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शैक्षिक सशक्तिकरण : पहुंच और अवसरों के विस्तार के 12 वर्ष

सामाजिक सशक्तिकरण के लिए शिक्षा बेहद महत्वपूर्ण है। सामाजिक और आॢथक रूप से वंचित समुदायों के छात्रों के लिए वित्तीय सहायता उनकी स्कूली शिक्षा जारी रखने, उच्च शिक्षा के लिए अवसर मुहैया कराने और अनुसंधान तथा पेशेवर करियर में उनकी आकांक्षाओं को पूरा करने में मददगार साबित हो सकती है। वित्तीय वर्ष 2014-15 से 2025-26 के बीच, सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग ने छात्रवृत्तियों, कोचिंग सहायता, विदेशों में शिक्षा के लिए सहयोग और शोध फैलोशिप के जरिए इन उद्देश्यों को पूरा करने का प्रयास किया है।

विभाग का दृष्टिकोण वित्तीय बाधाओं को कम करने और शिक्षा के निरंतर विस्तार को मजबूत करने पर आधारित है। इसके प्रयासों का उद्देश्य अनुसूचित जातियों (एस.सी.), अन्य पिछड़ा वर्गों (ओ.बी.सी.), आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों (ई.बी.सी.) तथा डीनोटिफाई, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू जनजातियों (डी.एन.टी.) के लिए अवसरों तक पहुंच को बेहतर बनाना है। इसके अलावा वित्तीय सहायता के साथ-साथ, छात्रवृत्ति प्रशासन में किए गए सुधारों के तहत पारदर्शिता, लाभार्थियों के सत्यापन और सहायता के सीधे वितरण पर भी खासा जोर दिया गया है।

स्कूली वर्षों से ही शिक्षा पर जोर : अनुसूचित जातियों व अन्य वर्गों के लिए प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना शुरुआती स्तर पर शिक्षा में मददगार साबित होती है। केंद्र प्रायोजित इस योजना का उद्देश्य साक्षरता को बढ़ावा देना, स्कूल छोडऩे की दर को कम करना और अनुसूचित जाति के बच्चों तथा ऐसे बच्चों की स्कूली शिक्षा को निरंतर बनाए रखना है, जिनके माता-पिता या अभिभावक अस्वच्छ और खतरनाक व्यवसायों में लगे हुए हैं।

वित्त वर्ष 2014-15 से 2025-26 के दौरान, इस योजना के तहत 4,893 करोड़ रुपए की केंद्रीय सहायता जारी की गई, जिससे इस पूरी अवधि में लगभग 3 करोड़ लोगों को लाभ मिला। केवल वित्त वर्ष 2025-26 में ही 562 करोड़ रुपए जारी किए गए, जिससे लगभग 27 लाख छात्रों को लाभ मिला। पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के माध्यम से अनुसूचित जाति के छात्रों को स्कूली शिक्षा के बाद भी सहायता दी जाती है। इस प्रमुख योजना का उद्देश्य उच्च शिक्षा तक पहुंच बढ़ाना, छात्रों को पढ़ाई जारी रखने में मदद करना और उच्च शिक्षा में एस.सी. छात्रों की भागीदारी को बढ़ाना है। वित्त वर्ष 2014-15 से 2025-26 के दौरान, इस योजना के तहत 46,581 करोड़ रुपए की केंद्रीय सहायता दी गई, जिससे लगभग 6.13 करोड़ छात्रों को लाभ मिला। वित्त वर्ष 2025-26 में, इस योजना ने 47.53 लाख छात्रों को सहायता प्रदान की।

डिजिटल सुधारों के जरिए पारदर्शिता को मजबूत करना : छात्रवृत्ति वितरण में एक बड़ा बदलाव तब आया, जब वित्त वर्ष 2021-22 से प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डी.बी.टी.) प्रणाली लागू की गई। इस व्यवस्था के तहत, छात्रवृत्ति की राशि सीधे लाभाॢथयों के आधार लिंक्ड बैंक खातों में भेजी जाती है। इस सुधार का मकसद जवाबदेही बढ़ाना, देरी और धन के दुरुपयोग को कम करना तथा छात्रों तक सहायता पहुंचाने की प्रक्रिया को बेहतर बनाना है। डिजिटल सत्यापन इस ढांचे का एक और महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। डी-डुप्लीकेशन प्रक्रियाएं फर्जी या डुप्लीकेट लाभाॢथयों की पहचान करने में मदद करती हैं, जबकि बायोमैट्रिक प्रमाणीकरण और इलैक्ट्रॉनिक ‘नो योर कस्टमर’ सत्यापन पहचान की जांच को और मजबूत बनाते हैं। डिजीलॉकर और ए.पी.आई. सेतु के साथ एकीकरण, प्रमाणपत्रों और दस्तावेजों के डिजिटल सत्यापन में सहायता करता है।

वन-टाइम रजिस्ट्रेशन यानी एक बार पंजीकरण की सुविधा से विभिन्न योजनाओं और शैक्षणिक वर्षों के दौरान लाभाॢथयों को ट्रैक करना संभव हो जाता है। शैक्षिक डाटाबेस के साथ जुड़ाव से संस्थानों और छात्रों के रिकॉर्ड की पुष्टि करने में मदद मिलती है, जबकि यू.आई.डी.ए.आई., एन.पी.सी.आई. और सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (पी.एफ.एम.एस.) के साथ जुड़ाव भुगतान प्रक्रिया को सरल बनाता है। ये सभी उपाय मिलकर उन प्रशासनिक प्रणालियों को मजबूत करते हैं, जिनके जरिए पात्र छात्रों तक छात्रवृत्ति सहायता पहुंचती है।

उच्च शिक्षा और शोध के लिए नए मार्ग : प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक सहायता के अलावा, स्कॉलरशिप्स फॉर हायर एजुकेशन फॉर यंग अचीवर्स या श्रेयस योजना, कोचिंग, प्रतिष्ठित संस्थानों, विदेश में पढ़ाई और अनुसंधान के अवसरों तक पहुंच सुनिश्चित करने में मदद करती है। एस.सी. और ओ.बी.सी. छात्रों के लिए मुफ्त कोचिंग योजना, प्रतियोगी और पेशेवर परीक्षाओं की तैयारी कर रहे आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को अच्छी कोचिंग के लिए वित्तीय मदद प्रदान करती है। वित्त वर्ष 2025-26 में, 9.87 करोड़ रुपए खर्च करके 854 लाभार्थियों की मदद की गई। दरअसल इस सहायता का मकसद उन आॢथक बाधाओं को कम करना है, जिनका सामना छात्र शैक्षणिक और पेशेवर अवसरों की तैयारी के दौरान करते हैं।

एस.सी. छात्रों के लिए टॉप क्लास एजुकेशन स्कीम देश भर के प्रमुख संस्थानों में पढ़ाई कर रहे मेधावी छात्रों को मदद करती है। इस योजना के तहत खर्च वित्त वर्ष 2014-15 के 19 करोड़ रुपए से लगभग 6 गुना बढ़कर, वित्त वर्ष 2025-26 में 117 करोड़ रुपए हो गया। इसी अवधि के दौरान, सालाना लाभाॢथयों की संख्या 1,568 से बढ़कर 4,742 हो गई, जो उच्च गुणवत्ता वाली उच्च शिक्षा तक पहुंच के लिए बढ़ते प्रयासों-बी.एल. वर्मा (केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री)

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