जबलपुर क्रूज हादसा: ‘ऐसा लगा कि हम भी नहीं बचेंगे…’ चश्मदीदों की जुबानी उस काली शाम की दास्तां

जबलपुर. नर्मदा की लहरों पर सैर का आनंद लेना कुछ परिवारों के लिए जीवनभर का गहरा जख्म बन जाएगा, किसी ने सोचा न था. मध्य प्रदेश के जबलपुर के बरगी बांध में हुआ क्रूज हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं बल्कि उन करीब 35 से ज्यादा जिंदगियों के लिए मौत से सामना था, जो उस क्रूज पर सवार थे. घटना के समय नजदीक में मौजूद चश्मदीदों और अपनी जान जोखिम में डालकर दूसरों को बचाने वाले स्थानीय युवकों ने जो मंजर बयां किया, वह रूह कंपा देने वाला है. दरअसल नजदीक में ही पुल का कार्य निर्माणाधीन हैं, जहां कर्मचारी काम कर रहे थे. विक्की पटेल ने लोकल 18 को बताया, ‘शाम का वक्त था, सब कुछ सामान्य था. अचानक मौसम ने करवट ली. तेज धूल भरी आंधी चलने लगी और बांध का शांत पानी उग्र हो गया. हमने देखा कि बीच मझधार में सैलानियों से भरा क्रूज डगमगाने लगा. लहरें इतनी ऊंची थीं कि नाव खिलौने की तरह ऊपर-नीचे हो रही थी. देखते ही देखते एक जोरदार लहर आई और क्रूज एक तरफ झुक गया. अगले ही लहर में सब कुछ खत्म हो गया. नाव पलट चुकी थी और लोग पानी में थे.’
हादसे के सबसे बड़े नायक वो स्थानीय युवक रहे, जिन्होंने वर्दी या सरकारी आदेश का इंतजार नहीं किया. इन युवकों ने बताया, ‘हमने जैसे ही लोगों की चीखें सुनीं, हमारा कलेजा मुंह को आ गया. लोग पानी में हाथ-पांव मार रहे थे. हमें पता था कि प्रशासन को आने में वक्त लगेगा, इसलिए हमने तुरंत पानी में छलांग लगा दी. नाव के आसपास लाइफ जैकेट और कुछ रबर ट्यूब तैर रहे थे. हमने उन्हें पकड़ा और उन लोगों की तरफ फेंका, जो डूब रहे थे. मंजर बहुत खौफनाक था. एक मां अपने बच्चे को ऊपर उठाए हुए थी और खुद डूब रही थी. हमने किसी तरह उन तक पहुंच बनाई. पानी इतना गहरा और लहरें इतनी तेज थीं कि एक पल को लगा कि हम भी नहीं बचेंगे लेकिन उन मासूमों की शक्ल देखकर हिम्मत आ गई. हम करीब 12 से 15 लोगों को खींचकर किनारे तक लाए.’
घटना के करीब 45 मिनट बाद तक कोई सरकारी बचाव दल मौके पर नहीं था. बचाए गए एक सैलानी ने बताया कि नाव पर सवार सभी लोगों के पास लाइफ जैकेट नहीं थी, और जो थी उन्हें पहनने के लिए कोई सख्त निर्देश नहीं दिए गए थे. वो चीखें अब भी कानों में गूंज रही हैं.




