‘देश में अग्निकांडों से’ लगातार हो रही जान-माल की क्षति!

पिछले कुछ समय से देश में अग्निकांडों में भारी वृद्धि होने से जान-माल की भारी क्षति हो रही है। न सिर्फ आम लोग ही इन अग्निकांडों का शिकार हो रहे हैं बल्कि सरकारी कार्यालय और होटल आदि भी आग की चपेट में आने से मूल्यवान राष्ट्रीय सम्पत्ति नष्ट हो रही है। देश में अग्निकांडों की पिछले लगभग अढ़ाई महीनों की चंद घटनाएं निम्न में दर्ज हैं :
* 18 मार्च को ‘दक्षिण-पश्चिम दिल्ली’ के ‘पालम’ इलाके में एक इमारत में भीषण आग लगने से 3 बच्चों सहित 7 लोगों की जान चली गई।
* 29 अप्रैल को ‘बालोतरा’ (राजस्थान) में ‘हिंदुस्तान पैट्रोलियम कार्पोरेशन लिमिटेड’ (एच.पी.सी.एल.) की रिफाइनरी के ‘क्रूड डिस्टिलेशन सैक्शन’ में आग लग जाने से सम्पत्ति की भारी क्षति हुई।
* 3 मई को ‘पूर्वी दिल्ली’ के विवेक विहार इलाके में एक चार मंजिला इमारत में आग लगने से एक बच्चे सहित 9 लोगों की मौत हो गई।
* 6 मई को ‘कटक’ (ओडिशा) स्थित ‘सरकारी एस.सी.बी. मैडीकल कालेज एवं हास्पिटल’ के आई.सी.यू. में आग लग जाने से वहां उपचाराधीन कम से कम 10 लोगों की मौत हो गई तथा बचाव कार्यों में जुटे अस्पताल के कम से कम एक दर्जन कर्मचारी भी झुलस गए।
* 29 मई को ‘हौजखास’ (दिल्ली) में एक मकान में ए.सी. में धमाके के बाद भीषण आग लग गई जिससे रिटायर्ड आई.ए.एस. अधिकारी धर्मेंद्र कुमार की मौत हो गई।
* 31 मई को ‘बहादुरगढ़’ (हरियाणा) में जूते बनाने वाली एक फैक्टरी में आग लगने के परिणामस्वरूप 2 प्रवासी श्रमिक गंभीर रूप से झुलस गए।
* 3 जून को ‘फिरोजपुर छावनी’ (पंजाब) स्थित ‘नेवेद्यम स्वीट्स एंड बेकर्स रैस्टोरैंट’ में सुबह आग लग जाने से ‘तुलसी’ नामक कर्मचारी की जल कर मौत हो गई व रैस्टोरैंट का सारा सामान भी जल कर राख हो गया।
* और अब 3 जून को ही ‘दिल्ली’ के ‘मालवीय नगर’ इलाके में स्थित पांच मंजिला ‘फ्लोरिश स्टे बी.एंड बी. होटल’ में आग लगने से वहां ठहरे हुए 11 विदेशियों सहित 21 लोगों की मौत हो गई तथा कई घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है।
होटल में अंदर आने व बाहर जाने के लिए एक ही दरवाजा था। आग लगने से मची अफरा-तफरी में जान बचाने के लिए कई लोग खिड़कियों के शीशे तोड़ कर मदद के लिए गुहार लगाते दिखाई दिए। एक महिला ने अपनी गोद में बच्चे को लेकर तीसरी मंजिल से छलांग लगा दी।
स्थानीय लोगों ने इमारत में फंसे और छलांग मार कर बच निकलने की कोशिश करने वालों की सहायता के लिए नीचे जमीन पर गद्दे बिछा दिए थे। महिला अपने बच्चे के साथ एक गद्दे पर गिरी जिसे तुरंत नजदीकी अस्पताल में ले जाया गया।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार केवल दिल्ली में ही इस वर्ष जनवरी से मई 2026 के बीच आग लगने की घटनाओं में 45 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। इसी से अनुमान लगाया जा सकता है कि देश के अन्य अग्निकांडों में कितने लोगों ने जान गंवाई होगी। अधिकांश मामलों में शार्ट सॢकट होने, गैस सिलैंडर फटने या लीक करने, ज्वलनशील पदार्थों के निकट लापरवाही से आग जलाने और आग से बचाव सम्बन्धी नियमों का पालन न करने, बड़े प्रतिष्ठानों में अनिवार्य एन.ओ.सी. या सुरक्षा सम्बन्धी ऑडिट न होने आदि कारणों से ही अग्निकांड होते हैं।
हर बार दिल्ली जैसे बड़े अग्निकांड होने पर मामला कुछ दिन सुॢखयों में रहता है और अधिकारियों की नींद कुछ दिनों के लिए खुलती है लेकिन मामला ठंडा होते ही अधिकारी फिर बेपरवाह हो जाते हैं। इस तरह के अग्निकांड रोकने के लिए इमारतों का नियमित रूप से सुरक्षा आडिट होना जरूरी है। जब तक संबंधित स्टाफ को पूरे प्रशिक्षण व अत्याधुनिक अग्निशमन उपकरणों से लैस करके अग्निकांडों से बचने के लिए सुनियोजित रणनीति नहीं बनाई जाती, तब तक ऐसे अग्निकांड होते ही रहेंगे और अनमोल जिंदगियां मौत के मुंह में जाती रहेंगी।




