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अब भारत में बढ़ी महंगाई की चुनौती

उम्मीद करें कि सरकार अमरीका-ईरान टकराव के बीच महंगाई नियंत्रण के लिए और अधिक रणनीतिक कदमों के साथ आगे बढ़ेगी। कच्चे तेल के लिए रूस और वेनेजुएला से आपूर्ति का रुख और बढ़ाया जाएगा। सरकार के द्वारा खाद्य तेल के आयात शुल्क में कमी सहित उवर्रकों की उपयुक्त आपूर्ति के लिए दृढ़तापूर्वक आगे बढ़ा जाएगा। रिजर्व बैंक के द्वारा आवश्यक होने पर मौद्रिक नीति सख्त करते हुए वर्तमान 5.25 प्रतिशत की नीतिगत ब्याज दर (रेपो रेट) को बढ़ाया जाएगा…

यकीनन इस समय पश्चिमी एशिया में संघर्ष का असर भारत में महंगाई बढऩे के रूप में भी दिखाई देने लगा है। कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि, माल ढुलाई के महंगा होने और तेल आपूर्ति बाधाओं के कारण दुनिया के साथ-साथ भारत में भी महंगाई बढ़ रही है। यद्यपि भारत में महंगाई अमरीका सहित दुनिया के अधिकांश देशों में तेजी से बढ़ती हुई महंगाई से बहुत कम है, लेकिन इस महंगाई का भारत की आर्थिकी और आम आदमी पर असर दिखाई देने लगा है। हाल ही में 13 अप्रैल को सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार मार्च 2026 में खुदरा महंगाई दर बढक़र 3.4 प्रतिशत हो गई, जो फरवरी में 3.21 प्रतिशत थी। ग्रामीण क्षेत्रों में खुदरा महंगाई दर 3.63 प्रतिशत दर्ज की गई, जबकि शहरी क्षेत्रों में खुदरा महंगाई दर 3.11 प्रतिशत रिकॉर्ड की गई है। इसी प्रकार 15 अप्रैल को जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार मार्च 2026 में थोक महंगाई दर बढक़र 3.88 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गई। यह फरवरी माह में 2.13 प्रतिशत के स्तर पर थी। स्थिति यह है कि थोक मूल्य की यह महंगाई 38 महीने के उच्चतम स्तर पर है। नि:संदेह खाड़ी देशों से आयातित कच्चे माल के महंगे होने और ईंधन, बिजली व गैस की कीमतों में वृद्धि से आम आदमी के जीवन से जुड़ी वस्तुएं, रसोई से लेकर कपड़े और घरेलू उपकरण आदि महंगे हुए हैं। खास तौर से आयातित पेट्रोकेमिकल से जुड़े कच्चा माल के महंगे होने से पेंट सहित विभिन्न उत्पादों की कीमतें अधिक बढ़ी हैं।

साबुन, पेस्ट, बिस्किट जैसे एफएमसीजी प्रोडक्ट्स बनाने वाली कई कंपनियां पैकेट छोटे करने की रणनीति पर भी आगे बढ़ी हैं। इतना ही नहीं, देश में महंगाई बढऩे की एक नई चिंता यह भी है कि हाल ही में 13 अप्रैल को भारतीय मौसम विभाग ने अल नीनो के कारण 2026 में सामान्य से कम मॉनसून का अनुमान लगाया है, जिससे कृषि उत्पादन और खाद्य कीमतों पर असर पड़ सकता है। गौरतलब है कि भारतीय मौसम विभाग ने वर्ष 2023 के बाद पहली बार बारिश के दीर्घकालिक औसत (एलपीए) के 92 प्रतिशत रहने की संभावना बताई है। यह पूर्वानुमान 5 फीसदी अधिक या कम की मॉडल त्रुटि के साथ जारी किया गया है। यद्यपि पिछले आंकड़े बताते हैं कि सामान्य से कम मॉनसून वाले वर्षों में जब बारिश का समय, वितरण और फैलाव समान रहा तब खरीफ का उत्पादन कम नहीं हुआ, किन्तु गैर-सिंचित क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर उगाई जाने वाली दलहन और तिलहन जैसी फसलों के लिए जोखिम हो सकती है। साथ ही दलहन और तिलहन का कम उत्पादन खाद्य मुद्रास्फीति पर असर डाल सकता है। ऐसे में महंगाई नियंत्रण के लिए राहत और सुधारों को तेजी से लागू करने की बहुआयामी रणनीति के साथ आगे बढऩा होगा। यह उल्लेखनीय है कि हाल ही में वैश्विक क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों व वैश्विक संगठनों की रिपोर्टों में अमरीका और ईरान के बीच टकराव के लंबा खींचने पर भारत की विकास दर में कमी और महंगाई के बढऩे के अनुमान प्रस्तुत किए गए हैं। वैश्विक रेटिंग एजेंसी मूडीज ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पश्चिम एशिया में युद्ध और ऊर्जा कीमतों व आपूर्ति बाधाओं के कारण भारत में विकास दर धीमी हो सकती है और महंगाई बढ़ सकती है। मूडीज रेटिंग्स ने भारत की विकास दर के अनुमान को घटाते हुए चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 6 प्रतिशत कर दिया, जो पहले 6.8 प्रतिशत आंका गया था। मूडीज ने चालू वित्त वर्ष में औसत महंगाई दर 4.8 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया, जो 2025-26 के 2.4 प्रतिशत से अधिक है। ऐसे में महंगाई दर के भारतीय रिजर्व बैंक के द्वारा निर्धारित चार प्रतिशत के लक्ष्य दायरे से ऊपर जाना चुनौतीपूर्ण होगा। इसमें कोई दो मत नहीं हैं कि देश के आम आदमी को युद्ध के संकट के बीच महंगाई से बचाने के मद्देनजर सरकार रणनीतिपूर्वक आगे बढ़ी है। इसके मद्देनजर पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर रखने के लिए उत्पाद कर में 10 रुपए प्रतिलीटर की कटौती किए की गई ताकि महंगाई को काबू में रखा जा सकेगा। आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू किया गया है। देश की सभी तेल रिफाइनरियां अपनी पूरी क्षमता के साथ काम कर रही हैं। सरकार के पास कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार मौजूद है। साथ ही, पेट्रोल और डीजल की बाजार में किसी भी तरह की कमी नहीं आने दी जा रही है। रोजाना करीब 50 लाख गैस सिलेंडर की डिलीवरी की जा रही है। ऑनलाइन बुकिंग 97 प्रतिशत है। ब्लैक मार्केटिंग रोकने के लिए डिलिवरी ऑथेंटिकेशन की व्यवस्था की गई है।

दुनिया में तेजी से बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों के बीच भी देश में सरकारी तेल कंपनियों के द्वारा सामान्य पेट्रोल-डीजल की कीमतें नहीं बढ़ाई गई हैं। वैश्विक तेल संकट को देखते हुए सरकार ने 11 अप्रैल को निर्यात किए जाने वाले डीजल और हवाई ईंधन (एटीएफ) पर निर्यात शुल्क 34 रुपए बढ़ा दिया है ताकि देश में ईंधन की कमी न हो और कीमतें काबू में रहें। सरकार ने महंगाई को नियंत्रित रखने तथा आम आदमी पर इसके प्रभाव को कम से कम करने के मद्देनजर आवश्यक खाद्य वस्तुओं के लिए बफर स्टॉक बढ़ाने, खुले बाजार में खरीदे गए खाद्यान्न की रणनीतिक बिक्री करने और जरूरी आयात की सुविधा जैसे कई रणनीतिक कदम उठाए हैं। नि:संदेह सरकार के द्वारा महंगाई नियंत्रण के लिए की गई विभिन्न आर्थिक और कूटनीतिक पहलों के लाभ मिले हैं। यह बात भी महत्वपूर्ण है कि इस युद्ध से निर्मित महंगाई की चुनौती के बीच कुछ अहम बुनियादी बातें भारत के लिए महंगाई नियंत्रण की शक्ति बन गई हैं। इस समय भारत के पास विशाल खाद्यान्न भंडार और जरूरत की दवाइयों का पर्याप्त स्टॉक आर्थिक अनुकूलताओं के रूप में दिखाई दे रहा है। पिछले वर्ष 2024-25 में भारत में 35.70 करोड़ टन खाद्यान्न का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है और इस वर्ष 2025-26 में इससे भी अधिक खाद्यान्न उत्पादन की संभावना है। भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के पास केंद्रीय पूल में मार्च 2026 के अंत तक लगभग गेहूं और चावल का 600 लाख टन से अधिक का उपलब्ध स्टॉक खाद्य सुरक्षा के मामले में भारत की मजबूती है। इस समय देश के 80 करोड़ से अधिक कमजोर वर्ग के लोगों को निशुल्क खाद्यान्न वितरित किया जा रहा है।

इतना ही नहीं, महंगाई की किसी भी चुनौती से निपटने के लिए भारत के पास 10 अप्रैल तक 700 अरब डॉलर से अधिक के विदेशी मुद्रा कोष की शक्ति भी है। उम्मीद करें कि सरकार अमरीका-ईरान टकराव के बीच महंगाई नियंत्रण के लिए और अधिक रणनीतिक कदमों के साथ आगे बढ़ेगी। कच्चे तेल के लिए रूस और वेनेजुएला से आपूर्ति का रुख और बढ़ाया जाएगा। सरकार के द्वारा खाद्य तेल के आयात शुल्क में कमी सहित उवर्रकों की उपयुक्त आपूर्ति के लिए दृढ़तापूर्वक आगे बढ़ा जाएगा। रिजर्व बैंक के द्वारा आवश्यक होने पर मौद्रिक नीति सख्त करते हुए वर्तमान 5.25 प्रतिशत की नीतिगत ब्याज दर (रेपो रेट) को बढ़ाया जाएगा। उम्मीद करें कि सरकार कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 को कड़ाई से लागू करते हुए इसके तहत जरूरत के मुताबिक वस्तुओं के भंडारण की सीमा, नियमित छापेमारी और दोषियों के खिलाफ त्वरित कानूनी कार्रवाई की राह पर भी दृढ़ता के साथ आगे बढ़ते हुए दिखाई देगी।-डा. जयंती लाल भंडारी

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