लेख
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विकास के आंकड़ों की जांच-परख
अभिषेक आनंद, जोश फेल्मन और अरविंद सुब्रमण्यन ने पूछा है कि जिस तिमाही में ऊर्जा के क्षेत्र में जोरदार झटके…
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सरकारी स्कूलों की संख्या कम हुई, लेकिन घबराने की बात नहीं
जून 2026 में नीति आयोग की एक रिपोर्ट सामने आने के बाद से, सार्वजनिक बहस में एक जाना-पहचाना मुद्दा फिर…
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एन.ई.पी. 2020 और विकसित भारत तक की यात्रा में शिक्षकों की भूमिका
भारतीय परंपरा में, शिक्षा को हमेशा एक ऐसी यात्रा के रूप में देखा गया है, जो एक व्यक्ति को आकार…
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जनसंख्या समस्या का एक नया समाधान ‘एस.आई.आर.’
दशकों तक भारत जनसंख्या विस्फोट को लेकर चिंतित रहा। हर जनगणना खतरनाक सुर्खियां लेकर आती थी। पंचवर्षीय योजनाएं थीं, परिवार-नियोजन…
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धरने-प्रदर्शनों का बदलता स्वरूप: क्या आम जनता को राहत मिलेगी?
पंजाब के इतिहास में पिछले कुछ वर्षों के दौरान किसान संगठनों, बेरोजगार युवाओं, सरकारी कर्मचारियों और धार्मिक संगठनों द्वारा अपनी…
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देश में लोकतांत्रिक संस्थाओं के कामकाज पर सवालिया निशान
भले ही ‘विकसित भारत’ के सपने को हासिल करने का लक्ष्य केवल 2 दशक दूर है लेकिन दुनिया के सबसे…
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सिंधु जल संधि : हेग के फैसले से भारत-पाकिस्तान में नई कानूनी जंग
सिंधु जल संधि पर हेग के फैसले से राजनीतिक और कानूनी लाभ उठाने की पाकिस्तान की उम्मीदों को भारत ने…
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असली देशद्रोही तो मिलावटखोर हैं
रक्षाबंधन अभी गुजरा है। अपने देश की विविधता भी यही है कि यहां लगभग हर रोज कोई न कोई त्यौहार…
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पहाड़ मदद की गुहार नहीं लगा रहे, वे हमारे लिए रो रहे हैं!
पहाड़ों को ढहते हुए देखने में कुछ बहुत ही विचलित करने वाला है। अधिकांश लोगों के लिए पहाड़ एक सुंदर…
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नेपाल में तबाही : मानवीय जिद और प्रकृति का कहर
नेपाल में आई बाढ़ से हुई विध्वंसक तबाही ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। भले ही घटना प्राकृतिक रही…
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