हमारे नेताओं को आईना दिखा गए रुबियो

भारत में यातना (टॉर्चर) को रोकने या उससे निपटने के लिए अब तक कोई विशेष, स्वतंत्र कानून नहीं बन पाया है। यद्यपि भारत ने 1997 में ‘संयुक्त राष्ट्र यातना विरोधी सम्मेलन’ पर हस्ताक्षर किए थे, लेकिन वर्तमान में यातना से निपटने के लिए भारतीय दंड संहिता और भारतीय संविधान के प्रावधानों का ही उपयोग किया जाता है। यातना निवारण विधेयक 2010 में लोकसभा द्वारा पारित किया गया था, जिसका उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र के सम्मेलन की पुष्टि करना और यातना को स्पष्ट रूप से दंडनीय अपराध बनाना था। हालांकि प्रवर समिति को भेजे जाने और संशोधनों की सिफारिशों के बाद, यह विधेयक लैप्स हो गया और कानून का रूप नहीं ले सका। मानवाधिकार समूहों का कहना है कि भारत में हर साल सैकड़ों लोग हिरासत में मारे जाते हैं…
भारत दौरे पर आए अमरीकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि दुनिया के हर देश में बेवकूफ लोग होते हैं। हम इन्हें गंभीरता से लेंगे। उन्होंने कहा कि अमरीका में भी बेवकूफ लोग मौजूद हैं। ‘क्वाड्रीलेटरल सिक्योरिटी डायलॉग’ (क्वाड) की बैठक में शिरकत करने राजधानी दिल्ली में आए अमरीकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने अमरीका में भारतीयों पर नस्लीय हमलों को लेकर यह जवाब दिया। रुबियो ने कहा कि मैं नस्लभेदी कमेंट्स को बहुत गंभीरता से लूंगा। मुझे यकीन है कि ऐसे लोग हैं जिन्होंने ऑनलाइन और दूसरी जगहों पर कमेंट्स किए हैं, क्योंकि दुनिया के हर देश में बेवकूफ लोग मौजूद होते हैं। मुझे यकीन है कि यहां भी बेवकूफ लोग हैं, यूनाइटेड स्टेट्स में भी बेवकूफ लोग हैं जो हर समय बेवकूफी भरे कमेंट्स करते हैं। यूनाइटेड स्टेट्स एक बहुत ही वेलकमिंग देश है। दुनिया भर से हमारे देश में आने वाले लोगों से फायदा हुआ है। अमरीकी विदेश मंत्री को शायद अंदाजा होगा कि नस्लवाद, जातिवाद, सांप्रदायिकता और क्षेत्रवाद भारत के अभिन्न अंग हैं। इन मुद्दों पर राजनीति करके देश को कमजोर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदनाम करने में भारत के राजनीतिक दल ही सबसे आगे हैं। इसमें चाहे विपक्ष हो या सत्ता पक्ष, कोई भी अपने राजनीतिक स्वार्थों को भुनाने में पीछे नहीं रहता। सत्ता में जो भी राजनीतिक दल होता है, वह यंत्रणा और क्रूरता को कानूनी आड़ में जायज ठहराने का प्रयास करता है। इसका देश में सबसे बड़ा उदाहरण है पुलिस हिरासत में होने वाली मौतें।




