राष्ट्रीय

सेमीकंडक्टर, क्रिटिकल मिनरल्स, ग्रीन हाइड्रोजन… भारत और जर्मनी के बीच इन मुद्दों पर हुआ करार

प्रधानमंत्री मोदी और जर्मन चांसलर के बीच अहमदाबाद में हुई वार्ता ने भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी को नई गति दी। दोनों नेताओं ने रक्षा, आर्थिक सहयोग, सेमीकंडक्टर, क्रिटिकल मिनरल्स, ग्रीन हाइड्रोजन और हिंद-प्रशांत सुरक्षा पर सहमति जताई। 20 संयुक्त घोषणाओं और 7 सहमति पत्रों पर हस्ताक्षर हुए, जो वैश्विक चुनौतियों के बीच आपसी विश्वास और साझेदारी को मजबूत करते हैं।

  1. भारत-जर्मनी ने रक्षा, सेमीकंडक्टर, ग्रीन हाइड्रोजन सहयोग पर सहमति जताई।
  2. 20 संयुक्त घोषणाएं और 7 सहमति पत्र पर हस्ताक्षर हुए।
  3. हिंद-प्रशांत सुरक्षा और आर्थिक संबंधों को नई गति मिलेगी।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के बीच अहमदाबाद में हुई द्विपक्षीय शिखर वार्ता ने भारत और यूरोपीय संघ की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था जर्मनी के बीच रणनीतिक साझेदारी को नई गति प्रदान की है। दोनों नेता नई वैश्विक व्यवस्था में एक-दूसरे को पूरक साझेदार के रूप में देखते हुए रक्षा, आर्थिक सहयोग, सेमीकंडक्टर, क्रिटिकल मिनरल्स, ग्रीन हाइड्रोजन और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने पर सहमत हुए।

पिछले साल सत्ता संभालने के बाद एशिया में अपने दौरे के लिए सबसे पहले भारत का चयन कर मर्ज ने भारत के साथ संबंधों को लेकर महत्वपूर्ण संकेत दिया है। इसी तरह से पीएम मोदी ने अपने गृह नगर में जर्मन चांसलर का स्वागत कर और द्विपक्षीय संबंधों के दीर्घकालिक एजेंडे पर हस्ताक्षर कर भारत की रूचि भी साफ कर दी। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय सहयोग पर 20 संयुक्त घोषणाओं और सात सहमति पत्रों पर हस्ताक्षर किए, जो वैश्विक चुनौतियों के बीच आपसी विश्वास और साझेदारी की मजबूती को दर्शाते हैं।

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग को प्रगाढ़ करने पर जोर

वार्ता में रक्षा और कारोबार में आपसी सहयोग बढ़ाने के अलावा यूक्रेन, ईरान, वेनेजुएला जैसे ज्वलंत वैश्विक मुद्दों पर चर्चा हुई। दोनों देशों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग को प्रगाढ़ करने पर जोर दिया, जो चीन की बढ़ती आक्रामकता के संदर्भ में रणनीतिक महत्व रखता है। मोदी और मर्ज ने इस महीने भारत-ईयू फोरम में मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) की संभावना जताई, जो दोनों पक्षों के आर्थिक संबंधों को और मजबूत कर सकता है।

प्रमुख घोषणाओं में रक्षा औद्योगिक सहयोग को मजबूत करने के लिए नया रोडमैप तैयार करना शामिल है, जो संयुक्त विकास, उत्पादन पर केंद्रित होगा। आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए दोनों देशों के बीच सीईओ फोरम गठित किया जाएगा। सेमीकंडक्टर और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग स्थापित होगा, जो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं की मजबूती सुनिश्चित करेगा। गैस, ग्रीन हाइड्रोजन और बायोइकोनमी क्षेत्र में अलग-अलग संयुक्त घोषणाएं की गई हैं, जो जलवायु परिवर्तन से निपटने में दोनों देशों की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती हैं।

पीएम बोले- गेम-चेंजर साबित होगा

इसके अलावा, जर्मनी भारतीय पासपोर्ट धारकों को वीजा-फ्री ट्रांजिट सुविधा प्रदान करेगा, जो लोगों के बीच संपर्क को आसान बनाएगा। कूटनीति और रक्षा क्षेत्र में गहरे संबंधों के लिए 1.5 ट्रैक वार्ता शुरू होगी, जबकि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग के लिए व्यवस्थित द्विपक्षीय वार्ता का आरंभ होगा। ये कदम न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करेंगे, बल्कि वैश्विक स्थिरता में योगदान देंगे।

मर्ज के सात संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस में पीएम मोदी ने कहा कि, “हम पर्यावरण, ऊर्जा, शहरी विकास जैसे क्षेत्रों में मिलकर नई परियोजनाओं को आगे बढ़ा रहे हैं। ग्रीन हाइड्रोजन में दोनों देशों की कंपनियों का नया मेगा प्रोजेक्ट भविष्य की ऊर्जा के लिए एक गेम-चेंजर साबित होगा। हम एक सुरक्षित, विश्वसनीय सप्लाई चेन के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। इन सभी विषयों पर आज किए जा रहे समझौतों से हमारे सहयोग को नई गति और मजबूती मिलेगी।”

वैश्विक व्यवस्था पर जोर

जर्मनी के चांसलर मर्ज ने भी वैश्विक व्यवस्था पर जोर देते हुए कहा, “हम एक ऐसी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के प्रति प्रतिबद्ध हैं जिसमें हम स्वतंत्र और सुरक्षित रूप से जी सकें। यह व्यवस्था तेजी से शक्ति राजनीति और पुरानी सोच के तरीकों से कमजोर हो रही है। रूस का यूक्रेन के खिलाफ युद्ध इस विकास का एक स्पष्ट उदाहरण है। इसी कारण से हम अपनी सुरक्षा नीति सहयोग को और गहरा करना चाहते हैं। इसमें ¨हद-प्रशांत क्षेत्र में संयुक्त वायु सेना और नौसेना अभ्यास, सैन्य बंदरगाह यात्राएं, और नए परामर्श प्रारूप शामिल हैं। हमारी रक्षा उद्योगों के बीच निकट सहयोग पर हमारा विशेष ध्यान है ताकि संयुक्त विकास, उत्पादन व वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को बढ़ावा दिया जा सके।”

यह शिखर वार्ता ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था अनिश्चितताओं से जूझ रही है। इस महीने के अंत में भारत-ईयू सम्मेलन में एफटीए पर सहमति बनने के बाद जर्मनी के साथ भारत के कारोबारी संबंध और प्रगाढ़ होंगे। भारत बहुवादी वैश्विक व्यवस्था में यूरोपीय संघ को भी एक शक्ति के तौर पर देख रहा है और इनके देशों के साथ समग्र तौर पर व अलग-अलग संबंध मजबूत कर रहा है। इसमें जर्मनी व फ्रांस सबसे प्रमुख हैं। फ्रांस के राष्ट्रपति इमानुएल मैक्रा भी अगले महीने भारत आ रहे हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button