बेखौफ रेत माफिया, रेड मारने गई फॉरेस्ट टीम को बंधक बनाकर पीटा, रसूख के दम पर छुड़ा ले गए ट्रैक्टर

सीधी: मध्यप्रदेश के सीधी जिले से कानून-व्यवस्था को ठेंगा दिखाने वाली एक सनसनीखेज वारदात सामने आई है। सिहावल स्थित सोन घड़ियाल अभयारण्य में अवैध रेत उत्खनन रोकने गई वन विभाग की टीम पर माफिया ने जानलेवा हमला कर दिया। बेखौफ आरोपियों ने न केवल टीम को बंधक बनाया, बल्कि उनके साथ मारपीट कर जब्त किए गए ट्रैक्टर भी जबरन छुड़ा ले गए। यह पूरी वारदात बुधवार और गुरुवार की दरमियानी रात की है।
आधी रात को बिछाया गया था जाल
सोन नदी के खुटेली घाट पर अवैध रेत निकालने की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम ने घेराबंदी की थी। रात करीब 12 बजे जब टीम मौके पर पहुंची, तो वहां कई ट्रैक्टर अवैध उत्खनन में लगे थे। वनकर्मियों ने जब उन्हें रोकने की कोशिश की, तो पहले अपराधी वहां से भाग निकले। लेकिन कुछ ही मिनटों में माफिया के गुर्गे बड़ी संख्या में हथियारों और लाठियों के साथ वापस लौटे और पूरी टीम को घेर लिया।
मोबाइल छीनकर बंधक बनाया
वन विभाग के अमले में कुल 7 सदस्य थे, जिनमें 3 स्थाई कर्मचारी और 4 दैनिक वेतनभोगी शामिल थे। माफिया ने इन सभी को करीब 3 घंटे तक बंधक बनाए रखा। इस दौरान उनके मोबाइल फोन छीन लिए गए ताकि वे मुख्यालय या पुलिस को मदद के लिए फोन न कर सकें। मारपीट के बाद माफिया ने वन विभाग के कब्जे से अपने ट्रैक्टरों को छुड़ाया और फरार हो गए।
क्यों बेलगाम है रेत माफिया?
सोन घड़ियाल अभयारण्य जैसे सेंसिटिव जोन में माफिया की पैठ बताती है कि जमीनी स्तर पर निगरानी तंत्र कमजोर है। रेत का अवैध कारोबार केवल आर्थिक नुकसान नहीं है, बल्कि यह सोन नदी के पारिस्थितिकी तंत्र के लिए भी घातक है। स्थानीय रसूखदारों का संरक्षण इन अपराधियों को सरकारी तंत्र से लड़ने की हिम्मत देता है। स्थानीय लोगों का मानना है कि जब तक माफिया के आर्थिक नेटवर्क पर चोट नहीं होगी, तब तक मैदानी अमला असुरक्षित बना रहेगा।




