रॉकेट की स्पीड से भाग रहा क्रूड ऑयल, पहुंचा 100 डॉलर के करीब; जानें भारत पर क्या होगा असर?

Crude Oil: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ती ही जा रही हैं. ईरान पर अमेरिका के हमले और यमन के हूथी विद्रोहियों के रेड सी में तेल टैंकरों को निशाना बनाए जाने से कच्चे तेल की कीमतों में उबाल है. यही वजह है कि आज गुरुवार को तेल की कीमतें 1.5% से ज्यादा बढ़कर छह हफ्ते से ज्यादासमय के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई हैं.
कितनी बढ़ गई है कीमत?
आज लगभग 2% की तेजी के साथ ब्रेंट क्रूड 96 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा है. यह 8 जून के बाद से इसका अब तक का सबसे हाई लेवल है. पिछले कारोबरी सेशन में यह 3 डॉलर से ज्यादा बढ़कर 94.07 पर बंद हुआ था, जो इसके छह हफ्ते के सबसे ऊंचे स्तर के बहुत करीब था. वहीं, लगभग 1.6% की बढ़त के साथ WTI क्रूड 88.24 बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा है. भारतीय वायदा बाजार में क्रूड ऑयल 8548 रुपये प्रति बैरल पर बिक रहा है.
Crude Oil: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ती ही जा रही हैं. ईरान पर अमेरिका के हमले और यमन के हूथी विद्रोहियों के रेड सी में तेल टैंकरों को निशाना बनाए जाने से कच्चे तेल की कीमतों में उबाल है. यही वजह है कि आज गुरुवार को तेल की कीमतें 1.5% से ज्यादा बढ़कर छह हफ्ते से ज्यादासमय के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई हैं.
कितनी बढ़ गई है कीमत?
आज लगभग 2% की तेजी के साथ ब्रेंट क्रूड 96 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा है. यह 8 जून के बाद से इसका अब तक का सबसे हाई लेवल है. पिछले कारोबरी सेशन में यह 3 डॉलर से ज्यादा बढ़कर 94.07 पर बंद हुआ था, जो इसके छह हफ्ते के सबसे ऊंचे स्तर के बहुत करीब था. वहीं, लगभग 1.6% की बढ़त के साथ WTI क्रूड 88.24 बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा है. भारतीय वायदा बाजार में क्रूड ऑयल 8548 रुपये प्रति बैरल पर बिक रहा है.
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क्यों बढ़ती जा रही कच्चे तेल की कीमत?
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव के चलते होर्मुज (Strait of Hormuz) वाला समुद्री रास्ता लगभग पूरी तरह से बंद हो गया है. इसके साथ ही लाल सागर में हूती विद्रोहियों द्वारा तेल टैंकरों को निशाना बनाया जा रहा है. इसके चलते ग्लोबल लेवल पर क्रूड ऑयल की सप्लाई में रुकावट आने को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं. यही वजह है कि कीमतें तेजी से भाग रही हैं.
Goldman Sachs के लगाए गए अनुमान के मुताबिक, अगर यही हाल रहा तो कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को भी पार कर सकती हैं.
भारत पर क्या होगा असर?
भारत अपनी जरूरत का लगभग 88% कच्चा तेल दूसरे देशों से आयात करता है. ऐसे में वैश्विक कीमतों में मामूली बदलाव भी देश के बजट पर बड़ा असर डाल सकता है. कच्चे तेल की लागत बढ़ेगी, तो सरकारी तेल कंपनियां (OMCs) पर भी वित्तीय दबाव बढ़ेगा. अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक 95-120 डॉलर के स्तर पर बनी रहती है, तो आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में 5-8 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है.
पेट्रोल-डीजल के महंगा होने से देश में ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट में इजाफा होगा. इसका असर फल, सब्जियों, दूध और रोजमर्रा के सामानों पर पड़ेगा. ऐसे में देश में रिटेल स्तर पर महंगाई बढ़ने की भी आशंका है.




