CSPOC में बोले पीएम मोदी-भारतीय लोकतंत्र की ताकत ‘लास्ट माइल कनेक्टिविटी’, 98 करोड़ मतदाताओं की भागीदारी विश्व में मिसाल

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि भारत की लोकतांत्रिक प्रणाली केवल संस्थागत ढांचे तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सुनिश्चित करती है. इसे उन्होंने “लास्ट माइल कनेक्टिविटी” की संज्ञा दी. पीएम मोदी ने यह बात 15 जनवरी 2026 को संविधान सदन के ऐतिहासिक परिसर में आयोजित राष्ट्रमंडल देशों के 28वें कॉमनवेल्थ स्पीकर्स एंड प्रीसाइडिंग ऑफिसर्स कॉन्फ्रेंस (CSPOC) के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कही.
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का लोकतंत्र समावेशी, सहभागितापूर्ण और मजबूत है. उन्होंने 2024 के आम चुनावों का उल्लेख करते हुए कहा कि करीब 98 करोड़ मतदाताओं की भागीदारी अपने आप में दुनिया के लिए एक अनूठी मिसाल है. यह दिखाता है कि भारतीय लोकतंत्र कितनी गहराई तक समाज में रचा-बसा है.
पीएम मोदी ने राष्ट्रमंडल देशों से भारत के सफल मॉडलों को अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि यूपीआई डिजिटल भुगतान प्रणाली और वैक्सीन कार्यक्रम जैसे नवाचारों को अन्य देश भी अपने यहां लागू कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि भारत में इन पहलों ने पारदर्शिता, समावेशन और जनसुविधा को नई दिशा दी है.
‘मदर ऑफ डेमोक्रेसी’ के रूप में भारत का वैश्विक नेतृत्व: ओम बिरला
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि भारत, जिसे ‘मदर ऑफ डेमोक्रेसी’ कहा जाता है, लोकतांत्रिक मूल्यों और संसदीय परंपराओं को सशक्त बनाने में वैश्विक नेतृत्व कर रहा है. उन्होंने कहा कि CSPOC सम्मेलन संसदीय सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान का एक प्रभावी मंच है.
ओम बिरला ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और व्यापक सुधारों के कारण भारत आज विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है. उन्होंने बताया कि संसद ने सात दशकों से अधिक की यात्रा में जन-केंद्रित नीतियों, कल्याणकारी कानूनों और निष्पक्ष चुनाव प्रणाली के माध्यम से लोकतंत्र को मजबूत किया है, जिससे नागरिकों का लोकतंत्र पर विश्वास और गहरा हुआ है. उन्होंने यह भी कहा कि संसद और सरकार के संयुक्त प्रयासों से कई अनावश्यक कानूनों को समाप्त किया गया और जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप नीतियाँ बनाई गईं, जिससे भारत आत्मनिर्भर और विकसित भारत के लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रहा है.
AI और सोशल मीडिया: अवसर भी, चुनौती भी
लोकसभा अध्यक्ष ने अपने संबोधन में कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सोशल मीडिया ने लोकतांत्रिक संस्थाओं की कार्यकुशलता बढ़ाई है, लेकिन इनके दुरुपयोग से गलत सूचना, भ्रम और सामाजिक विभाजन जैसी चुनौतियाँ भी सामने आई हैं. उन्होंने नैतिक AI और जिम्मेदार सोशल मीडिया उपयोग को समय की आवश्यकता बताया.
तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन
राष्ट्रमंडल देशों का यह 28वां CSPOC सम्मेलन 14 से 16 जनवरी 2026 तक आयोजित किया जा रहा है, जिसकी अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला कर रहे हैं. संविधान सदन में आयोजित इस सम्मेलन में राष्ट्रमंडल देशों के संसदाध्यक्ष और पीठासीन अधिकारी लोकतांत्रिक संवाद और सहयोग को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से एकत्र हुए हैं. इस बार CSPOC के इतिहास में सबसे अधिक देशों और प्रतिनिधियों की भागीदारी दर्ज की गई है, जिससे यह अब तक का सबसे बड़ा सम्मेलन बन गया है.




