BMC चुनाव में वडाला सीट पर गणित बिगाड़ सकता है बीजेपी-शिवसेना गठबंधन,

मुंबई : BMC चुनाव 2026 का शंखनाद किसी भी समय हो सकता है। ऐसे में वडाला विधान सभा के अंतर्गत चुनावी हलचल बढ़ गई है। सभी पार्टियों ने वडाला में अपना चुनावी गणित भिड़ाना शुरू कर दिया है। हालांकि, मराठी बाहुल्य यह इलाका हमेशा से शिवसेना का गढ़ रहा है। इसलिए राजनैतिक विशेषज्ञ विधानसभा में एकनाथ शिंदे की शिवसेना और उद्धव ठाकरे की शिवसेना में करारी जंग होने के कयास लगा रहे हैं।
वडाला विधानसभा के अंतर्गत कुल 4 प्रभाग आते हैं। इनमें प्रभाग क्रमांक 177, 178, 200 और प्रभाग क्रमांक 201 शामिल है। इन 4 प्रभागों में 2017 के चुनाव में शिवसेना को दो सीट मिली थीं, जबकि BJP और कांग्रेस को एक- एक सीट पर जीत हासिल हुई थी।
क्यों शिवसेना बनाम शिवसेना?
प्रभाग 177 से BJP की नेहल शाह, प्रभाग 178 से शिवसेना अमेय घोले, प्रभाग 200 से शिवसेना की उर्मिला पांचाल और प्रभाग 201 से कांग्रेस की सुप्रिया मोरे को लोगों ने नगरसेवक बनाया था। मौजूदा समय में शिवसेना दो भागों में बंट चुकी है। इसके बाद अमेय घोले और कांग्रेस की सुप्रिया मोरे अब एकनाथ शिंदे की सेना के साथ हैं, जबकि उद्धव की शिवसेना के पास सिर्फ उर्मिला पांचाल के रूप में एक सीट है। ऐसे में 2026 में होने वाले BMC चुनाव में पॉलिटिकल एक्सपर्ट मान रहे है कि वडाला में यह लड़ाई शिवसेना बनाम शिवसेना लड़ी जाएगी। हालांकि, यहां BJP पार्टी की भी एक सीट है।
वोटों का बंटवारा रोक सकता है गठबंधन
BMC चुनाव को लेकर मुंबई की सियासत में नए समीकरण बनते नजर आ रहे है। जहां कांग्रेस ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह यह चुनाव अकेले दम पर लड़ेगी, वही ठाकरे बंधुओं की संभावित एकजुटता ने राजनीतिक हलको में हलचल तेज कर दी है। भले ही अब तक महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) की ओर से गठबंधन या सीट बंटवारे को लेकर कोई औपचारिक ऐलान नहीं हुआ हो, लेकिन बीते कुछ महीनों में राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे के बीच बढ़ी राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियों को अहम संकेत माना जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषको का मानना है कि यदि ठाकरे बंधु BMC चुनाव में साझा रणनीति के तहत मैदान में उतरते है, तो यह मुंबई की राजनीति में बड़ा मोड़ साबित हो सकता है। खासकर मराठी बहुल इलाकों में MNS और शिक्सेना (UBT) का संभावित गठबंधन अन्य सभी दलों के लिए गंभीर चुनौती खड़ी कर सकता है। यह समीकरण न केवल वोटो के बंटवारे को रोक सकता है, बल्कि पारंपरिक मराठी मतदाता आधार को एकजुट करने में भी निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
हो सकता है बड़ा उलटफेर
बीते चुनावों में तीनों प्रभागों में BJP उम्मीदवारों को 18 से 20% तक वोट मिले है। यह वोट शेयर भले ही जीत के लिए पर्याप्त नहीं रहा हो, लेकिन यह संकेत जरूर देता है कि पार्टी की मौजूदगी अब हाशिये पर नही है। खास तौर पर 2017 के चुनाव में प्रभाग क्रमांक 178 से BJP के जेसल कोठारी का उपविजेता रहना इस बात का सबूत है कि मुकाबला कांटे का हो चुका है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि BJP-शिंदे शिवसेना का गठबंधन जमीनी स्तर पर मजबूत तरीके से लागू होता है, तो वडाला के प्रभागों में बड़े उलटफेर देखने को मिल सकते है।
बीजेपी-सेना का गठबंधन पड़ सकता है भारी
वडाला के 4 प्रभागों में से भले ही BJP की सिर्फ एक सीट ही क्यों न हो, लेकिन BJP और एकनाथ शिंदे के बीच हुए गठबंधन से यहां के चुनावी समीकरण बदल चुके हैं। कभी एकतरफा माने जाने वाले इन प्रभागों में अब मुकाबला बहुकोणीय होता जा रहा है और वोट बैंक का बिखराव स्पष्ट दिखने लगा है। हाल ही में BJP और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने BMC चुनाव मिलकर लड़ने की घोषणा कर दी है। इस ऐलान के बाद यह कयास तेज हो गए है कि दोनों दल साझा रणनीति के तहत हर प्रभाग में एक ही संयुक्त उम्मीदवार उतार सकते है। यदि ऐसा होता है, तो इसका सीधा असर वडाला के तीनों प्रभागों के चुनावी गणित पर पड़ेगा।
अब तक अलग-अलग चुनाव लड़ने के कारण जो वोट बंटवारा होता रहा, वह गठबंधन की स्थिति में काफी हद तक रुक सकता है। 2026 के BMC चुनाव में इन प्रभागों से BJP और शिंदे की शिवसेना पार्टी का और बेहतर परफॉर्म करते नजर आ सकती है। आंकड़े भी इस बदले हुए परिदृश्य की पुष्टि करते है।




