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ममदानी पर शहजाद पूनावाला का हमला, बोले- भारतीयों और हिंदुओं को आपके प्रमाणपत्र की जरूरत नहीं

नई दिल्ली: बीजेपी के पूर्व नेता शहजाद पूनावाला ने न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर ममदानी को निशाने पर लिया। पूनावाला ने कहा कि न्यूयॉर्क के मेयर को अपने शहर की समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए, भारत और हिंदुओं को उपदेश नहीं देना चाहिए।

न्यूयॉर्क की समस्याएं गिनाईं

पूनावाला ने कहा कि न्यूयॉर्क में सबवे व्यवस्था, सफाई, महंगे किराये, कचरा प्रबंधन, बेघर लोगों और बढ़ती जीवन-यापन लागत जैसी कई चुनौतियां हैं। उनके मुताबिक, इन समस्याओं को सुलझाने के बजाय ममदानी भारत के सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर टिप्पणी कर रहे हैं। उन्होंने ममदानी की तुलना राहुल गांधी की राजनीति की शैली से भी की और कहा कि न्यूयॉर्क का मेयर बनने का मतलब दुनिया का विदेश मंत्री बनना नहीं है।

RSS को लेकर ममदानी की टिप्पणी पर पलटवार

पूनावाला ने ममदानी की उस टिप्पणी का भी जवाब दिया, जिसमें उन्होंने RSS की विचारधारा को लेकर आपत्ति जताई थी। उन्होंने कहा कि भारतीयों, हिंदुओं और RSS को यह प्रमाणपत्र देने की जरूरत नहीं है कि कौन समावेशी है और कौन नहीं। पूनावाला ने RSS के सेवा कार्यों का उल्लेख करते हुए दावा किया कि संगठन की शाखाओं और विभिन्न परियोजनाओं के जरिए शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सेवा का काम अलग-अलग वर्गों के लोगों के लिए किया जाता है।

इजरायल-हमास और बहुलवाद पर उठाए सवाल

पूनावाला ने ममदानी पर दोहरे मानदंड अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने इजरायल-हमास संघर्ष, BDS आंदोलन और इजरायल को लेकर ममदानी के रुख का हवाला देते हुए उनकी राजनीति पर सवाल उठाए। पूनावाला ने कहा कि ममदानी ने 7 अक्टूबर के हमास हमले की उतनी कड़ी निंदा नहीं की, जितनी अपेक्षित थी।

  • उन्होंने ममदानी के फिलिस्तीन संबंधी रुख और ‘इंतिफादा’ को लेकर उनके कथित समर्थन पर भी सवाल उठाए। पूनावाला ने कहा कि इजरायल को लेकर ममदानी का रुख उनकी समावेशिता की बातों से मेल नहीं खाता और इसी आधार पर उन्होंने ममदानी पर चयनात्मक बहुलवाद (Selective Pluralism) का आरोप लगाया।

बोले- पहले अपने रुख पर दें जवाब

पूनावाला ने ममदानी के बहुलवाद और समावेशिता से जुड़े रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें भारतीयों और हिंदुओं को इस बारे में उपदेश नहीं देना चाहिए। उन्होंने ममदानी से पूछा कि क्या उनकी परिभाषा में उनसे असहमत लोगों के लिए भी जगह है। पूनावाला ने ममदानी की राजनीति को चयनात्मक बहुलवाद करार देते हुए उनकी आलोचना की।

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