‘अंतहीन’ ही रहेगा युद्ध

प्रधानमंत्री मोदी ने रूस के राष्ट्रपति पुतिन से एक बार फिर आग्रह किया है कि ‘अंतहीन युद्ध’ से निकल कर ‘युद्ध के अंत’ की ओर बढ़ें। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने प्रधानमंत्री मोदी को पश्चिम एशिया में शांति के प्रयासों और संवाद की शुरुआत के लिए मध्यस्थ भूमिका निभाने का अनुरोध किया है। किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में ‘शंघाई सहयोग संगठन’ (एससीओ) के देशों का शिखर सम्मेलन जारी रहा और युद्ध-समाप्ति की ऐसी आवाजें बुलंद होती रहीं, लेकिन उसके समानांतर अमरीकी राष्ट्रपति टं्रप ने ईरान पर एक बार फिर हमला करवा दिया। होर्मुज जलडमरूमध्य के करीब लारक द्वीप पर हमला कर दो लॉन्चर्स को तबाह करने का दावा किया गया है। दो मौतों के अलावा नुकसान काफी हुआ है। यह द्वीप फारस और ओमान खाड़ी के बीच स्थित है और बेहद महत्वपूर्ण, संवेदनशील संकरा जलमार्ग है। दुनिया के करीब 20 फीसदी तेल और गैस इसी रास्ते से सप्लाई होते रहे हैं। यहां से जहाजों पर पैनी निगरानी भी रखी जा सकती है। अमरीका इसे भी बर्बाद करने पर आमादा है। राष्ट्रपति टं्रप ने सोशल मीडिया की पोस्ट में लिखा है कि ईरान द्वारा बिछाई जा रही बारूदी सुरंगों को उड़ाने के लिए यह हमला किया गया। टं्रप ने यह भी लिखा है कि हम ईरान को बुरी तरह मारेंगे। ईरान एक नाकाम देश है। उसके पास करेंसी भी नहीं बची है। महंगाई दर 300 फीसदी है और ईरान अपने सैनिकों और पुलिस को वेतन तक नहीं दे पा रहा है। अमरीका आज की रात (मंगलवार) ईरान पर विध्वंसक हमला करेगा। हमले से पहले ही ईरान ने पलटवार कर जॉर्डन और संयुक्त अरब अमीरात समेत कतर, कुवैत, बहरीन में अमरीकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले कर अमरीका को बता दिया है कि ईरान की ताकत अब भी मौजूद है।
राष्ट्रपति टं्रप पहले दावा कर चुके हैं कि अमरीका ने होर्मुज क्षेत्र को बारूदी सुरंगों से मुक्त करा दिया है। फिर यह हमला क्यों किया गया? हमले के बावजूद होर्मुज में अब भी 100 से अधिक बारूदी सुरंगें बताई जाती हैं। राष्ट्रपति टं्रप ने करीब एक माह की खामोशी और हमलों को रोकने के बाद तब हमले के आदेश दिए हैं, जब अमरीका के कई सैन्य कमांडरों ने युद्ध को बढ़ाने पर ‘असहमति’ जताई है। ‘व्हाइट हाउस’ के आधा दर्जन बड़े अधिकारियों ने इस्तीफे दे दिए हैं। प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट, अमरीकी सेना के सचिव डैन ड्रीस्कॉल समेत उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, निदेशक, वकील आदि अधिकारियों ने राष्ट्रपति का साथ छोड़ दिया है। ‘ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ’ के अध्यक्ष जनरल डैन केन भी कह चुके हैं कि मौजूदा परिस्थितियों में ईरान को हराना असंभव-सा है। फिर भी राष्ट्रपति टं्रप, युद्ध के छह महीने बाद भी, युद्ध को ‘अंतहीन’ बनाने पर आमादा हैं। युद्ध में अमरीका के अब तक 3,57,677 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं। एक अहंकार, वहशीपन, तानाशाह प्रवृत्ति ने करदाताओं का इतना पैसा ‘फूंक’ दिया है। अमरीका के 18-19 लड़ाकू विमान तबाह हो चुके हैं। उसके 18 सैनिक मारे जा चुके हैं और 750 से अधिक घायल हुए हैं। ये आंकड़े पेंटागन के हैं और शीर्ष मीडिया एजेंसियां और अखबार छाप चुके हैं। टं्रप की लोकप्रियता ‘निम्नतम’ स्तर पर है और जनता में भी रोष, विद्रोह हैं। ईरान युद्ध में अभी तक कुल 3600 के करीब मौतें हो चुकी हैं, जबकि इजरायल में करीब 60 और लेबनान में 3527 मौतें हुई हैं। युद्ध के दौरान होर्मुज में 70 से अधिक जहाजों पर हमले किए गए, जिनमें 19 नाविक मारे गए। इनमें भारतीय भी शामिल हैं। बताया जाता है कि अब भी 400 जहाज और करीब 6000 नाविक होर्मुज और आसपास के समंदर में फंसे हैं। ईरान में खाद्य महंगाई दर करीब 128 फीसदी है, जो लगातार बढ़ रही है। उपभोक्ता वस्तुएं 88 फीसदी महंगी हो चुकी हैं। बेशक ईरान के हालात बहुत खराब हैं, लेकिन अमरीका उसे घुटनों पर आने को विवश नहीं कर पाया है। युद्ध सिर्फ यही नहीं है। रूस-यूक्रेन के बीच साढ़े चार साल से युद्ध जारी है। यह रूस बनाम पश्चिम की तमाम ताकतों के बीच है। बर्बादी, तबाही, मिट्टी-मलबा होने का कोई हिसाब नहीं।




