विश्वास और गौरव से भरा आत्मनिर्भर भारत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष उनकी उस वैचारिक यात्रा को देखने का अवसर है, जिसमें एक कुशल संगठनकत्र्ता के रूप में पहले गुजरात, फिर राष्ट्रीय स्तर पर संगठन में नई कार्यशैली के प्रयोग किए। उनकी नेतृत्व क्षमता का परिचय पिछले दिनों नई दिल्ली में संपन्न हुए ब्रिक्स समिट में भी देखने को मिला। पश्चिम एशिया में संघर्षरत शक्तियों को एक ही टेबल पर लाकर तथा भारत की चिंताओं और सांझे विकास की अवधारणा को शामिल करते हुए एक सांझा घोषणा पत्र जारी किया गया। यदि हम इतिहास के झरोखे में झांक कर देखें, तो स्वतंत्रता के बाद आपातकाल के विरुद्ध उपजा समग्र क्रांति आंदोलन, कश्मीर का ऐतिहासिक सत्याग्रह और राम जन्मभूमि आंदोलन, ये भारतीय इतिहास के राजनीतिक परिवर्तनों के साक्षी रहे हैं। परंतु, वर्ष 2014 का लोकसभा चुनाव वह ऐतिहासिक मोड़ था, जब देश की जनता ने सीधे तौर पर अपने प्रधानमंत्री को चुना। वर्ष 2014 से लेकर आज तक प्रधानमंत्री मोदी के प्रति जन-सामान्य का यह अटूट विश्वास और निष्ठा अक्षुण्ण है।
दुनिया के राजनीतिक विश्लेषकों के लिए निश्चित ही यह विस्मयकारी है कि भारत जैसी उदार लोकतांत्रिक व्यवस्था में कोई एक व्यक्ति इतने दीर्घ कालखंड तक जन-जन के विश्वास को कैसे सुरक्षित रख सकता है। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी जन-कल्याणकारी नीतियों से इस असंभव को संभव कर दिखाया है। जनधन योजना, उज्ज्वला, अंत्योदय आवास, आयुष्मान भारत, पी.एम. किसान सम्मान निधि, कौशल विकास, मुद्रा योजना और स्टार्टअप इंडिया जैसे युगांतरकारी अभियानों ने पुरानी सरकारों की पारंपरिक और औपचारिकता मात्र की कार्यशैली को पूरी तरह बदल दिया है। इन लोक-कल्याणकारी योजनाओं और परियोजनाओं से समाज के अंतिम छोर पर खड़े आम व्यक्ति के जीवन में वास्तविक और सकारात्मक बदलाव आया है। देश के बहुलंबित वैचारिक मुद्दों के सर्वमान्य समाधान के साथ-साथ, राष्ट्र की सुरक्षा, समृद्धि और स्वाभिमान के लिए लिए गए साहसिक निर्णयों से उनके भीतर के चट्टानी आत्मविश्वास को हम महसूस कर सकते हैं। प्राचीन गौरव के साथ-साथ प्रधानमंत्री मोदी आधुनिकता के साथ भी अपडेट रहते हैं। भारत ने यू.पी.आई. के माध्यम से दुनिया को कैशलैस लेनदेन में एक नई दिशा दी है। कई देश आज भारत के यू.पी.आई. सिस्टम को अपना रहे हैं। आज भारत में डिजिटल भुगतान सामान्य जीवन का हिस्सा हो गया है।
उनके सार्वजनिक जीवन की शुरूआत संघ के प्रचारक के रूप में हो गई थी, जिस दौरान उन्होंने समाज और राष्ट्र को बारीकी से जाना और समझा तथा समाज के लिए संगठन की ताकत की आवश्यकता को समझा। भाजपा संगठन में काम करते हुए उन्होंने बूथ स्तर के कार्यकत्र्ताओं से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक संगठन को मजबूत करने पर जोर दिया। कोरोना काल में केन्द्र सरकार द्वारा देश के करोड़ों लोगों के स्वास्थ्य की सुरक्षा, वैक्सीनेशन से लेकर संगठन स्तर पर देश के सभी राज्यों में ‘सेवा ही संगठन’ अभियान इसका बड़ा उदाहरण है।गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में उनके साथ हुए संवादों में उनकी समयबद्धता और प्रत्येक विषय को पूरी एकाग्रता से सुनने की उनकी अनूठी शैली बहुत प्रभावित और उत्साहित करती थी। कालान्तर में राजनीति और जन-सामान्य के प्रति उनके इसी नि:स्वार्थ समर्पण के कारण ‘गुजरात मॉडल’ की गूंज वैश्विक पटल पर सुनाई दी। चाहे वह साबरमती रिवरफ्रंट का नव-निर्माण हो, स्टैच्यू ऑफ यूनिटी की भव्यता की बात हो, कच्छ की प्यासी धरती तक नर्मदा के जल को पहुंचाने का भागीरथी प्रयास हो या फिर भुज के विनाशकारी भूकम्प के पश्चात युद्धस्तर पर किए गए अथक राहत और पुनर्वास के कार्य, इन सभी ऐतिहासिक कार्यों ने जनमानस को उनकी अद्वितीय राजनीतिक और प्रशासनिक योग्यता को समझने का अवसर दिया।
गुजरात में विकास के लिए निवेश को आकॢषत करने के उद्देश्य से 2003 में शुरू हुआ वाइब्रैंट गुजरात बाद में एक बड़े वैश्विक निवेश मंच के रूप में विकसित हुआ। दुनियाभर के कारोबारी और निवेशक गुजरात आए और राज्य को औद्योगिक निवेश के नक्शे पर नई पहचान मिली। आज लगभग हर बड़ा राज्य इसी तरह के आयोजनों के माध्यम से निवेश आकॢषत कर रहा है। मोदी के कार्यकाल में प्रशासन को परिणाम देने वाली व्यवस्था के रूप में देखने की कोशिश शुरू हुई। मोदी जी का यही विजन केंद्र सरकार के कामकाज में भी दिखाई देता है।
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की एक और महत्वपूर्ण विशेषता विदेश नीति में दिखाई देती है। साल 2014 में प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद पड़ोसी देशों के नेताओं को शपथ ग्रहण समारोह में आमंत्रित करने से लेकर ‘नेबरहुड फस्र्ट’ तक भारत ने अपने पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को विशेष महत्व दिया। इसके साथ ही एक्ट ईस्ट, खाड़ी देशों के साथ मजबूत रिश्ते, अमरीका और यूरोप के साथ रणनीतिक सांझेदारी तथा रूस के साथ पुराने संबंधों को बनाए रखने की नीति ने भारत की विदेश नीति को एक नया व्यावहारिक स्वरूप दिया।
आज भारत किसी एक खेमे की विदेश नीति की बजाय अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर अलग-अलग देशों के साथ संबंध बनाने की स्थिति में है। इसका ताजा उदाहरण-ब्रिक्स के मंच से प्रधानमंत्री मोदी ने ग्लोबल साऊथ की आवाज को प्रमुखता से रखा। प्रधानमंत्री ने वैश्विक संस्थाओं में विकासशील देशों की अधिक भागीदारी और प्रतिनिधित्व की जरूरत पर जोर दिया। नरेंद्र मोदी को अनेक देशों ने अपने सर्वोच्च तथा महत्वपूर्ण नागरिक सम्मानों से सम्मानित किया है। श्री मोदी जी के नेतृत्व में राममंदिर निर्माण, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर और श्रीमहाकाल लोक कॉरिडोर के माध्यम से भारतीय सांस्कृतिक गौरव की पुनस्र्थापना का महत्वपूर्ण कार्य हुआ। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान लोगों के ह्रदयों में स्वाधीनता की आग को जिंदा रखने वाले राष्ट्रगीत वंदेमातरम् को संपूर्णता देने का ऐतिहासिक कार्य नरेंद्र मोदी ने किया है।
इस यात्रा की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि आज भारत अपने भविष्य को लेकर पहले से अधिक आत्मविश्वास के साथ बात करता है। दुनिया भी भारत को केवल एक बड़े बाजार के रूप में नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण वैश्विक शक्ति और समाधान देने वाले देश के रूप में देख रही है।-डा. सतीश पूनिया




