यूरोप और भारत के गृहप्रवेश में कितना होता है फर्क? यूक्रेन की महिला ने बताई सच्चाई, 2 लाख लोगों ने देखा वीडियो

भारत की संस्कृति और परंपराएं सिर्फ भारतीयों को ही नहीं, बल्कि विदेशियों को भी अपनी ओर आकर्षित करती हैं. यही वजह है कि जब भी कोई विदेशी भारतीय रीति-रिवाजों को करीब से देखता है, तो हमेशा ही उसकी सोच बदल जाती है. शादी, त्योहार, पूजा-पाठ और पारिवारिक परंपराओं की तरह भारतीय गृहप्रवेश की रस्में भी दुनिया के कई देशों से बिल्कुल अलग मानी जाती हैं. इन दिनों सोशल मीडिया पर यूक्रेन की एक महिला कंटेंट क्रिएटर का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने भारत और यूरोप के गृहप्रवेश समारोहों का ऐसा अंतर बताया कि 2 लाख से ज्यादा लोग उनकी बातों से सहमत नजर आए.
दरअसल, यूक्रेन की कंटेंट क्रिएटर सैंड्रा ऑन (Sandra On) ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट @dra.sandraa पर एक वीडियो शेयर किया है. वीडियो में उन्होंने बताया कि भारत आने से पहले उन्हें लगता था कि दुनिया के हर देश में गृहप्रवेश का तरीका लगभग एक जैसा होता होगा. लेकिन जब उन्हें भारत में एक गृहप्रवेश समारोह में शामिल होने का मौका मिला, तो उनकी यह धारणा पूरी तरह बदल गई. सैंड्रा ने कहा कि उन्हें सबसे ज्यादा हैरानी इस बात की हुई कि भारत में नए घर में प्रवेश केवल एक पार्टी नहीं, बल्कि एक धार्मिक और आध्यात्मिक शुरुआत माना जाता है. यहां हर रस्म के पीछे कोई न कोई मान्यता और भावना जुड़ी होती है.
सुबह 6 बजे से शुरू हो जाता है समारोह
वीडियो में सैंड्रा बताती हैं कि यूरोप में गृहप्रवेश आमतौर पर शाम के समय होता है, लेकिन भारत में उन्हें सुबह-सुबह समारोह में शामिल होना पड़ा. उन्होंने कहा- “मुझे लगा था कि यहां भी लोग नया घर खरीदने के बाद दोस्तों और रिश्तेदारों को बुलाते होंगे, खाना खाते होंगे और जश्न मनाते होंगे. लेकिन भारत में सब कुछ बिल्कुल अलग था. सुबह 6 बजे ही सभी लोग पूजा के लिए इकट्ठा हो गए. नाश्ता करने से पहले भगवान की पूजा की गई और नए घर की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना हुई.” सैंड्रा के मुताबिक परिवार ने हिंदू पुजारियों को बुलाकर पूरे विधि-विधान से पूजा करवाई. पूजा पूरी होने के बाद ही सभी लोगों ने नाश्ता किया.
पूजा के बाद शुरू होता है असली जश्न
सैंड्रा ने बताया कि भारतीय गृहप्रवेश में धार्मिक काम सबसे पहले होते हैं. इसके बाद दोपहर का भोजन कराया जाता है और फिर धीरे-धीरे माहौल एक पारिवारिक उत्सव में बदल जाता है. उन्होंने कहा कि पूजा, भक्ति संगीत, मंत्रों का जाप और परिवार के साथ बिताया गया समय इस समारोह को बेहद खास बना देता है. लोगों के बीच बातचीत, हंसी-मजाक और नए घर की खुशियां बाद में मनाई जाती हैं.




