मध्यप्रदेश

छिंदवाड़ा में 24 मासूमों की जान लेने वाले कोल्ड्रिफ कफ सिरप कांड में SIT का एक्शन, 2 डॉक्टर गिरफ्तार

मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले से बहुचर्चित कोल्ड्रिफ कफ सिरप कांड की खबर सामने आई है जिसमें विशेष जांच दल (SIT) ने 7 मार्च को एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है. जांच टीम ने परासिया के 2 नामी डॉक्टरों, डॉ. अमन सिद्दीकी और डॉ. एस.एस. ठाकुर को गिरफ्तार कर लिया है. 

7 मार्च दोपहर दोनों को हिरासत में लेकर कड़ी पूछताछ की गई, जिसके बाद पुख्ता साक्ष्यों के आधार पर उनकी गिरफ्तारी सुनिश्चित की गई. इस कार्रवाई के बाद पूरे कोयलांचल क्षेत्र के चिकित्सा जगत में हड़कंप मच गया है.

साक्ष्यों ने खोला राज, रडार पर थे डॉक्टर

यह पूरा मामला 24 मासूम बच्चों की संदिग्ध मौत से जुड़ा है, जिनकी जान कथित तौर पर इस घातक कफ सिरप के सेवन से गई थी. SIT पिछले कई महीनों से इस ‘मौत के नेटवर्क’ की कड़ियों को जोड़ने में जुटी थी. जाँच के दौरान टीम को दवा के वितरण, स्टॉक और प्रिस्क्रिप्शन से जुड़े कुछ ऐसे चौंकाने वाले दस्तावेज़ मिले, जिनमें इन डॉक्टरों की भूमिका संदिग्ध पाई गई. 

सूत्रों की मानें तो दवा की सप्लाई चेन में भारी अनियमितताएं बरती गई थीं, जिसे लेकर SIT ने अब अपना शिकंजा कसना शुरू कर दिया है. इस मामले में परासिया एसडीओपी एवं एसआईटी प्रमुख जितेंद्र जाट ने बताया कि कोल्ड्रिफ सिरप मामले में विवेचना के आधार पर 2 डॉक्टरों को हिरासत में लिया गया है.

जेल में आरोपियों की संख्या हुई 11

गौरतलब है कि इस हाई-प्रोफाइल मामले में परासिया के डॉ. प्रवीण सोनी सहित 9 आरोपी पहले से ही पिछले छह महीनों से जेल की सलाखों के पीछे हैं. ताजा गिरफ्तारियों के बाद अब इस केस में कुल आरोपियों की संख्या 11 हो गई है. पुलिस और विशेष जांच दल अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या इस खेल के पीछे कोई बड़ा अंतरराज्यीय गिरोह सक्रिय है. जांच एजेंसी यह भी देख रही है कि बिना किसी वैध लाइसेंस या मानक जाँच के यह सिरप स्थानीय क्लीनिकों और मेडिकल स्टोर तक कैसे पहुँचा.

इंसाफ की उम्मीद और क्षेत्र में तनाव

इधर, लंबे समय से न्याय के लिए भटक रहे पीड़ित परिवारों ने इन गिरफ्तारियों के बाद राहत की सांस ली है. अपने बच्चों को खोने वाले माता-पिता का कहना है कि सफेद कोट के पीछे छिपे इन चेहरों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए. 

कोयलांचल क्षेत्र में इस कार्रवाई को लेकर भारी चर्चा है और सामाजिक संगठनों ने भी प्रशासन से इस मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में करने की मांग की है. SIT के अधिकारियों का संकेत है कि जाँच अभी जारी है और आने वाले दिनों में कुछ और रसूखदार नाम इस मामले की जद में आ सकते हैं.

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