राम मंदिर के CEO के लिए पूर्व IPS राजेश पांडेय का 2 बार इंटरव्यू, संत समाज क्यों है नाराज?

अयोध्याः श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के पहले पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के लिए चयन प्रक्रिया बुधवार को लगातार दूसरे दिन भी जारी रही। इसमें भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के पूर्व अधिकारी राजेश पांडेय का दूसरी बार साक्षात्कार लिया गया। सूत्रों के अनुसार बिहार के पूर्व पुलिस महानिदेशक परेश सक्सेना भी साक्षात्कार दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि 5200 आवेदनों में से 18 उम्मीदवारों को शॉर्ट लिस्ट करते हुए दो दिन में इंटरव्यू होने थे। हालांकि आखिरी दिन भी करीब चार लोगों के इंटरव्यू नहीं हो सके। ऐसे में अब बचे लोगों के इंटरव्यू गुरुवार को लिए जाएंगे।
जन्मभूमि मंदिर परिसर में उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति प्रमोद कोहली, लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) विष्णुकांत चतुर्वेदी और सुरेश हवारे की समिति इंटरव्यू ले रही है। पहले दिन मंगलवार को आठ और बुधवार को चार आवेदकों के इंटरव्यू हुए। बचे चार लोगों के इंटरव्यू गुरुवार को होंगे। समिति ने उम्मीदवारों से साक्षात्कार में अलग-अलग प्रश्न पूछे। बुधवार को पूछे गए प्रश्न मंदिर व्यवस्था के कामकाज और प्रबंधन पर केंद्रित थे। उम्मीदवारों से प्रमुख आयोजनों पर भारी भीड़ संभालने की उनकी क्षमता के बारे में भी प्रश्न पूछे गए। इसके अलावा, उम्मीदवारों की पारिवारिक पृष्ठभूमि और हिंदू धर्म और भगवान में उनकी आस्था से जुड़े प्रश्न भी पूछे गए।
संत समाज नाराज , आंदोलन की चेतावनी
श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) की को नियुक्ति की प्रक्रिया को लेकर संत समाज में नाराजगी बढ़ती जा रही है। सतों ने प्रस्तावित सीईओ पद को अयोध्या की सदियों पुरानी मंदिर परपरा के विपरीत बताते हुए इसे राम मंदिर के कथित सरकारीकरण की दिशा में उठाया गया कदम करार दिया है। संत समाज ने सरकार और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से नियुक्ति प्रक्रिया पर पुनर्विचार करने की माग करते हुए जरूरत पड़ने पर आदोलन की चेतावनी दी है। हनुमानगढ़ी के पुजारी देवेशाचार्य ने कहा कि जिस तरह आवेदन मगाए गए और इंटरव्यू की प्रक्रिया सामने आ रही है, उससे लगता है जैसे किसी कपनी या औद्योगिक सस्थान में सीईओ नियुक्त किया जा रहा हो। मंदिर के संचालन के लिए ट्रस्ट का गठन किया गया है और धार्मिक समिति भी बनाई गई है, जिसमें अयोध्या के वरिष्ठ संत शामिल है।
सरकारीकरण की कोशिश
ऐसे में सीईओ की आवश्यकता और उसके औचित्य को लेकर संत समाज में असमंजस है। देवेशाचार्य ने कहा कि राम मंदिर का संचालन अयोध्या की पारंपरिक धार्मिक व्यवस्था के अनुरूप होना चाहिए, न कि कॉरपोरेट सिस्टम के तहत। उन्होंने यह भी कहा कि मंदिरों को सरकारी तंत्र से मुक्त कराने की बात करने वाले लोगो से जुड़े संस्थान की ओर से राम मंदिर में सीईओ की नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ना विरोधाभासी है। महंत सीताराम दास ने आरोप लगाया कि सीईओ की नियुक्ति के जरिए राम जन्मभूमि मंदिर के सरकारीकरण की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासनिक व्यवस्था मजबूत करने के लिए किसी पद की आवश्यकता है तो वैष्णव परंपरा से जुड़े किसी निष्ठावान संत को प्रधान सेवक या धर्माधिकारी की जिम्मेदारी दी जानी चाहिए।
धर्माचार्य की नियुक्ति होः अजय राय
चढावा चोरी के बाद राम मंदिर ट्रस्ट की तरफ से सीईओ के चयन की कवायद के बीच कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कई सवाल उठाते हुए गंभीर आरोप लगाए है। अयोध्या पहुंचे अजय राय ने बुधवार को कहा कि मंदिर मे CEO नहीं, धर्माचार्य की नियुक्ति होनी चाहिए। साथ ही आरोप लगाया कि भाजपा और संघ ने राम मंदिर को कमाई का जरिया बना लिया है। कहा कि चढ़ावे को लेकर ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जो पूरी तरह से पारदर्शी हो।




