‘राहुल गांधी को जीवन भर ‘नकली PM’ बनाए रखें’, CEC के खिलाफ INDI गठबंधन के जन-महाभियोग पर BJP का तंज

नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के सांसद संबित पात्रा ने शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस पर हमला लिया। उन्होंने वोट चोरी का जिक्र करते हुए कहा, देश में पहली वोट चोटी नेहरू जी के समय हुई। सरदार पटेल को पीएम बनाने के लिए वोटिंग हुई थी, लेकिन सरदार पटेल के वोट चोरी कर नेहरू प्रधानमंत्री बने।
संबित पात्रा ने कहा कि कुछ आरोप लगाए गए हैं, SIR को लेकर, सीईसी को लेकर, आज कांग्रेस पार्टी और उनके कुछ सहयोगी दल लोकतंत्र के साथ मजाक कर रहे हैं। ये लोग असली संसद में हंगामा करते हैं और वहां काम नहीं करने देते हैं।
नेहरू वोट चोरी करके प्रधानमंत्री बने- संबित पात्रा
उन्होंने कहा कि आज वोट चोरी को लेकर जब मल्लिकार्जुन खरगे बोल रहे थे तो मैंने सोचा कि हां वोट चोरी हुई थी, पंडित नेहरू वोट चोरी करके प्रधानमंत्री बने थे। कांग्रेस पार्टी मॉक पार्लियामेंट कर रही है और पहली वोट चोरी नेहरू जी ने की थी।
संबित पात्रा ने कहा कि मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा है कि 13 करोड़ लोगों का भारत में वोट काटा गया है। अगर ऐसा होगा तो वे 13 करोड़ लोग सड़कों पर उतर आएंगे।
कांग्रेस संसद का मजाक उड़ा रही- संबित पात्रा
कांग्रेस पार्टी अभी जो ड्रामा कर रही है, यह ‘नकली संसद’, असल में संसद का ही मजाक उड़ा रही है। वहां मौजूद सभी वक्ताओं और प्रतिभागियों को यह सुन लेना चाहिए। अभी SIR प्रक्रिया चल रही है। कई राज्यों में, 13 करोड़ लोगों के नाम अभी तक अंतिम मतदाता सूची में शामिल नहीं किए गए हैं। ऐसा क्यों है? यह ‘ASDD’ फॉर्मूला क्या है? ‘A’ का मतलब है ‘Absent’ (अनुपस्थित)।
एक अधिकारी होता है जिसे BLO कहा जाता है। BLO एक ‘एन्यूमरेशन फॉर्म’ के लिए जिम्मेदार होता है, जिसे हर व्यक्ति को भरना होता है। BLO इस फॉर्म के साथ आपके घर तीन बार आता है।
अगर आप इन तीनों मौकों में से किसी पर भी मौजूद नहीं होते हैं, तो आपको ‘अनुपस्थित’ मान लिया जाता है, और आपका नाम मतदाता सूची से हटा दिया जाता है। और ‘ASDD’ में ‘S’ का क्या मतलब है? इसका मतलब है ‘Shifted’ यानी हमेशा के लिए कहीं और चले जाना।
भारत में अब तक 12 बार SIR किया गया- पात्रा
उन्होंने कहा कि कुल मिलाकर, भारत में 12 बार SIR किया गया है, जिनमें से 10 बार कांग्रेस पार्टी के कार्यकाल के दौरान हुआ था। ASDD श्रेणी में ‘D’ का मतलब ‘डेथ’ (मृत्यु) है, इसके तहत अब 2.8 करोड़ नाम हटा दिए गए हैं। यह प्रक्रिया मतदाता सूची को साफ-सुथरा रखने के लिए की जाती है। आप ही बताइए, क्या ये नाम बहुत पहले ही नहीं हटा दिए जाने चाहिए थे?
बंगाल में, ‘घोस्ट वोटिंग’ के लिए अनगिनत मृत लोगों के नामों का इस्तेमाल किया जा रहा था। ममता बनर्जी के पास इसका पूरा हिसाब था, उन्हें ठीक-ठीक पता था कि किसी खास इलाके, मोहल्ले या कॉलोनी में कितने लोगों की मौत हुई है। इसके लिए बाकायदा लिस्ट तैयार की जाती थी और चुनाव के दिन TMC कार्यकर्ता जाकर ये ‘फर्जी वोट’ डाल देते थे।
SIR के जरिए फर्जी वोटिंग नहीं हो पाई- पात्रा
इस बार, SIR के जरिए ऐसी फर्जी वोटिंग नहीं हो पाई, क्योंकि मृत लोगों के नाम हटा दिए गए थे। इसीलिए आज जो हताशा देखने को मिल रही है, वह एक स्वाभाविक नतीजा है। मैंने इन 13 करोड़ लोगों का पूरा ब्योरा दिया है। जो लोग स्थायी रूप से कहीं और चले गए हैं, उनमें से 6 करोड़ लोगों ने पहले ही आवेदन करके फिर से रजिस्ट्रेशन करा लिया है, जबकि बाकी लोग ‘फॉर्म 6’ भरकर ऐसा करने की प्रक्रिया में हैं।
यहां तक कि जिन्हें ‘अनुपस्थित’ के रूप में चिह्नित किया गया है, वे भी फिर से रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। फिर भी, कुछ लोग फॉर्म नहीं भर रहे हैं। जबकि उन्हें पूरी प्रक्रिया पता है और उनके घरों तक फॉर्म पहुंचाए भी गए हैं, फिर भी वे उन्हें नहीं भरते। यहां तक कि उन्हें भेजे गए नोटिस को भी वे अनदेखा कर देते हैं। कोई पूछ सकता है कि ऐसा क्यों? असल में, ये घुसपैठिए हैं।



