पेपर लीक : सही कारण पकड़ें और सफल उदाहरण से सीखें!

भारत में प्रवेश परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर बार-बार सवाल उठ रहे हैं। हाल ही में एन.ई.ई.टी. (नीट)-यू.जी. 2026 परीक्षा को पेपर लीक के आरोपों के बाद रद्द कर दिया गया। इससे लाखों छात्र-छात्राओं का भविष्य प्रभावित हुआ। पर ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। 2024 में भी एन.ई.ई.टी. विवादों में घिरा था। वहीं, आई.आई.टी.-जे.ई.ई. जैसी परीक्षाओं का रिकॉर्ड आज तक लगभग बेदाग रहा है। ऐसा क्यों है कि एक ही देश में कुछ परीक्षाएं दोष रहित रहती हैं और क्यों अन्य परीक्षाएं बार-बार पेपर लीक से निरस्त होती हैं?
एन.ई.ई.टी. जैसी परीक्षाओं में लीक का मुख्य कारण मानवीय हस्तक्षेप और कमजोर सुरक्षा है। पेपर सैटिंग, पिं्रटिंग, ट्रांसपोर्टेशन और परीक्षा केंद्रों तक पहुंच, हर चरण में भ्रष्टाचार की गुंजाइश है। एन.टी.ए. (नैशनल टैसिं्टग एजैंसी) पर बहुत अधिक बोझ है। ऐसे में कई परीक्षाएं आऊटसोर्स की जाती हैं, जहां प्राइवेट पिं्रटिंग प्रैस और लॉजिस्टिक्स कंपनियां शामिल होती हैं। जाहिर है कि ऐसी स्थिति में पेपर लीक की गुंजाइश को नकारा नहीं जा सकता।
गौरतलब है कि एक पेपर लाखों रुपए में बिकता है। जिसके पीछे छात्रों का दबाव, कोङ्क्षचग उद्योग का सैंकड़ों करोड़ का कारोबार और राजनीतिक संरक्षण पेपर लीक को बढ़ावा देते हैं। वहीं देश में इस अपराध की कानूनी सजा कमजोर है, आरोपी आसानी से जमानत पर बाहर आ जाते हैं। उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ वर्षों में 70-90 से अधिक पेपर लीक के मामले दर्ज हुए हैं। लेकिन किसी भी मामले में किसी बड़े अधिकारी को कोई सजा नहीं सुनाई गई। वहीं एन.टी.ए. की ‘एडहॉक’ व्यवस्था, संस्थागत स्मृति की कमी और पारदर्शिता की अनुपस्थिति इस समस्या को गहरा बनाती है। ओ.एम.आर. शीट्स का इस्तेमाल, डिजिटल ट्रांसिशन में देरी और चेन-ऑफ कस्टडी की कमी लीक को आसान बनाती है।
आई.आई.टी.-जे.ई.ई. में लीक लगभग नहीं के बराबर होने का कारण स्पष्ट है, बहु-स्तरीय सुरक्षा : पेपर सैटिंग आई.आई.टी. प्रोफैसरों द्वारा कैंपस में होती है। कई सैट तैयार किए जाते हैं, जिसमें सी.बी.टी. (कम्प्यूटर बेस्ड टैस्ट) फॉर्मेट से अंतिम मिनट तक बदलाव संभव होता है। कम आऊटसोर्सिंग के कारण यह प्रक्रिया आई.आई.टी. संस्थानों के सीधे नियंत्रण में ही रहती है। जे.ई.ई. भारत की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा है। इसलिए इसमें शामिल लोग अपनी जिम्मेदारी समझते हैं। इसके साथ ही तकनीक का पूरा इस्तेमाल किया जाता है, जिससे रैंडमाइज्ड प्रश्न, मजबूत एन्क्रिप्शन और सख्त निगरानी की जाती है। जे.ई.ई. में लाखों छात्र शामिल होते हैं, फिर भी इस पर उनका विश्वास कायम है। यानी कि समस्या परीक्षा के आकार में नहीं, बल्कि प्रबंधन और इरादे में है।
चीन का गाओकाओ, जिसमें 1.30 करोड़ छात्र बैठते हैं, दुनिया की सबसे बड़ी परीक्षाओं में से एक है । पर इसमें लीक की घटनाएं नगण्य हैं। पेपर को परमाणु हथियारों जैसा ‘टॉप सीक्रेट’ माना जाता है। पेपर सैटर्स एक महीने पहले से ही आइसोलेशन में भेजे जाते हैं। पर्चों की पिं्रटिंग जेलों या विशेष सरकारी सुविधाओं में की जाती है, जहां फोन/संपर्क प्रतिबंधित रहता है। पर्चों का ट्रांसपोर्ट पुलिस और आम्र्ड फोर्सेस द्वारा एयरटाइट सुरक्षा में किया जाता है। इसके बाद इन पर्चों को आम्र्ड गार्डस 24&7 कैमरा निगरानी के साथ सुरक्षित रखा जाता है, जहां फेशियल रिकग्निशन, ड्रोन, सिग्नल जैमर्स द्वारा ऑनलाइन मॉनिटरिंग की जाती है। इतना ही नहीं, चीन में सख्त कानूनों के चलते लीक को देशद्रोह माना जाता है, जिसकी कड़ी सजा दी जाती है। परिणाम-लगभग शून्य बड़े लीक।
2026 की नीट परीक्षाओं के ‘री-एग्जाम’ के लिए भारतीय वायुसेना को पेपर ट्रांसपोर्ट के लिए बुलाया गया है। सेना भी लॉजिस्टिक्स में मदद देगी। ऐसा पहली बार हुआ है। जानकर मानते हैं कि सैन्य अनुशासन और निष्पक्षता से विद्यार्थियों और जनता का विश्वास बढ़ेगा। लेकिन वहीं कुछ लोग इसे सिस्टम की विफलता की स्वीकारोक्ति भी मानते हैं। सैन्य बल देश की सीमा की रक्षा करती है, ऐसे में इन्हें शिक्षा मंत्रालय/एन.टी.ए. की जिम्मेदारी नहीं संभालनी चाहिए। यह ‘फायरफाइटिंग’ तो अवश्य है लेकिन समाधान नहीं। यदि प्रबंधन सही होते तो ऐसे संसाधनों का दुरुपयोग रोका जा सकता था। चीन की तरह सिविलियन सिस्टम को मजबूत बनाना चाहिए, न कि सेना पर निर्भर होना।
लीक रोके बिना भारत का मानव संसाधन विकास असंभव है। ऐसे में सरकार को लीक रोकने और प्रभावी प्रबंधन के विषय में गंभीरता से सोचना चाहिए। जैसे कि पूर्ण डिजिटलीकरण, रैंडम प्रश्न, केंद्रीकृत, आई.आई.टी./यू.पी.एस.सी. जैसे मॉडल की तरह स्वायत्त प्राधिकरण। लीक से निपटने के लिए सख्त कानून बनें जहां लीक को राष्ट्रीय सुरक्षा अपराध माना जाए और ऐसे मामलों का समयबद्ध ट्रायल हो। एन.ई.ई.टी. विवाद छात्रों, परिवारों और राष्ट्र के लिए दर्दनाक है। आत्महत्याएं, आॢथक नुकसान और विश्वास का ह्रास हो रहा है। आई.आई.टी.-जे.ई.ई. साबित करता है कि भारत में सक्षम सिस्टम संभव है। वहीं चीन दिखाता है कि राजनीतिक इच्छाशक्ति से बड़े पैमाने पर परीक्षाएं सुरक्षित हो सकती हैं। सशस्त्र बलों की मदद स्वागत योग्य है लेकिन यह सिस्टम की नाकामी है। सरकार को एन.टी.ए. का पुनर्गठन, जवाबदेही और सुधारों पर फोकस करना चाहिए। युवाओं का भविष्य राजनीति या मुनाफे की भेंट नहीं चढऩा चाहिए। शिक्षा राष्ट्र की नींव है, इसे मजबूत बनाएं, वरना ‘विश्व गुरु’ का सपना अधूरा रहेगा।-विनीत नारायण




