ठगी की रकम बांटने पर हु झगड़ा, जालसाज ने पुलिस को कर दिया फोन, पकड़ा गया डिजिटल अरेस्ट स्मैक गिरोह

पुणे : दो साइबर जालसाजों के बीच हुए झगड़े की वजह से पुलिस एक डिजिटल अरेस्ट स्कैम का पर्दाफाश करने में कामयाब रही। इस मामले में कैंप इलाके की रहने वाली 85 साल की एक बुजुर्ग महिला से 97 लाख रुपये ठग लिए गए थे। पुलिस ने जालसाजों के पास जाने वाले 50 लाख रुपये और बचा लिए। दोनों जालसाजों ने महिला से 97 लाख रुपये तो सफलतापूर्वक ठग लिए थे, लेकिन लूटे गए पैसों को आपस में बांटने को लेकर उनमें झगड़ा हो गया। इससे नाराज़ एक जालसाज ने महिला के दुबई में रहने वाले पोते होने का नाटक किया और पुलिस को बताया कि उसकी दादी को डिजिटल अरेस्ट कर लिया गया है।
पीड़ित महिला कैंप इलाके की ईस्ट स्ट्रीट पर बनी एक पॉश सोसाइटी में रहती हैं। उन्हें 27 मार्च से 7 अप्रैल तक डिजिटल अरेस्टमें रखा गया था। नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) और सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) के अधिकारी बनकर जालसाजों ने वीडियो कॉल के ज़रिए इस बुजुर्ग महिला को अपना निशाना बनाया।
महिला ने ऐसे ठगों को दिए 97 लाख
ठगों ने झूठा दावा किया कि महिला के बैंक खाते का इस्तेमाल पिछले साल हुए पहलगाम आतंकी हमले में शामिल आतंकवादियों को पैसे भेजने के लिए किया गया था। उन्होंने महिला को यह भी चेतावनी दी कि रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने उन्हें आतंकी फंडिंग के मामले में संदिग्ध के तौर पर चिह्नित किया है। गिरफ्तारी और समाज में बदनामी के डर से, एक कारोबारी परिवार से ताल्लुक रखने वाली इस महिला ने चार दिनों तक जालसाजों के निर्देशों का पालन किया। आखिरकार, उन्होंने कुल 97 लाख रुपये छह अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए।
दुबई से पोते ने किया फोन
इस अपराध का खुलासा 8 अप्रैल को हुआ, जब पुणे साइबर पुलिस को एक व्यक्ति का फोन आया। उस व्यक्ति ने दावा किया कि वह पीड़ित महिला का पोता है और दुबई में रहता है। उसने पुलिस को बताया कि कुछ जालसाजों ने उसकी दादी को डिजिटल अरेस्ट कर लिया है और वह उनकी सुरक्षा को लेकर काफी चिंतित है।
ऐसे पुलिस को हुआ शक
हालांकि, पुणे साइबर पुलिस की सीनियर इंस्पेक्टर स्वप्नाली शिंदे को फोन करने वाले व्यक्ति के इरादों पर शक हो गया। शिंदे ने TOI को बताया कि फोन करने वाला व्यक्ति पीड़ित महिला की सेहत के बजाय, इस धोखाधड़ी में शामिल पैसों की सही रकम जानने में ज़्यादा दिलचस्पी दिखा रहा था। जांच करने पर पुलिस को पता चला कि जिस मोबाइल नंबर से उन्हें फोन किया गया था, वह वही नंबर था जिसका इस्तेमाल जालसाजों ने पीड़ित महिला को वीडियो कॉल करने के लिए किया था।
माना जा रहा है कि जालसाजों में से एक को लूटे गए रुपयों का बड़ा हिस्सा मिला था, जिसे उसने अपने साथी से छिपाकर रखा था। इसी बात से नाराज़ होकर, दूसरे जालसाज ने पुलिस से संपर्क किया ताकि पीड़ित महिला की स्थिति का खुलासा हो सके। पुलिस ने इस धोखाधड़ी में इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबर के मालिक के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है।
पुलिस पहुंची तो कांप रही थीं बुजुर्ग
जब पुणे साइबर पुलिस और कैंटोनमेंट पुलिस स्टेशन के अधिकारी पीड़ित महिला के फ्लैट पर पहुंचे, तो उन्होंने पाया कि वह वहां बिल्कुल अकेली थीं, डर के मारे कांप रही थीं और उनकी सेहत भी काफी खराब थी। हालांकि उसके कुछ रिश्तेदार उसी बिल्डिंग में रहते हैं और कुछ विदेश में, लेकिन किसी को भी इस बात का पता नहीं था कि उसे दहशत की हालत में रखा गया था।
आरोपी के अकाउंटमें मिले 50 लाख
हमने उन्हें समझाया-बुझाया और उसका भरोसा जीतने के बाद, एक FIR दर्ज की। समय पर किए गए इस दखल से और भी ज़्यादा नुकसान होने से बच गया। FIR के मुताबिक, शिकायतकर्ता के सेविंग्स अकाउंट में अभी भी 50 लाख रुपये थे, जिन्हें वह ट्रांसफर करने के लिए तैयार थी, अगर पुलिस समय पर न पहुंचती




