्यात को तेजी से बढ़ाने की रणनीति के साथ आगे बढऩा होगा। खासतौर से भारत के द्वारा एफटीए के व्यावहारिक कार्यान्वयन और निर्यातकों को इन समझौतों का उपयोग करने में सहायता प्रदान करने पर ध्यान दिया जाना होगा। ज्ञातव्य है कि भारत का एफटीए उपयोग करीब 25 प्रतिशत के आसपास रहा है, जबकि विकसित अर्थव्यवस्थाओं में यह 70-80 प्रतिशत तक है। अब भारत से सेवा निर्यात में तेजी से वृद्धि के लिए सेवाओं की गुणवत्ता, दक्षता, उत्कृष्टता तथा सुरक्षा को लेकर और अधिक प्रयास करने होंगे। भारत को अपने सेवा निर्यात में विविधता लाने और अन्य उभरते क्षेत्रों पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है। हमें सेवा निर्यात बढ़ाने के लिए शोध, नवाचार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के मापदंडों पर भी आगे बढऩा होगा। उम्मीद करें कि भारत के एफटीए, द्विपक्षीय व्यापार समझौते तथा ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर भारत से सेवा निर्यात बढ़ाने के मद्देनजर गेम चेंजर की अहम भूमिका निभाएंगे।-डा. जयंती लाल भंडारी

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