ईरान-अमेरिका डील से बाहर हुआ पाक, कतर की एंट्री, हाथ से गया जंग बंद कराने का मेडल

Iran-US Talks in Qatar: जिस काम का क्रेडिट पाकिस्तान लेने में जुटा हुआ था, जिस जंग को बंद कराने का मेडल वो पहनना चाहता था, उसमें एक नए मीडिएटर की एंट्री हो गई है. खाड़ी देश कतर ईरान-अमेरिका के बीच समझौते की बात कर रहा है और उम्मीद है कि इससे एक बड़ी डील जल्द हो सकती है. मामला फिलहाल ईरान की फ्रीज संपत्तियों पर अटका हुआ है.
Iran-US Ceasefire Talks: कतर की राजधानी दोहा में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बेहद अहम बातचीत अब किसी बड़े समझौते की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है. क्षेत्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों देशों के बीच कई अहम मुद्दों पर सहमति बनने लगी है, जिससे पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के फिर से सामान्य होने की उम्मीद बढ़ गई है. अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक कतर की मध्यस्थता में अमेरिका और ईरान के बीच विदेशों में फ्रोजेन ईरानी असेट्स को लेकर एक शुरुआती सूत्रों का कहना है कि अगर बातचीत इसी तरह आगे बढ़ती रही, तो जल्द ही बड़े समझौते का ऐलान हो सकता है.
दोहा में ईरान की ओर से संसद अध्यक्ष मोहम्मद बघेर कालिबाफ विदेश मंत्री अब्बास अरागची और केंद्रीय बैंक प्रमुख अब्दोलनासेर हेम्मती शामिल हुए. इससे साफ है कि तेहरान इस बातचीत को बेहद गंभीरता से ले रहा है. इस पूरी बातचीत का सबसे अहम मुद्दा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बना हुआ है. दुनिया का करीब 20 प्रतिशत तेल इसी समुद्री रास्ते से गुजरता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रस्तावित समझौते में 60 दिन के युद्धविराम, होर्मुज में जहाजों की आवाजाही बहाल करने, ईरानी तेल निर्यात की अनुमति और परमाणु कार्यक्रम पर आगे की बातचीत शामिल है.
किन मुद्दों पर हो रही है बात?
उधर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के समृद्ध यूरेनियम को या तो नष्ट किया जाएगा या अंतरराष्ट्रीय निगरानी में खत्म कराया जाएगा. इस पर अमेरिका का दावा है कि ईरान मान गया है लेकिन ईरान की ओर से साफ कहा गया है कि वो इस पर चरणों में बात करना चाहता है और उसने कोई कमिटमेंट नहीं दिया है.
अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक खाड़ी में बिछाई गई समुद्री बारूदी सुरंगों को हटाने पर भी चर्चा हुई है. साथ ही होर्मुज से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों पर किसी तरह का शुल्क नहीं लगाने और अमेरिकी नौसैनिक प्रतिबंधों में धीरे-धीरे ढील देने पर भी विचार किया जा रहा है. अगर सबकुछ ठीक रहा, तो अगले 30 दिनों में समुद्री व्यापार युद्ध से पहले जैसी स्थिति में लौट सकता है.
हालांकि सबसे बड़ा विवाद अब भी ईरान की विदेशों में ब्लॉक हो चुकीं संपत्तियां हैं. ईरान ने साफ कर दिया है कि जब तक शुरुआती चरण में उसके कुछ अरब डॉलर जारी नहीं किए जाते, तब तक कोई अंतिम समझौता संभव नहीं होगा. रिपोर्ट्स की मानें तो तेहरान ने शुरुआती चरण में कम से कम 12 अरब डॉलर तक पहुंच की मांग रखी है.
कैसे कतर बन गया मुख्य मध्यस्थ?
ईरान-अमेरिका की वार्ता में पहले मध्यस्थता का जिम्मा पाकिस्तान और तुर्की ने उठा रखा था. पाकिस्तान ने दोनों देशों के बीच पहले दौर की वार्ता भी इस्लामाबाद में करवाई थी लेकिन इसमें कोई हल नहीं निकल सका. इसके बाद दूसरे दौर की वार्ता के लिए भी कोशिशें भरपूर हुईं लेकिन दोनों देश आमने-सामने बैठ तक नहीं सके. ईरान का आरोप था कि पाकिस्तान अमेरिका की ओर से बात कर रहा है, तो वहीं अमेरिका को भी पाकिस्तान पर संदेह था. यही वजह है कि अब इस मामले में कतर की एंट्री हुई है, जो समझौते की शर्तों पर ईरान और अमेरिका को राजी करने में जुटा है.
फिलहाल दोनों देशों ने आधिकारिक तौर पर किसी समझौते की पुष्टि नहीं की है, लेकिन दोहा में चल रही बातचीत पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं.




