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महंगाई से आम आदमी की जेब ढीली

इस बढ़ती हुई महंगाई से जहां आम आदमी के रोजमर्रा के जीवन में मुश्किलें बढ़ रही हैं, वहीं अर्थव्यवस्था की विकास रफ्तार धीमी हो रही है। इसी परिप्रेक्ष्य में हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक रैली के दौरान वैश्विक ऊर्जा संकट के मद्देनजर देशवासियों से पेट्रोल, डीजल और गैस का संयम से इस्तेमाल करने की अपील की है…

इन दिनों पश्चिम एशिया संकट और वैश्विक भूराजनीतिक चुनौतियों के बीच देश में महंगाई बढऩे की चुनौती उभरकर दिखाई दे रही है। हाल ही में 15 मई को पेट्रोल-डीजल की कीमतों में तीन-तीन रुपए की वृद्धि की गई है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार भारत में अप्रैल 2026 में थोक महंगाई बढक़र 8.3 प्रतिशत और खुदरा महंगाई बढक़र 3.48 प्रतिशत हो गई है। इसी तरह महंगाई से संबंधित विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में भी भारत में महंगाई बढऩे के विश्लेषण प्रस्तुत किए जा रहे हैं। इस बढ़ती हुई महंगाई से जहां आम आदमी के रोजमर्रा के जीवन में मुश्किलें बढ़ रही हैं, वहीं अर्थव्यवस्था की विकास रफ्तार धीमी हो रही है। इसी परिप्रेक्ष्य में हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक रैली के दौरान वैश्विक ऊर्जा संकट के मद्देनजर देशवासियों से पेट्रोल, डीजल और गैस का संयम से इस्तेमाल करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि भारत के पास तेल के बड़े कुएं नहीं हैं। ऐसे में पश्चिम एशियाई संकट के कारण नागरिकों को यह जिम्मेदारी निभानी होगी कि वे जहां तक संभव हो मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें। इलेक्ट्रिक कारों और कार पूलिंग को प्राथमिकता दें। साथ ही कोरोना काल की तरह वर्क फ्रॉम होम और ऑनलाइन मीटिंग्स को बढ़ावा दें।

देश और दुनिया के अर्थ विशेषज्ञ भी भारत को पश्चिम एशिया संकट के झटकों और वैश्विक अनिश्चितता के लिए खुद को तैयार रखने संबंधी टिप्पणियां करते हुए दिखाई दे रहे हैं। 13 मई को रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गर्वनर संजय मल्होत्रा ने कहा कि महंगाई का दबाव बढऩे पर अब नीतिगत रीपो रेट में वृद्धि की कार्रवाई की जानी होगी। गौरतलब है कि इन दिनों पश्चिम एशिया संकट के कारण कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में तेजी और आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं से भारत में महंगाई बढऩे लगी है। उल्लेखनीय है कि 15 मई को पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि के साथ-साथ एक मई से 19 किलोग्राम के वाणिज्यक एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 993 रुपए और 5 किलोग्राम के एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 549 रुपए की बढ़ोतरी का असर रेस्टोरेंट, ढाबों और रोजमर्रा के काम में एलपीजी का इस्तेमाल करने वाले व्यवसायों की लागत बढऩे के रूप में दिखाई देने लगा है। इस बड़ी हुई लागत का बोझ उपभोक्ताओं पर होने से महंगाई बढऩे लगी है। पेट्रोलियम मंत्रालय का आकलन है कि सरकारी क्षेत्र की तीनों तेल कंपनियों इंडियन आयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम, भारत पेट्रोलियम को संयुक्त तौर पर हर माह करीब 30 हजार करोड़ रुपए का घाटा हो रहा है। इसमें कोई दो मत नहीं हैं कि जिस तेजी से दुनिया के विभिन्न देशों में महंगाई बढ़ रही है, उसकी तुलना में भारत में महंगाई बढऩे की दर कम है, लेकिन महंगाई बढऩे की प्रवृत्ति उभरकर दिखाई दे रही है। एशियाई विकास बैंक के द्वारा 10 मई को प्रस्तुत रिपोर्ट के मुताबिक इस वर्ष 2026 में भारत में महंगाई 6.9 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच सकती है। इसी तरह प्रमुख कंसल्टेसी फर्म ईवाई इंडिया की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम एशियाई संकट के कारण भारत में वित्त वर्ष 2026-27 में महंगाई दर 6 प्रतिशत के ऊपरी स्तर को छू सकती है। उल्लेखनीय है कि 8 मई को क्रिसिल के द्वारा प्रकाशित ताजा ‘रोटी चावल दर’ रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल 2026 में घर पर बनी शाकाहारी और मांसाहारी थाली की कीमत बढ़ गई है। देश में आम आदमी के जीवन से जुड़ी वस्तुएं, रसोई से लेकर कपड़े और घरेलू उपकरण आदि महंगे होते हुए दिखाई दे रहे हैं। इस समय देश में दैनिक जरूरतों के समान बनाने वाली कई फास्ट-मूविंग कंज्यूमर गुड्स (एफएमसीजी) कंपनियां अपने उत्पादों कीमत बढ़ाने या पैकेट के वजन घटाने के विकल्पों पर विचार कर रही हैं।

इतना ही नहीं, देश में महंगाई बढऩे की एक नई चिंता यह भी है कि भारतीय मौसम विभाग ने अल नीनो के कारण 2026 में सामान्य से कम मॉनसून का अनुमान लगाया है, जिससे कृषि उत्पादन और खाद्य कीमतों पर असर पड़ सकता है। इसमें कोई दो मत नहीं हैं कि सरकार देश के आम आदमी को पश्चिम एशिया संकट के बीच महंगाई से बचाने के मद्देनजर रणनीतिपूर्वक आगे बढ़ी है। इसके मद्देनजर पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर रखने के लिए उत्पाद कर में 10 रुपए प्रतिलीटर की कटौती की गई ताकि महंगाई को काबू में रखा जा सकेगा। सरकार ने निर्यात किए जाने वाले डीजल और हवाई ईंधन (एटीएफ) पर निर्यात शुल्क 34 रुपए बढ़ा दिया है, ताकि देश में ईंधन की कमी ना हो और कीमतें काबू में रहें। देश में आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 लागू किया गया है। देश की सभी तेल रिफाइनरियां अपनी पूरी क्षमता के साथ काम कर रही हैं। बाजार में पेट्रोल और डीजल की बाजार में किसी भी तरह की कमी नहीं आने दी जा रही है। रोजाना करीब 50 लाख गैस सिलेंडर की डिलीवरी की जा रही है। ऑनलाइन बुकिंग 97 प्रतिशत है। सरकार ने महंगाई को नियंत्रित रखने तथा आम आदमी पर इसके प्रभाव को कम से कम करने के मद्देनजर आवश्यक खाद्य वस्तुओं के लिए बफर स्टॉक बढ़ाने, खुले बाजार में खरीदे गए खाद्यान्न की रणनीतिक बिक्री करने और जरूरी आयात की सुविधा जैसे कई रणनीतिक कदम उठाए हैं। यह बात भी महत्त्वपूर्ण है कि पश्चिम एशिया संकट से निर्मित महंगाई की चुनौती के बीच कुछ अहम बुनियादी बातें भारत के लिए महंगाई नियंत्रण की शक्ति बन गई हैं। सरकार के द्वारा महंगाई नियंत्रण के लिए की गई विभिन्न आर्थिक और कूटनीतिक पहलों के लाभ मिले हैं। इस समय भारत के पास विशाल खाद्यान्न भंडार आर्थिक अनुकूलता के रूप में दिखाई दे रहा हैं। देश में खाद्यान्न का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है। भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के पास केंद्रीय पूल में अप्रैल 2026 के अंत तक लगभग गेहूं और चावल का 6.02 करोड़ टन से अधिक का उपलब्ध स्टॉक खाद्य सुरक्षा के मामले में भारत की मजबूती है। इस समय देश के 80 करोड़ से अधिक कमजोर वर्ग के लोगों को निशुल्क खाद्यान्न वितरित किया जा रहा है।

इतना ही नहीं महंगाई की किसी भी चुनौती से निपटने के लिए भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में करीब 690 अरब डॉलर का संचय है। चूंकि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ रही है, अतएव सरकार के नीतिगत हस्तक्षेप की गुंजाइश सीमित है, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए सरकार को सतर्क रहने की जरूरत है। देश के नागरिकों के द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा की गई उस अपील पर अमल किया जाना होगा जिसमें उन्होंने पेट्रोल-डीजल का किफायत से उपयोग करने की जरूरत बताई है। उम्मीद करें कि सरकार के द्वारा पश्चिम एशिया संकट के बीच महंगाई नियंत्रण के मद्देनजर ब्राजील रूस और वेनेजुएला से लाभप्रद दिखाई दे रहे कच्चे तेल का अधिक आयात किया जाएगा। पेट्रोल में इथेनाल का मिश्रण 30 प्रतिशत किया जाएगा। तेल की मांग में कमी करने इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) के उपयोग में तेजी लाई जाएगी। सरकार के द्वारा गैर विकास कार्यों पर खर्च में कमी के साथ अनावश्यक सब्सिडी में कटौती की जाएगी। सरकार के द्वारा खाद्य तेल के आयात शुल्क में कमी सहित उवर्रकों की उपयुक्त आपूर्ति के लिए आगे बढ़ा जाएगा। रिजर्व बैंक के द्वारा मौद्रिक नीति सख्त करते हुए वर्तमान नीतिगत ब्याज दर (रेपो रेट) को आवश्यकता के अनुरूप बढ़ाया जाएगा। साथ ही सरकार के द्वारा कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 को कड़ाई से लागू किया जाएगा। उम्मीद करें कि ऐसे बहुआयामी रणनीतिक प्रयासों से भारत वैश्विक ऊर्जा संकट का प्रभावी ढंग से सामना कर पाएगा।-डा. जयंती लाल भंडारी

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