तकनीकी

न गैस, न कंप्रेसर! चुंबक से चलेंगे AC-फ्रिज, समझें मैग्नेटिक कूलिंग और फायदे

How Magnetic Cooling Works: मैग्नेटिक कूलिंग टेक्नोलॉजी आने वाले समय में हमारे AC-फ्रिज की सूरत बदल सकती है। इसमें ठंडक के लिए कंप्रेसर या गैस की जगह चुंबक की ताकत का इस्तेमाल होता है। यह तकनीक 20-40% तक बिजली बनाती है और इंडस्ट्री में इसका इस्तेमाल होने भी लगा है।

Cooling Without Gas & Compressor: कैसा हो कि आपके AC या फ्रिज में कभी कंप्रेसर खराब होने या गैस लीक जैसी को परेशानी ना आए? ऐसा सिर्फ तभी हो सकता है जब आप मैग्नेटिक कूलिंग टेक्नोलॉजी पर काम करने वाले AC या फ्रिज का इस्तेमाल करते हों। दरअसल यह एक ऐसी कूलिंग टेक्नोलॉजी है जिसमें किसी कंप्रेसर या रेफ्रिजरेंट यानी कि गैस की जरूरत नहीं पड़ती। यह टेक्नोलॉजी मैग्नेटोकैलोरिक इफेक्ट सिद्धांत पर काम करती है।

इस टेक्नोलॉजी की मदद से AC और फ्रिज जैसे कूलिंग देने वाले डिवाइस चुंबक की ताकत से काम कर पाते हैं, जिसके चलते कंप्रेसर या हानिकारक गैसों के इस्तेमाल करने की जरूरत नहीं रहती। रिपोर्ट्स के अनुसार कई कंपनियां इस टेक्नोलॉजी के वर्किंग मॉडल भी तैयार कर चुकी है और इसे आम यूजर्स के लिए किफायती बनाने को लेकर काम चल रहा है। इतना ही नहीं इंडस्ट्रियल लेवल पर कुछ चुनिंदा कमर्शियल रेफ्रिजरेटर्स में इसका इस्तेमाल शुरू हो चुका है।

क्या है मैग्नेटिक कूलिंग टेक्नोलॉजी?

इस तकनीक के तहत बनने वाले AC-फ्रिज में कोई कंप्रेसर नहीं होता इस वजह से यह शोर भी बिलकुल नहीं करते।

किसी भी आम एसी-फ्रिज में ठंडक पैदा करने के लिए कंप्रेसर और गैस की जरूरत पड़ती है लेकिन मैग्नेटिक कूलिंग टेक्नोलॉजी में ठंडक चुंबक की ताकत से पैदा की जाती है।

इस तकनीक के तहत ठंडक के लिए किसी मशीन की जगह चुंबक की ताकत का इस्तेमाल होता है।

किसी भी AC में सबसे ज्यादा बिजली कंप्रेसर खाता है लेकिन मैग्नेटिक कूलिंग टेक्नोलॉजी में कंप्रेसर के ना होने की वजह से बिजली की बहुत बचत होती है।

इसमें हानिकारक AC गैस का इस्तेमाल भी नहीं होता इसलिए यह तकनीक पर्यावरण के लिए भी किसी वरदान से कम नहीं है।

Related Articles

Back to top button