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NSE IPO Date: एनएसई आईपीओ को मिल सकती है बड़ी मंजूरी, सेबी इसी महीने जारी करेगा NOC

नई दिल्ली। भारत के सबसे बड़े शेयर बाज़ार नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के बहुप्रतीक्षित प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) जल्द ही NSE को अहम नियामकीय मंजूरी दे सकता है। सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने संकेत दिया है कि NSE के IPO के लिए नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) इसी महीने के अंत तक जारी किया जा सकता है।

समाचार एजेंसी ANI से बातचीत में पांडे ने कहा, ”मुझे लगता है कि हम NSE आईपीओ के लिए एनओसी जारी करने के काफी बढ़त वाले चरण में हैं। संभव है कि यह इस महीने के भीतर हो जाए।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अंतिम प्रक्रिया पूरी होने के बाद समय-सीमा तय होगी, लेकिन प्रगति को लेकर वे आशावादी हैं।

कब से अटका है NSE IPO?

NSE ने पहली बार दिसंबर 2016 में अपना ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) दाखिल किया था, लेकिन कई नियामकीय अड़चनों के चलते लिस्टिंग टलती चली गई। इसकी सबसे बड़ी वजह ‘को-लोकेशन’ या ‘डार्क फाइबर’ मामला रहा, जिसमें आरोप था कि 2010 से 2014 के बीच कुछ हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडर्स को NSE के सर्वर तक तरजीही और तेज़ पहुंच मिली थी। इससे बाजार में निष्पक्षता पर सवाल उठे।

सेबी की सख्त कार्रवाई और सुधार

  • अप्रैल 2019 में सेबी ने NSE को 62.58 करोड़ रुपये की कथित अवैध कमाई लौटाने का आदेश दिया और कुछ वरिष्ठ अधिकारियों को बाजार से जुड़े पदों से प्रतिबंधित किया।
  • इसके बाद 2022 में 7 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया गया, जिसे बाद में सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल ने रद्द कर दिया। 
  • अक्टूबर 2024 में NSE ने ट्रेडिंग एक्सेस पॉइंट (TAP) आर्किटेक्चर और नेटवर्क कनेक्टिविटी मामले में 643 करोड़ रुपये का जुर्माना अदा कर लंबित विवादों को सुलझाया।
  • इसके साथ ही एक्सचेंज ने बोर्ड का पुनर्गठन, प्रबंधन में बदलाव और मजबूत अनुपालन ढांचा तैयार करने जैसे सुधारात्मक कदम उठाए।

निवेशकों में अब भी जबरदस्त दिलचस्पी

लंबे इंतज़ार के बावजूद NSE के अनलिस्टेड शेयरों में निवेशकों की रुचि बनी हुई है। एक्सचेंज के मुताबिक, करीब 1.46 लाख रिटेल निवेशक NSE के शेयर होल्ड कर रहे हैं। इनमें से अधिकतर निवेश 2 लाख रुपये से कम के हैं, जबकि केवल 343 निवेशकों के पास 2 लाख रुपये से अधिक मूल्य के शेयर हैं। पिछले तिमाही के मुकाबले छोटे निवेशकों की संख्या चार गुना बढ़ी है।

पांडे ने कहा, “एनओसी जारी होने के बाद लिस्टिंग प्रक्रिया को आगे बढ़ाना NSE पर निर्भर करेगा और हमें उम्मीद है कि एक्सचेंज तेजी से कदम उठाएगा।”

बाजार की पारदर्शिता पर सेबी का फोकस

NSE आईपीओ के अलावा सेबी डिजिटल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी सख्ती बढ़ा रहा है। पांडे के अनुसार, सेबी के एआई आधारित टूल ‘एआई सुदर्शन’ की मदद से अब तक 1 लाख से अधिक भ्रामक या अवैध पोस्ट हटाई जा चुकी हैं।
निवेशकों को धोखाधड़ी से बचाने के लिए सेबी ने कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ समन्वय मजबूत किया है और राज्यों में नोडल अधिकारियों की नियुक्ति को बढ़ावा दिया है। साथ ही ‘SebiCheck’ टूल लॉन्च किया गया है, जिससे निवेशक पैसे भेजने से पहले बैंक अकाउंट, यूपीआई या क्यूआर कोड की जांच कर सकते हैं।
पांडे ने चेतावनी देते हुए कहा, “अगर पैसा किसी फर्जी खाते में चला गया तो निवेशकों को कोई सुरक्षा नहीं मिलती। जागरूकता बेहद ज़रूरी है।” सेबी अब युवा निवेशकों तक पहुंचने के लिए बहुभाषी और मल्टीमीडिया निवेशक जागरूकता अभियानों पर भी काम कर रहा है।

अगर सब कुछ योजना के मुताबिक रहा, तो NSE का आईपीओ भारतीय पूंजी बाजार के इतिहास की सबसे बड़ी लिस्टिंग में से एक बन सकता है।

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