न टाटा, न अंबानी-अदाणी, आदित्य बिड़ला ग्रुप की कंपनी ने मारी बाजी; बनी न्यूक्लियर प्लांट रेस की इकलौती सिकंदर!

नई दिल्ली। एल्युमीनियम और कॉपर बनाने वाली कंपनी हिंडाल्को इंडस्ट्रीज लिमिटेड अकेली ऐसी कंपनी बनी है जिसने सरकारी बिजली कंपनी न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) के 220 MW वाले भारत स्मॉल रिएक्टर्स (BSRs) के लिए प्रस्ताव जमा किया है।
आदित्य बिड़ला ग्रुप की इस कंपनी के अलावा, जिंदल स्टील, टाटा पावर और रिलायंस इंडस्ट्रीज ने भी शुरुआत में इस प्रोजेक्ट में रुचि दिखाई थी। पिछले साल सितंबर में NPCIL ने एक बयान जारी किया था, जिसके अनुसार JSW एनर्जी और अदाणी पावर ने डेटा के लिए नॉन-डिस्क्लोजर एग्रीमेंट के दस्तावेज जमा किए थे। फरवरी 2025 में हुई प्री-प्रपोजल मीटिंग में 27 इंडस्ट्रीज के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया था।
कितने रिएक्टर लगाए जाएंगे?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार हिंडाल्को के साथ एग्रीमेंट के तहत कितने रिएक्टर लगाए जाएंगे, यह उसके द्वारा चुनी और उपलब्ध कराई गई साइट्स पर निर्भर करेगा, जिसके बाद एक समझौता होगा। इस ‘रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल’ का मकसद उन इंडस्ट्रीज के लिए न्यूक्लियर रिएक्टर लगाना और चलाना है जिन्हें अपनी जरूरतों (कैप्टिव खपत) के लिए बड़ी मात्रा में साफ-सुथरी बिजली की जरूरत होती है।
कौन उठाएगा खर्च?
NPCIL ने दिसंबर 2024 के आखिर में ‘सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया एक्ट’ (दिसंबर 2025 में लागू होने से पहले) के लिए प्रस्ताव का अनुरोध जारी किया था। इस सेक्टर में पॉलिसी से जुड़े बदलावों और कंपनियों के अनुरोधों के कारण प्रस्ताव जमा करने की समय-सीमा 31 मार्च 2026 तक बढ़ा दी गई थी।
प्रस्ताव के अनुरोध के अनुसार, NPCIL कंपनियों के लिए फीस लेकर रिएक्टर बनाएगी और चलाएगी। प्रस्तावित बिजनेस मॉडल के तहत, कैपिटल एक्सपेंडिचर और ऑपरेटिंग एक्सपेंडिचर के लिए जरूरी पूरी फंडिंग बिजली इस्तेमाल करने वाली कंपनी उठाएगी।




