यूजीसी-शंकराचार्य विवाद: यूपी राजनीति आईएएस-आईपीएस अफसरों को खूब भाती, ऐसे अफसरों को जानते हैं

लखनऊ: यूजीसी के नए नियम और शंकराचार्य विवाद के चलते यूपी सरकार के दो अधिकारियों ने इस्तीफा दे दिया है। इन दोनों इस्तीफों के बाद ये सवाल उठने लगे हैं कि क्या दोनों अफसर राजनीति में जाना चाहते है? इसको लेकर सोशल मीडिया पर तमाम कयास लगाए जा रहे हैं। ये कयास यूं ही नहीं लग रहे हैं। इसके पीछे यूपी का पुराना इतिहास है, जिसमें कई अफसरों ने अफसरशाही छोड़कर राजनीति के रास्ते को चुना। इसमें कुछ तो रिटायरमेंट के बाद राजनीतिक दलों से जुड़े, तो वहीं कुछ ने वीआरएस लेकर राजनीतिक दलों का दामन थामा। शायद यही वजह है कि कयास लगाए जा रहे हैं कि दोनों अधिकारियों के इस्तीफा मंजूर होने के बाद वे राजनीति में हाथ आजमा सकते हैं।
एके शर्मा
उत्तर प्रदेश सरकार में नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा यानी एके शर्मा आईएएस से वीआरएस लेकर राजनीति में आए। वह 1988 बैच के गुजरात कैडर के आईएएस अफसर रह चुके हैं। वह गुजरात के साथ केंद्र में भी अहम पदों पर रह चुके हैं।
असीम अरुण
उत्तर प्रदेश सरकार में समाज कल्याण राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार असीम अरुण ने भी आईपीएस की सेवा छोड़कर राजनीति में एंट्री ली। असीम अरुण ने 2022 विधानसभा चुनावों से पहले नौकरी छोड़कर भाजपा के टिकट पर कन्नौज सदर सीट से चुनाव लड़ा और जीते।
राजेश्वर सिंह
बीजेपी नेता राजेश्वर सिंह ने भी पुलिस की नौकरी छोड़कर 2022 विधानसभा चुनाव में बीजेपी के टिकट पर लखनऊ की सरोजनीनगर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और जीते।
श्याम सिंह यादव
सिर्फ आईएएस-आईपीएस ही नहीं पीसीएस अफसरों ने भी नौकरशाही के बाद नेतागिरि में हाथ आजमाया। इसमें श्याम सिंह यादव का भी नाम शामिल है। श्याम सिंह यादव ने 2019 लोकसभा चुनाव में जौनपुर लोकसभा सीट से बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीते।
यूपी कैडर के आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर ने भी नौकरी से वीआरएस लेने के बाद आजाद अधिकार सेना के नाम से अपना राजनीतिक दल बनाया। अमिताभ ठाकुर मौजूदा समय में जेल में हैं। वो समय-समय पर विभिन्न मुद्दों को उठाते रहे हैं। राम बहादुर यूपी कैडर के IAS रहे। सेवानिवृत्ति के बाद बीजेपी में शामिल हुए और यूपी की राजनीति में सक्रिय हैं। रिटायर्ड आईएएस अफसर कुंवर फतेह बहादुर सिंह रिटायरमेंट के बाद बसपा में शामिल हुए, लेकिन बाद में सपा में चले गए।




