भोपाल-विदिशा फोरलेन प्रोजेक्ट कैबिनेट में अटका

भोपाल: राजधानी भोपाल को विदिशा और विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल सांची से जोड़ने वाला 1,618 करोड़ रुपये का महत्वाकांक्षी फोरलेन प्रोजेक्ट पूरी तरह तैयार होने के बावजूद फाइलों में दफन है। राज्य स्तरीय अधिकार प्राप्त समिति से प्रशासनिक क्लीयरेंस मिले आठ महीने से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन राजनीतिक नफा-नुकसान और ‘उचित समय’ के इंतजार में राज्य कैबिनेट ने इस पर अंतिम मुहर नहीं लगाई है। नतीजतन, जमीनी स्तर पर काम शुरू होना तो दूर, टेंडर प्रक्रिया तक आगे नहीं बढ़ सकी है।
स्टेट हाईवे-18 को चौड़ा करने की यह योजना मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम द्वारा हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल के तहत तैयार की गई है। 45 किलोमीटर लंबे इस मार्ग की हालत वर्तमान में बेहद जर्जर हो चुकी है।
सांची जाने वाले पर्यटकों पर दोहरी मार
यूनेस्को की विश्व धरोहर सांची स्तूप जाने वाले विदेशी पर्यटकों और रोजाना सफर करने वाले स्थानीय लोगों को इस लेटलतीफी की भारी कीमत चुकानी पड़ रही है। मुख्य सड़क खराब होने के कारण ट्रैफिक अब भोपाल-रायसेन मार्ग से होकर सांची-विदिशा की तरफ डायवर्ट हो रहा है। इस डायवर्जन की वजह से वाहन चालकों को हर चक्कर में 10 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। इससे न केवल ईंधन की बर्बादी हो रही है और यात्रा का समय बढ़ रहा है, बल्कि पहले से व्यस्त भोपाल-रायसेन कॉरिडोर पर ट्रैफिक का दबाव भी खतरनाक स्तर तक पहुंच गया है।
सभी प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी
MPRDC के शीर्ष सूत्रों की मानें तो प्रोजेक्ट की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) से लेकर हर स्तर की तकनीकी और प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी की जा चुकी हैं। दिसंबर 2025 में ही इसे एसएलईसी से अंतिम मंजूरी मिल गई थी। इसके बाद प्रस्ताव को कैबिनेट के समक्ष भी प्रस्तुत किया गया, लेकिन वहां से इसे अब तक हरी झंडी नहीं मिली है। अधिकारी भी दबी जुबान में स्वीकार कर रहे हैं कि मामला अब पूरी तरह राजनीतिक इच्छाशक्ति पर निर्भर है, जिसका कोई निश्चित टाइमलाइन फिलहाल तय नहीं है।




