ग्रामीण इलाकों का दर्दनाक सच: समय पर अस्पताल न पहुंच पाने से महिला की मौत

विदिशा: आज के दौर में जब देश और प्रदेश के विकास के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, तब ग्रामीण इलाकों से सामने आने वाली कुछ तस्वीरें इन दावों की पोल खोलकर रख देती हैं। मध्य प्रदेश के विदिशा जिले के रुसली खामखेड़ा क्षेत्र से एक ऐसा ही दिल को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है, जो प्रशासनिक व्यवस्था और जमीनी हकीकत के बीच की गहरी खाई को उजागर करता है। यहां समय पर इलाज और एम्बुलेंस न मिलने के कारण धनिया बाई नामक एक आदिवासी महिला की तड़प-तड़प कर मौत हो गई। लेकिन सिस्टम की लाचारी का यह अंत नहीं था, इसके बाद अंतिम संस्कार के समय ग्रामीणों को जो दर्द झेलना पड़ा, वह इंसानियत को झकझोर देने वाला है।
सड़क न होने से समय पर नहीं पहुंच पाई एम्बुलेंस
ग्रामीणों का साफ तौर पर कहना है कि गांव तक पहुंचने के लिए कोई पक्की सड़क या रास्ता नहीं है। जब धनिया बाई की तबीयत अचानक बिगड़ी और उन्हें अस्पताल ले जाने की जरूरत पड़ी, तो गांव में सड़क न होने के कारण समय पर एम्बुलेंस वहां नहीं पहुंच सकी। परिवहन का कोई साधन न होने और समय पर चिकित्सीय सहायता न मिलने की वजह से धनिया बाई ने दम तोड़ दिया। एक तरफ सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को दुरुस्त करने के दावे करती है, वहीं दूसरी तरफ आज भी कई ऐसे गांव हैं जहां डॉक्टर या गाड़ी तो दूर, चलने के लिए ढंग का रास्ता तक नसीब नहीं है।
महिला की मौत के बाद जब परिवार और गांव के लोगों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा, तो अंतिम विदाई का वक्त और भी ज्यादा दर्दनाक साबित हुआ। बरसात के इस मौसम में नदी-नालों का जलस्तर बढ़ा हुआ था और गांव तक जाने या बाहर आने का रास्ता पूरी तरह जलमग्न था।
कमर-कमर पानी से गुजरकर निकाली गई शव यात्रा
वायरल वीडियो और जमीनी हकीकत बयां करती है कि किस तरह ग्रामीणों को कमर-कमर पानी के बीच से अपनी जान जोखिम में डालकर शव यात्रा निकालनी पड़ी। वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि लोग पानी के तेज बहाव और कठिनाइयों के बीच अर्थी को कंधे पर लेकर आगे बढ़ रहे हैं। बरसात के मौसम में नदी-नालों में सांप और अन्य जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा बहुत अधिक बढ़ जाता है, ऐसे में इस तरह पानी के बीच से गुजरना किसी बड़े खतरे को खुला बुलावा देने जैसा था।
ग्रामीणों का कहना है कि जब कोई बीमार पड़ता है या किसी की मौत हो जाती है, तो उन्हें हर बार इसी तरह की जद्दोजहद से गुजरना पड़ता है। नेताओं और अधिकारियों के पास जाने के बावजूद उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होता।
अगर समय पर गांव में सड़क होती, तो एम्बुलेंस हमारे घर तक पहुंचती और धनिया बाई की जान बच सकती थी। सरकार विकास के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन हकीकत में हम आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं।
स्थानीय ग्रामीण
कौन है इस व्यवस्था की नाकामी का जिम्मेदार?
यह घटना कई गंभीर सवाल खड़े करती है। आखिर कब तक ग्रामीण इलाकों के लोग सड़क और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी जरूरतों के अभाव में अपनी जान गंवाते रहेंगे? क्या विकास के कागजी आंकड़े आम आदमी की जिंदगी से ज्यादा अहम हैं? प्रशासन और शासन को यह आत्ममंथन करने की जरूरत है कि क्यों आज भी गांवों के लोग अंतिम समय में भी बुनियादी सुविधाओं के लिए मोहताज हैं।
मुख्य बिंदु जो आपको जानने चाहिए
राजगढ़ जिले के रुसली खामखेड़ा में पक्की सड़क न होने के कारण एम्बुलेंस समय पर नहीं पहुंच पाई।- समय पर इलाज न मिलने से धनिया बाई नामक आदिवासी महिला की तड़पकर मौत हो गई।
- महिला के अंतिम संस्कार के लिए ग्रामीणों को कमर-कमर पानी और उफनते नाले से शव यात्रा निकालनी पड़ी।
- बरसात के मौसम में जहरीले जीव-जंतुओं के भारी खतरे के बीच ग्रामीणों ने जान जोखिम में डालकर अंतिम विदाई दी।
- घटना ने सरकार के विकास के दावों और ग्रामीण बुनियादी ढांचे की पोल खोलकर रख दी है।




