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बुढ़ापा पैंशन से ‘प्राण वायु देवता पैंशन’ तक : अनोखी पहल

हरियाणा की पहचान केवल कृषि, खेल और सैनिक परंपरा तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक सुरक्षा की अनेक जनहितकारी योजनाओं के कारण भी राज्य ने पूरे देश में अपनी अलग पहचान बनाई है। जब भी वृद्धावस्था पैंशन की बात होती है तो लोगों को सबसे पहले चौधरी देवीलाल का नाम याद आता है। हरियाणा देश का पहला राज्य माना जाता है जिसने बुजुर्गों के सम्मान और सामाजिक सुरक्षा के लिए बुढ़ापा पैंशन जैसी योजना को लागू किया। 

यही कारण है कि आज भी करोड़ों लोग चौधरी देवीलाल को श्रद्धा और सम्मान के साथ याद करते हैं। समय के साथ हरियाणा की विभिन्न सरकारों ने सामाजिक सुरक्षा की इस परंपरा को आगे बढ़ाया और इसे नई सोच के साथ विस्तारित किया। इसी क्रम में तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने 26 अक्तूबर 2023 को एक ऐसी अनोखी योजना शुरू की, जिसने न केवल देश बल्कि दुनिया का ध्यान भी आकर्षित किया। इस योजना का नाम है प्राण वायु देवता पैंशन योजना।

आमतौर पर पैंशन मनुष्यों को दी जाती है, लेकिन हरियाणा सरकार ने प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए 75 वर्ष या उससे अधिक आयु के वृक्षों को भी सम्मान देने का निर्णय लिया। इस योजना के अंतर्गत ऐसे वृक्षों के संरक्षण और देखभाल के लिए उनके मालिकों को प्रतिवर्ष 2750 रुपए की पैंशन प्रदान की जाती है। योजना की बढ़ती लोकप्रियता और जनभागीदारी को देखते हुए सरकार ने अब इस राशि को बढ़ाकर 3000 रुपए प्रतिवर्ष कर दिया है। योजना शुरू होने के समय लगभग 3810 वृक्ष इसके अंतर्गत पंजीकृत थे, जिन्हें वार्षिक पैंशन का लाभ दिया जा रहा था। आज इन वृक्षों की संख्या बढ़कर लगभग 5000 तक पहुंच चुकी है। यह केवल एक सरकारी आंकड़ा नहीं है, बल्कि इस बात का प्रमाण है कि लोग पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरुक हो रहे हैं और वृक्षों को केवल लकड़ी या भूमि उपयोग के साधन के रूप में नहीं बल्कि जीवनदाता के रूप में देखने लगे हैं।

वास्तव में वृक्ष मानव जीवन के सबसे बड़े संरक्षक हैं। वे हमें ऑक्सीजन प्रदान करते हैं, वातावरण को शुद्ध बनाते हैं, भूजल संरक्षण में मदद करते हैं, तापमान को नियंत्रित करते हैं और जैव विविधता को सुरक्षित रखते हैं। बढ़ते शहरीकरण, औद्योगीकरण और जनसंख्या दबाव के कारण दुनिया भर में जंगलों का क्षेत्र लगातार घट रहा है। इसका सीधा प्रभाव जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग, अनियमित वर्षा,  सूखा और बाढ़ जैसी समस्याओं के रूप में सामने आ रहा है। ऐसे समय में यदि किसी राज्य की सरकार वृक्षों को सम्मान देने और उनके संरक्षण के लिए आर्थिक प्रोत्साहन प्रदान करती है तो यह निश्चित रूप से एक दूरदर्शी और अनुकरणीय पहल कही जाएगी। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में इसी सोच को राष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ाते हुए देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 जून 2024 को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान की शुरूआत की। यह अभियान केवल पौधारोपण कार्यक्रम नहीं था, बल्कि भावनाओं से जुड़ा एक जनआंदोलन बन गया। 

इस अभियान के अंतर्गत पर्यावरण मंत्रालय द्वारा 80 करोड़ पौधे लगाने का रिकॉर्ड लक्ष्य सफलतापूर्वक प्राप्त किया गया। देश के विभिन्न राज्यों, शैक्षणिक संस्थानों, सरकारी कार्यालयों, पंचायतों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों ने इसमें बढ़-चढ़कर भाग लिया। राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे भी लाखों पौधे लगाए गए, जिससे हरित आवरण बढ़ाने के साथ-साथ सड़क किनारे पर्यावरणीय संतुलन को मजबूत करने में सहायता मिली। यदि भारत के वन क्षेत्र की स्थिति पर नजर डालें तो यह स्पष्ट होता है कि अभी भी हमारे सामने बड़ी चुनौतियां मौजूद हैं। भारत का कुल वन क्षेत्र लगभग 6.78 लाख वर्ग किलोमीटर है जो देश के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का लगभग 20.64 प्रतिशत है। राष्ट्रीय वन नीति के अनुसार देश के कुल क्षेत्रफल का लगभग 33 प्रतिशत भाग वनाच्छादित होना चाहिए, अर्थात अभी भी हमें काफी दूरी तय करनी है। वन क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत में सबसे अधिक जंगल मध्य प्रदेश में हैं। इसके बाद अरुणाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा और महाराष्ट्र का स्थान आता है। ये राज्य क्षेत्रफल के आधार पर सबसे अधिक वन संपदा रखते हैं।

दूसरी ओर कुछ राज्य ऐसे भी हैं जहां वन क्षेत्र अपेक्षाकृत बहुत कम है। हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, बिहार और उत्तर प्रदेश इस श्रेणी में आते हैं। हरियाणा में वन क्षेत्र लगभग 3 से 4 प्रतिशत के आसपास है, जो राष्ट्रीय औसत से काफी कम है। सीमित वन क्षेत्र,  बढ़ती आबादी, औद्योगिक विकास और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था जैसी परिस्थितियां राज्य के सामने विशेष चुनौतियां प्रस्तुत करती हैं। यही कारण है कि हरियाणा में प्राण वायु देवता पैंशन योजना जैसी अभिनव पहल की आवश्यकता महसूस की गई। यह योजना केवल पुराने वृक्षों को बचाने का प्रयास नहीं है, बल्कि समाज में यह संदेश देने का माध्यम भी है कि वृक्ष हमारी प्राकृतिक धरोहर हैं और उनका संरक्षण प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।

इन सभी प्रयासों का मूल उद्देश्य मानव जीवन को बेहतर बनाना, समाज को संवेदनशील बनाना और भविष्य को सुरक्षित करना है। यदि प्रत्येक नागरिक कम से कम एक पौधा लगाए, उसकी देखभाल करे और प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाए, तो वह दिन दूर नहीं जब भारत न केवल आर्थिक महाशक्ति बनेगा बल्कि पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी दुनिया के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत करेगा।-दीपक कुमार शर्मा    

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