स्वास्थ्य

क्या Millennials से ज्यादा फिट और हेल्दी है Gen Z? नई रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा

Gen Z vs Millennials : आज की नई जनरेशन पहले से कहीं ज्यादा हेल्थ कॉन्शियस नजर आती है. सोशल मीडिया पर फिटनेस, हेल्दी डाइट, अच्छी नींद, मानसिक स्वास्थ्य और योग जैसी चीजों पर लगातार बात होती रहती है. खासकर Gen Z अपनी फिटनेस और वेलनेस को लेकर काफी जागरूक दिखाई देती है. वहीं Millennials को अक्सर लंबे समय तक काम करने, तनाव और थकान से जूझने वाली पीढ़ी के रूप में देखा जाता है. लेकिन क्या सिर्फ हेल्थ की जानकारी होना ही अच्छी सेहत की निशानी है. विशेषज्ञों और नई रिपोर्ट के अनुसार, Gen Z केबीच फिटनेस और वेलनेस को लेकर जागरूकता बढ़ी है, लेकिन इसका नहीं कहा जा सकता है कि Gen Z पूरी तरह Millennials से ज्यादा हेल्दी है. 

क्या Millennials से ज्यादा फिट और हेल्दी है Gen Z? 

विशेषज्ञों के मुताबिक Gen Z मानसिक स्वास्थ्य, फिटनेस, अच्छी नींद और बीमारी से बचाव को लेकर पहले की पीढ़ी के मुकाबले ज्यादा खुलकर बात करती है. वहीं Millennials ने योग, हेल्दी खाना, जिम, मेडिटेशन और वर्क-लाइफ बैलेंस जैसी चीजों को फेमस बनाने में बड़ी भूमिका निभाई थी. इसके बाद Gen Z ने इन्हीं आदतों को आगे बढ़ाया और थेरेपी, बर्नआउट, भावनात्मक स्वास्थ्य और प्रिवेंटिव हेल्थ जैसे विषयों पर खुलकर चर्चा शुरू की. हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि जागरूक होना और सच में स्वस्थ होना, दोनों अलग-अलग बातें हैं.

हेल्थ को लेकर Gen Z और Millennials क्या देखते हैं? 

Millennials की फिटनेस का मेन गोल अक्सर वजन कम करना और दिखने में फिट लगना होता था. वहीं Gen Z अब सिर्फ वजन पर नहीं, बल्कि मसल्स, बॉडी कंपोजिशन और शरीर की फ्लेक्सिबिलिटी पर ज्यादा ध्यान देती है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव पॉजिटिव है. हालांकि उनका कहना है कि हेल्थ को लेकर जरूरत से ज्यादा जागरूकता भी कई बार तनाव की वजह बन जाती है. आज कई युवा इस बात को लेकर भी तनाव में रहते हैं कि उन्हें हर समय सही खानपान और अच्छी लाइफस्टाइल अपनानी चाहिए. 

नई रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा

विशेषज्ञों के अनुसार आज की युवा पीढ़ी में कई ऐसी बीमारियां पहले की तुलना में कम उम्र में देखने को मिल रही हैं, जो पहले आमतौर पर ज्यादा उम्र में होती थीं. डॉक्टरों का कहना है कि अब 30 से 40 साल की उम्र में हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और यहां तक कि हार्ट अटैक के मामले भी सामने आ रहे हैं. इसके पीछे लगातार तनाव, नींद की कमी, लंबे समय तक बैठकर काम करना, गलत खानपान और फिजिकल एक्टिविटी की कमी जैसी वजहें बताई गई हैं. इसके अलावा चिंता, डिप्रेशन, अनिद्रा, मोटापा, पीसीओएस और शुरुआती डायबिटीज जैसी समस्याएं भी युवाओं में ज्यादा देखने को मिल रही हैं.

मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर बात करती है Gen Z

विशेषज्ञों का कहना है कि Gen Z मानसिक स्वास्थ्य को लेकर पहले की पीढ़ियों की तुलना में कहीं ज्यादा खुली सोच रखती है. यह पीढ़ी जरूरत पड़ने पर थेरेपी लेने और मदद मांगने में झिझक महसूस नहीं करती है. डॉक्टरों के अनुसार आज मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं पहले से ज्यादा सामने इसलिए भी आ रही हैं. अब लोग इन्हें छिपाने की जगह एक्सेप्ट कर रहे हैं. साथ ही जागरूकता बढ़ी है, इलाज लेने की इच्छा बढ़ी है और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर समाज में एक्सेप्ट भी पहले से बेहतर हुई है. हालांकि मॉर्डन लाइफस्टाइल, लगातार तनाव, कम नींद, फिजिकल एक्टिविटी की कमी, लगातार स्क्रीन पर समय बिताना और सामाजिक परेशानी जैसी वजहों से मानसिक दबाव भी बढ़ा है.

डिजिटल लाइफस्टाइल भी बन रही है चुनौती

विशेषज्ञों के मुताबिक Millennials और Gen Z के तनाव से निपटने के तरीके भी अलग है. Millennials पुराने गाने सुनकर या पुरानी यादों को याद करके खुद को बेहतर महसूस करने की कोशिश करते हैं. वहीं Gen Z अक्सर लगातार मोबाइल स्क्रॉल करने यानी डूम स्क्रॉलिंग को अपना सहारा बना लेती है. डॉक्टरों का कहना है कि लगातार ऑनलाइन रहना, सोशल मीडिया पर दूसरों से तुलना करना, हर समय अपडेट रहने का दबाव और कुछ छूट जाने का डर भी मानसिक थकान और बर्नआउट की बड़ी वजह बन रहा है. पहले ऑनलाइन और ऑफलाइन जीवन के बीच कुछ दूरी रहती थी, लेकिन अब यह अंतर काफी कम हो गया है.

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