भ्रष्टाचार, तानाशाही और महिला मुख्यमंत्री

राजस्थान में वसुंधरा राजे सरकार के कार्यकाल के दौरान ईरानी कालीन चोरी और ललित मोदी की फरारी से जुड़े मामलों में कार्रवाई न होने का मुद्दा उठा था। वर्ष 2009 में दर्ज 100 करोड़ रुपए के कालीन चोरी मामले और 2015 में सामने आए ललित मोदी प्रकरण में जांच की मांग की जाती रही है। महबूबा मुफ्ती का कार्यकाल भी प्रश्नों के घेरे में रहा है…
भारतीय राजनीति में विशेषकर राज्य स्तर पर महिला मुख्यमंत्रियों का कार्यकाल अक्सर पुरुषों के बराबर ही विवादों और भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरा रहा है। यह धारणा कि महिलाएं शासन में अधिक पारदर्शी होंगी, कई मामलों में चुनौतियां पेश करती दिखी हैं, जहां सत्ता में आने के बाद उन्हें भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों या तानाशाही रवैया अपनाने के आरोपों का सामना करना पड़ा है। बड़े बेआबरू होकर तेरे से कूचे से निकले हम, कुछ यही हालत पश्चिम बंगाल में तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तानाशाही की प्रवृत्ति को उजागर करती है। पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में भाजपा के हाथों परास्त होने के बावजूद ममता बनर्जी इस्तीफा नहीं देने पर अड़ी रही और संविधान को ठेंगा दिखाने का प्रयास किया। आखिरकार राज्यपाल आरएन रवि ने विधानसभा भंग कर दी और नई सरकार के गठन के लिए भाजपा को आमंत्रित किया।
ममता बनर्जी के शासनकाल में पश्चिम बंगाल में जितनी राजनीतिक हिंसा की कई घटनाएं हुई, उतनी पूरे देश में भी नहीं हुई। साल 2014 में 7, 2018 में 23, 2019 में 15, 2023 में 45 और 2024 में अब तक 10 मौतें हुई हैं। ममता सरकार भ्रष्टाचार को लेकर भी सुर्खियों में रही। बंगाल में शिक्षक भर्ती घोटाले में पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी को गिरफ्तार किया गया। ईडी ने लगभग 700 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की है। राशन वितरण घोटाले में पूर्व मंत्री ज्योति प्रिय मलिक को गिरफ्तार किया। अनुमान है कि यह घोटाला 9000 करोड़ रुपए से 10000 करोड़ रुपए के बीच का हो सकता है। कोयला तस्करी के 2700 करोड़ रुपए से अधिक के अवैध लेन-देन में ममता के भतीजे अभिषेक बनर्जी और उनकी पत्नी से भी पूछताछ हो चुकी है।
उत्तर प्रदेश की चार बार मुख्यमंत्री रही और बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती खुद को दलित, शोषित और पीडि़त बताती हैं, लेकिन उन्होंने दलितों के साथ वही व्यवहार किया जो राजाओं के जमाने में दलितों के साथ होता था। उनके सामने उनके मंत्री तक न सिर्फ जमीन पर बैठते थे, बल्कि विधायक, मंत्री और बसपा नेता उनके पैर छूते थे। ऐसा करना कहीं न कहीं मायावती के महारानी होने के दंभी अहंकार को संतुष्ट करता था। मायावती के कार्यकाल में लखनऊ में 2007 से 2011 के बीच लगभग 1400 करोड़ रुपए का बहुचर्चित स्मारक घोटाला हुआ। आयकर विभाग ने जुलाई 2019 में मायावती के भाई आनंद कुमार और उनकी पत्नी की लगभग 400 करोड़ रुपए की बेनामी संपत्ति जब्त की थी। यह संपत्ति नोएडा में स्थित लगभग 7 एकड़ का एक प्लॉट थी। सितंबर 2019 में आयकर विभाग ने मायावती के मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान उनके सचिव रहे सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी नेतराम के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 230 करोड़ रुपए से अधिक की बेनामी संपत्ति जब्त की थी। बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी (1997-2005) का शासनकाल बिहार के इतिहास में भ्रष्टाचार, राजनीतिक विवादों और कानून-व्यवस्था की चुनौतियों से जूझता रहा। चारा घोटाले से जुड़े मामलों में राबड़ी देवी और उनके परिवार के खिलाफ सीबीआई द्वारा जांच की गई। साल 1998 में लालू और राबड़ी देवी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया गया था। आईआरसीटीसी घोटाले में आरोप है कि होटल का ठेका देने के बदले पटना की कीमती जमीनें राबड़ी देवी और उनके बेटे तेजस्वी यादव को ट्रांसफर की गईं। चारा घोटाले में लालू यादव के जेल जाने के बाद उनकी पत्नी राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री बनाया गया था। राबड़ी देवी केवल फाइलों पर हस्ताक्षर करती थीं और असली शासन लालू यादव ही जेल से या घर से चलाते थे। उन पर विधानसभा में सवालों का जवाब न देने और मुख्यमंत्री कार्यालय में नियमित रूप से न जाने के आरोप लगे। साधु यादव और सुभाष यादव (राबड़ी देवी के भाई) द्वारा शासन-प्रशासन में अनुचित हस्तक्षेप और आतंक मचाने के आरोप लगे, जिसे लेकर उनकी सरकार को काफी आलोचना झेलनी पड़ी।
आजादी के बाद ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुन्नेत्र कडग़म पार्टी की जयललिता देश की पहली ऐसी मुख्यमंत्री रही, जिन्हें भ्रष्टाचार के अपराध में जेल की सजा हुई। इन पर भारी जुर्माना भी लगाया गया। जयललिता की शान-शौकत के सामने राजा-महाराजाओं के किस्से कहानी भी पीछे रह जाते हैं। जयललिता पर आय से अधिक संपत्ति मामले में 48 केस दर्ज हुए और उन्हें जेल जाना पड़ा। उनके ठिकानों पर सीबीआई छापे के दौरान 800 किलो चांदी, 28 किलो सोना, 11344 साडिय़ां, 250 सॉल, 750 जोड़ी चप्पलें, 91 घडिय़ां और 41 एयरकंडिशनर मिले थे। 250 शॉल, 12 रेफ्रिजरेटर, 10 टेलीविजन सेट, 8 वीसीआर, 4 सीडी प्लेयर, 24 टेप रिकॉर्डर, 1040 वीडियो कैसेट, और 5 लोहे के लॉकर शामिल हैं। 27 सितंबर 2014 को बेंगलुरु की एक अदालत ने जयलिलता को आय से अधिक संपत्ति के मामले में चार साल कैद की सजा सुनाई। मध्यप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती के विवादों की श्रृंखला पर पूरी एक किताब लिखी जा सकती है। तुनकमिजाज और बिगड़े बोलों ने उमा भारती की छवि ऐसी बना दी कि कब किसके लिए क्या बोल जाएं पता नहीं। उमा भाजपा के लिए गले की फांस बनी रही हैं। देश में उमा भारती ही अकेली ऐसी नेता रही, जिसे कभी बाहर करना तो कभी फिर पार्टी में लेना भाजपा की मजबूरी रही। बिगड़े बोलों के लिए चर्चित उमा भारती ने नौकरशाही पर कहा था कि आपको गलतफहमी है, ब्यूरोक्रेसी कुछ नहीं होती है, चप्पल उठाने वाली होती है। 1994 में कर्नाटक के हुबली में एक विवादित ईदगाह में उमा भारती ने तिरंगा लहराया था। कोर्ट ने उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर दिया।
इसके बाद भाजपा केंद्रीय नेतृत्व ने उमा पर दबाव बनाकर 23 अगस्त 2004 को इस्तीफा ले लिया। जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती बयानों, राजनीतिक रुख और भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण विवादों में रही हैं। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने मुख्यमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान जम्मू-कश्मीर बैंक में की गई कथित अवैध नियुक्तियों की जांच के लिए उन्हें नोटिस जारी किया था। प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े एक मामले में भी महबूबा मुफ्ती से पूछताछ की। मुफ्ती के विवादित बयानों में अक्सर सुरक्षा बलों को निशाना बनाया गया, किन्तु आतंकियों के खिलाफ उन पर नरम रुख अख्तियार करने के आरोप लगते रहे हैं। दिसंबर 2025 में अनंतनाग में उन्होंने भारत को ‘लिंचिस्तान’ कहा था। नवंबर 2025 में दिल्ली ब्लास्ट के बाद उन्होंने विवादास्पद बयान दिया कि सरकार की नीतियां देश को असुरक्षित बना रही हैं और कश्मीर की परेशानियां अब लाल किले तक पहुंच गई हैं। राजस्थान में वसुंधरा राजे सरकार के कार्यकाल के दौरान ईरानी कालीन चोरी और ललित मोदी की फरारी से जुड़े मामलों में कार्रवाई न होने का मुद्दा उठा था। वर्ष 2009 में दर्ज 100 करोड़ रुपए के कालीन चोरी मामले और 2015 में सामने आए ललित मोदी प्रकरण में जांच की मांग की जाती रही है। साल 2011 में राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे पर इंडियन प्रीमियर लीग अर्थात आईपीएल की शुरुआत करने वाले बिजनेसमैन ललित मोदी के ब्रिटेन आव्रजन आवेदन का समर्थन करने का आरोप लगा। ललित मोदी की कंपनी द्वारा वसुंधरा राजे के बेटे दुष्यंत सिंह की कंपनी में कथित तौर पर 11.6 करोड़ रुपए का निवेश (लोन) भी विवाद का विषय बना।-योगेंद्र योगी




