शाहरुख खान पर फतवे के बाद बीसीसीआई फैसला, केकेआर से मुस्तफिजुर रहमान को हटाया

बीसीसीआई ने शाहरुख खान की कप्तानी वाली कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए बांग्लादेशी तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान को टीम से हटाने का निर्देश जारी किया है। यह फैसला IPL 2026 नीलामी में केकेआर द्वारा मुस्तफिजुर को 9.2 करोड़ रुपये में खरीदने के विवादास्पद निर्णय के बाद आया है, जिसने देशभर में तीखी बहस छेड़ दी थी। उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ से स्वघोषित शाही मुख्य मुफ्ती मौलाना चौधरी इफराहीम हुसैन ने शाहरुख के खिलाफ फतवा जारी कर उन्हें इस्लामी सिद्धांतों का उल्लंघन करने का दोषी ठहराया था। मौलाना ने तर्क दिया कि बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर कट्टरपंथी ताकतों के अत्याचारों के बीच मुस्लिम होने के नाते शाहरुख को देशभक्ति और इंसानियत का ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने माफी मांगने और डील रद्द करने की मांग की, क्योंकि भारत में कई प्रतिभाशाली तेज गेंदबाज उपलब्ध हैं।इससे पहले हिंदू संगठनों और साधु-संतों ने भी शाहरुख की आलोचना की थी। स्वामी रामभद्राचार्य ने उन्हें ‘बिना चरित्र वाला’ कह डाला, जबकि दिनेश फलाहारी महाराज ने संपत्ति जब्त करने की बात कही। विवाद जनवरी 2026 की शुरुआत में भड़का जब केकेआर ने मुस्तफिजुर को मेगा ऑक्शन में सबसे महंगे विदेशी खिलाड़ियों में शामिल किया। बीसीसीआई सचिव देवोजित सैकिया ने स्पष्ट किया कि केकेआर को रिप्लेसमेंट खिलाड़ी उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि टीम का संतुलन बना रहे। यह निर्देश भावनाओं को ठेस न पहुंचे, इसलिए लिया गया है। शाहरुख की टीम में जूही चावला और जय मेहता भी साझेदार हैं, लेकिन फतवा मुख्य रूप से शाहरुख पर केंद्रित रहा। पुराने विवादों की यादें ताजा हो गईं, जैसे 2009 में इस्लामी मदरसे का फतवा। बीसीसीआई का यह कदम IPL की छवि को साफ करने और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। विवाद के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई, जहां शाहरुख के प्रशंसक इसे अन्याय बता रहे हैं, वहीं आलोचक इसे सही ठहरा रहे हैं। यह घटना क्रिकेट, राजनीति और धार्मिक भावनाओं के जटिल मेल को उजागर करती है।




