संपादकीय

अच्छा हुआ धनखड़ प्रकट हो गए!

उपराष्ट्रपति पद से अचानक इस्तीफा देने के बाद कुछ समय के लिए अज्ञातवास में चले गए जगदीप धनखड़ पिछले सप्ताह अचानक प्रकट हो गए। वे न सिर्फ प्रकट हुए, बल्कि उन्होंने अपने इस्तीफे के कारण को लेकर भी एक बड़ा खुलासा किया। राजस्थान के चूरू में एक कार्यक्रम में कई लोग धनखड़ को ‘खुशमिजाज’ देखकर हैरान रह गए। इसलिए पिछले छह-सात महीनों से धनखड़ को लेकर जो चिंताएं थीं, वे शायद दूर हो गई होंगी। फिर, अपने स्वभाव के अनुरूप, धनखड़ ने सनसनीखेज खुलासा करते हुए कहा, ‘मैंने बीमारी के कारण उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा नहीं दिया।’ धनखड़ का यह खुलासा एक तरह से धमाका है। धनखड़ ने अब जो स्पष्टीकरण दिया है, वह कई लोगों को भ्रमित करने वाला है। उपराष्ट्रपति रहे धनखड़ ने २५ जुलाई, २०२५ को अचानक इस्तीफा दे दिया था। उप राष्ट्रपति ने अपना इस्तीफा पत्र स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा देने का हवाला देते हुए प्रस्तुत किया था, लेकिन अब उनके द्वारा किए गए खुलासे से अलग ही अर्थ निकलते हैं। धनखड़ ने अपना इस्तीफा पत्र स्वयं नहीं लिखा था। क्या जनता यह सोचे कि स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा देने वाला पत्र गृह मंत्री या प्रधानमंत्री के संसद कक्ष में तैयार किया गया था और उप राष्ट्रपति धनखड़ के हस्ताक्षर जबरदस्ती लिए गए थे? फिर छह महीने बाद, उपराष्ट्रपति पद पर आसीन यह व्यक्ति गायब हो गया। जगदीप धनखड़ कहां हैं? उनके साथ क्या हुआ? कई लोगों ने ये सवाल पूछे। अब छह महीने बाद धनखड़ सामने आए हैं और अपने इस्तीफे पत्र में स्वास्थ्य संबंधी समस्या का खंडन किया है। कोई भी यह नहीं मानेगा कि धनखड़ ने स्वेच्छा से इस्तीफा दिया है। इस्तीफा देने के बाद धनखड़ अज्ञातवास में चले गए। ऐसा लगता है जैसे उनका ‘मुंह’ सिलकर मानो उन्हें
अज्ञातवास में धकेल दिया
था। धनखड़ क्या करते हैं? कहां रहते हैं इस बारे में ६ महीने तक किसी को भी जानकारी नहीं थी। उपराष्ट्रपति को सेवानिवृत्ति के बाद नई दिल्ली में स्थायी आवास दिया जाता है। धनखड़ को अभी तक घर नहीं मिला है। धनखड़ इस्तीफे के सदमे से उबरते हुए अब अज्ञातवास से निकलकर चलने-फिरने और बोलने लगे हैं। धनखड़ को बोलने का बहुत शौक था, इसलिए शिकायत थी कि राज्यसभा में अपने भाषणों से वो सांसदों का काफी समय बर्बाद कर रहे थे। उनके भाषणों में मुख्य रूप से प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा सरकार की प्रशंसा होती थी। उनके मन में यही बात रही होगी कि वो हमेशा संवैधानिक पद पर बने रहें। लेकिन एक दिन सरकारी फरमान निकला। धनखड़ को रातों-रात हमेशा के लिए घर लौटना पड़ा। जिस दिन उन्होंने इस्तीफा दिया, राज्यसभा में उनकी सेहत बढ़िया थी। हालांकि, सरकार ने पैâसला किया कि हमारे उपराष्ट्रपति की सेहत ठीक नहीं है और उन्हें ‘मौन’ स्वीकार कर आराम करना चाहिए। इसी के अनुसार, सरकार ने उन्हें अनिवार्य विश्राम पर भेज दिया। उन्हें यह विश्राम पसंद नहीं आया और वो घर छोड़कर चले गए। यह बात धनखड़ द्वारा हाल ही में राजस्थान के चूरू में दिए गए भाषण से स्पष्ट होती है। राजस्थान में अपने भाषण में धनखड़ कहते हैं, ‘कहा जाता है कि निरोगी शरीर आनंद का पहला स्रोत है। मैंने कभी अपने स्वास्थ्य की उपेक्षा नहीं की। मैंने इस्तीफा देते समय कभी यह नहीं कहा कि मैं बीमार हूं।’ इस तरह पूर्व उपराष्ट्रपति ने अपने इस्तीफे के पीछे का रहस्य सार्वजनिक कर दिया। लेकिन,यहीं नहीं रुकते हुए, श्री धनखड़ को उस दिन पर्दे के पीछे और संसद कक्ष में जो कुछ हुआ उस पर भी प्रकाश डालना चाहिए। देश में संवैधानिक पदों का सम्मान नहीं करना, अपने मनमाफिक लोगों को संवैधानिक पदों पर नियुक्त करना और अगर किसी ने ‘कठोर’ रवैया दिखाया, तो उसे उठाकर बाहर फेंक देना। पिछले
दस वर्षों से
यह भारतीय लोकतंत्र में जारी है। देश के मंत्रिमंडल में कई लोग अस्वस्थ हैं, कई लोगों का मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ गया है। इसके बावजूद इनमें से कई मंडली सरकार में हैं। केजरीवाल और उनके लोगों को गैरकानूनी तरीके से गिरफ्तार करने वाली ‘सीबीआई’ जैसी संस्थाओं की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है, जैसा कि अदालत के पैâसले से स्पष्ट है। लेकिन फिर भी, सीबीआई को कोई सीख मिलती नहीं दिख रही है। केंद्रीय मंत्री पुरी का नाम ‘एपस्टीन फाइल्स’ में आया, लेकिन सरकार ने उनके इस्तीफे के बाद भी उन्हें घर नहीं भेजा है। वहीं मोदी-शाह ने उपराष्ट्रपति धनखड़ को रातोंरात घर भेजने का कार्यक्रम बनाया। पुलवामा और पहलगाम हमलों के बाद प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के पास भी अपने पदों पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं था, लेकिन वे अभी भी अपने पदों पर हैं। हर कोई तरह-तरह के हथकंडे अपनाकर अपने-अपने पदों से चिपके हुए है, लेकिन उपराष्ट्रपति पद के लिए धनखड़ की दावेदारी बीच में ही खत्म कर दी गई और उन्हें अज्ञातवास में भेज दिया गया। सरकार ने इसके लिए स्वास्थ्य का बहाना दिया था। लेकिन धनखड़ ने खुद इस बहाने को खारिज कर दिया है। जगदीप धनखड़ ने सरकार विरोधी राजनीतिक दलों से अच्छे संबंध स्थापित किए थे और उन निजी बैठकों में कुछ विस्फोटक विचार-विमर्श हुए थे। इसकी खबर मोदी-शाह तक पहुंच गई। इसके बाद, मोदी-शाह ने पैâसला किया कि उनके उपराष्ट्रपति का स्वास्थ्य ठीक नहीं है, उन्हें इलाज और आराम की जरूरत है। तदनुसार, धनखड़ के स्वास्थ्य के संबंध में एक मेडिकल सर्टिफिकेट तैयार किया गया और इस्तीफे के पत्र के साथ संलग्न किया गया और धनखड़ आगे के इलाज के लिए अगले छह महीनों तक अज्ञातवास में चले गए। अब वे स्व-चिकित्सा से ठीक हो गए हैं और प्रगट हो गए हैं। यह अच्छा हुआ कि धनखड़ प्रकट हो गए। अब उन्हें अपने स्वास्थ्य और पिछले छह महीनों में हुए उपचार के बारे में देश को बताना ही चाहिए!

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