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कॉर्पोरेट की चमक-धमक छोड़ ₹2.5 लाख से शुरू किया देसी काम, अब करोड़ों का कारोबार, लोग पूछ रहे नाम

नई दिल्‍ली: यह कहानी एक ऐसी जोड़ी की है जिसने कॉर्पोरेट की चमक-धमक छोड़कर एकदम देसी काम से अपनी पहचान बनाई है। अभिषेक चौधरी बंगाल के सिलीगुड़ी से हैं। वहीं, सेंजुती महतो झारखंड के बोकारो से ताल्‍लुक रखती हैं। दोनों ने मिलकर ‘अर्थ स्टोरी फार्म्स’ (Earth Story Farms) नाम का वेंचर शुरू किया है। इसकी नींव उन्‍होंने 2021 में डाली थी। यह बिना प्रिजर्वेटिव वाले क्षेत्रीय उत्पाद बेचता है। इनमें नोलेन गुड़, बिलोना घी, औषधीय शहद, अचार, बाजरा, चावल और GI-टैग वाले मसाले शामिल हैं। सिर्फ 2.5 लाख रुपये की पूंजी से शुरू हुए इस वेंचर का कारोबार अब 1.25 करोड़ रुपये पहुंच गया है। आइए, यहां अभिषेक चौधरी और सेंजुती महतो की सफलता के सफर के बारे में जानते हैं।

अभिषेक चौधरी IIM-कलकत्ता से एमबीए और पूर्व आईटी कंसल्टेंट हैं। सेंजुती महतो जेएनयू से पॉलिटिकल साइंस में पोस्ट-ग्रेजुएट हैं। वह विज्ञापन जगत से आती हैं। दोनों ने अपने कंफर्ट जोन से बाहर निकलकर उद्यमिता की राह चुनी। अभिषेक ने विप्रो और IBM जैसी कंपनियों में 12 साल बिताने के बाद ग्रामीण आजीविका पर काम किया। वहीं, सेंजुती ने ओगिल्वी और डेंसु जैसी बड़ी एजेंसियों में 18 साल तक ब्रांड बिल्डिंग के गुर सीखे हुए थे। इन दोनों के अलग-अलग अनुभवों ने उनके वेंचर ‘अर्थ स्टोरी फार्म्स’ को मजबूत नींव दी।

शुरू में अभिषेक और सेंजुती ने बंगाल के बांकुरा में 10 एकड़ जमीन पर खेती शुरू की। कोरोना के दौरान कोलकाता में घर-घर सब्जियां पहुंचाईं। उन्होंने जल्द ही महसूस किया कि भारतीय ग्राहक ताजी सब्जियां छूकर और देखकर खरीदना पसंद करते हैं। इससे इस मॉडल को बड़े स्तर पर ले जाना कठिन था। इसके बाद उन्होंने अपनी रणनीति बदली। ‘पैकेज्ड ट्रेडिशनल प्रोडक्ट्स’ पर फोकस किया। उन्होंने बांकुरा के प्रसिद्ध ‘नोलन गुड़’ से शुरुआत की। इसे D2C (डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर) ब्रांड के रूप में स्थापित किया।

अभिषेक और सेंजुती का मॉडल खुद की फैक्ट्रियां लगाने के बजाय स्थानीय कारीगरों और स्वयं सहायता समूहों के साथ मिलकर काम करने पर आधारित है। उनका प्रमुख उत्पाद ‘नोलन गुड़’ बांकुरा के पारंपरिक ‘शिउली’ बनाते हैं। इसमें किसी रसायन का इस्‍तेमाल नहीं होता। इसी तरह, वे सुंदरबन का दुर्लभ मैंग्रोव शहद, मेदिनीपुर का बिलोना घी और झारखंड के रागी-बाजरा जैसे मोटे अनाज सोर्स करते हैं। वर्तमान में उनके पास 11 से अधिक GI-टैग्‍ड प्रोडक्‍ट हैं। इन्‍हें वे अगले साल तक 50 तक ले जाने की योजना बना रहे हैं।

अभिषेक और सेंजुती के स्टार्टअप का सफर सिर्फ 2.5 लाख (वित्त वर्ष 2021-22) से शुरू हुआ था। वित्त वर्ष 2024-25 में यह 1.25 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। आज उनके उत्पाद ब्लिंकिट, स्विगी इंस्टामार्ट और अमेजन जैसे प्लेटफॉर्म्स के साथ ‘बॉम्बे कैंटीन’ और ‘ब्लू टोकाई’ जैसे प्रीमियम कैफे में भी इसतेमाल किए जा रहे हैं। अगले पांच सालों में दोनों 100 करोड़ रुपये के टारगेट को हाथ में लेकर चल रहे हैं। उनकी मिडिल ईस्‍ट देशों में निर्यात शुरू करने की तैयारी है। यह जोड़ी भारतीय पारंपरिक स्वाद को ग्‍लोबल प्‍लेटफॉर्म पर पहचान दिलाना चाहती है।

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