महिलाएं अब रेलवे के इंजन पर से धरती के नीचे खदानों में और शॉप फ्लोर पर भी काम कर रहीं!

International Women’s Day 2026: आज, 8 मार्च 2026, को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। यह दिवस महिलाओं के अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में बढ़ती भागीदारी, सम्मान और प्रशंसा प्रकट करने का भी माध्यम है। आमतौर पर महिलाओं को आगे बढ़ाने का मतलब स्कूल, स्वास्थ्य क्षेत्र या शहरी दफ्तरों में उनकी संख्या बढ़ाना माना जाता है। लेकिन आज की तारीख में महिलाएं झारखंड, छत्तीसगढ़ और ओडिशा के जंगलों में स्थित खदानों में भी काम कर रही हैं। वे रेलवे की इंजन चला रही हैं और शॉप फ्लोर पर भी पुरुषों के साथ कंधा से कंधा मिला कर काम कर रही हैं।
Women’s Day Special: स्कूल, अस्पताल या शहरों के किसी दफ्तर में महिला कार्यबल को बढ़ाना आसान कार्य है। लेकिन बात जब खदानों और भारी उद्योग के शॉप फ्लोर पर महिलाओं के काम करने की होती है तो लोग बगलें झांकने लगते हैं। लेकिन अब देश के कुछ इंडस्ट्रियल हाउसेज इन दुरूह क्षेत्रों में भी महिलाओं की भागीदारी बढ़ा रहे हैं। उदाहरण के लिए वेदांता ग्रुप (Vedanta Group) को ही लीजिए। इस पूरे ग्रप में जितने कर्मचारी काम करते हैं, उनमें 23% महिलाएं हैं।
पहले महिलाओं को आगे बढ़ाने का मतलब स्कूल, बैंक, अस्पताल या शहरी दफ्तरों में महिलाओं की संख्या बढ़ाना माना जाता था। आज सही मायने में महिलाएं अर्थव्यवस्था के हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। वे खदानों में काम कर रही हैं। रेलवे का इंजन चला रही हैं। वे इजीनियरिंग, भू-विज्ञान, मेटलर्जी और हैवी इंडस्ट्री के प्लांट संचालन में भी भागीदारी निभा रही हैं। कहने का अर्थ यह है कि अर्थव्यवस्था का कोई सेक्टर ऐसा नहीं बचा जहां महिलाओं की उपस्थिति नहीं हो।
बिहार में पटना के उद्यमी हैं अनिल अग्रवाल। इनकी अगुवाई में वेदांता ग्रुप (Vedanta Group) कई सेक्टर में काम कर रहा है। आज इस ग्रुप में कुल कर्मचारियों में 23% महिलाएं हैं। यही नहीं, कंपनी ने लक्ष्य तय किया है कि साल 2030 तक वह कुल कर्मचारियों में महिलाओं की संख्या बढ़ा कर 30 फीसदी करेगी। जबकि पूरे संगठन में 35% महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करना है।
पहली बार महिलाएं चला रही हैं पॉटलाइन
वेदांता एल्युमिनियम ने महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए कई ऐसे कदम उठाए हैं जो इस क्षेत्र में पहली बार हुए हैं। इसका ओडिशा के झारसुगुडा में दुनिया का सबसे बड़ा एल्युमिनियम स्मेल्टर प्लांट है। इसमें कंपनी ने भारत की पहली पूरी तरह महिलाओं द्वारा संचालित पॉटलाइन शुरू किया है, जहां 100 से अधिक महिलाएं स्मेल्टिंग और उत्पादन से जुड़े अहम काम कर रही हैं। महिलाएं प्लांट के लॉजिस्टिक्स से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों में भी योगदान दे रही हैं। कंपनी ने वेदांता ग्रुप की पहली ऑल-वुमन लोकोमोटिव इंजन टीम भी तैनात की है, जिसमें सात पेशेवर महिलाएं शामिल हैं।
अंडरग्राउंड माइनिंग में भी महिलाएं
दुनिया की सबसे बड़ी एकीकृत जिंक बनाने वाली कंपनी है हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड (HZL)। यह चांदी उत्पादन करने वाली दुनिया की प्रमुख कंपनी है। इसने भारत के मेटल और माइनिंग सेक्टर में एक नया मानक स्थापित किया है। इसके यहां करीब 26.3% कर्मचारी महिला हैं। फिलहाल कंपनी के संचालन में 745 से अधिक महिलाएं काम कर रही हैं, जिनमें से 314 से ज्यादा महिलाएं इंजीनियरिंग, भूविज्ञान, धातुकर्म और प्लांट ऑपरेशन जैसी तकनीकी भूमिकाओं में हैं।
हर स्तर पर, हर नेतृत्व में
HZL का सिंदेसर खुर्द खदान (SKM) दुनिया की सबसे अधिक मशीनीकृत भूमिगत खदानों में से एक है। वहां वर्षा शर्मा हैवी अर्थ मूविंग मशीनरी इंजीनियर के रूप में नेतृत्व करती हैं। उनका कार्य अत्याधुनिक मशीनों के निरंतर ऑपरेशन को सुनिश्चित करना और उत्पादन को बनाए रखना है। वह कहती हैं “जब विद्यार्थी यहां आते हैं और महिलाओं को संचालन का नेतृत्व करते हुए देखते हैं, तो उनकी कल्पनाशक्ति का दायरा बढ़ता है।” वहीं अन्य इकाइयों में, कविता मीणा उच्च क्षमता वाली पेस्टफिल संयंत्रों के रखरखाव का नेतृत्व करती हैं।
तेल के कुएं में भी महिलाओं की तैनाती
राजस्थान में तेल के कुएं खोजने वाली और उसे ऑपरेट करने वाली एक कंपनी है केयर्न ऑयल एंड गैस। इसके मंगला प्रोसेसिंग टर्मिनल में महिलाएं साल 2019 से ही नाइट शिफ्ट में काम कर रही हैं। तेल के कुओं का ऑपरेशन बेहद जटिल होता है और वहां 24/7 हाइड्रोकार्बन प्रोसेसिंग सिस्टम चलता रहता है। इसे भी महिलाएं खूब अच्छी तरह से संभाल रही हैं। देखा जाए तो केयर्न ऑयल एंड गैस ने दुर्गा वाहिनी की भी शुरुआत की है। यह अपने तरह की पहली, पूरी तरह महिलाओं की सुरक्षा टीम है। इस टीम में ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं की भर्ती की जाती है। ये महिलाएं क्विक रिस्पॉन्स टीम के रूप में 38 ऑयल-क्षेत्र की सुरक्षा कर रही हैं।




