खंड-खंड होगा चीन का घमंड, भारतीय मोबाइल कंपनियों को मिलेगा बड़ा इंसेंटिव

भारत में मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग को और मजबूत करने के लिए सरकार ने बड़ा दांव खेला है. नई मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम – MPMS के तहत अगले पांच साल में ₹62500 करोड़ खर्च किए जाएंगे. खास बात यह है कि इस स्कीम में भारतीय मोबाइल ब्रांड्स को सबसे ज्यादा इंसेंटिव मिलेगा.
सरकार का लक्ष्य सिर्फ भारत में मोबाइल असेंबल करना नहीं है. अब मोबाइल के ज्यादा से ज्यादा पुर्जे भी देश में बनाने भारतीय कंपनियों को मजबूत करने और उन्हें ग्लोबल मार्केट में चीनी कंपनियों के मुकाबले खड़ा करने पर जोर है.
देसी ब्रांड्स को सबसे बड़ा इंसेंटिव
स्कीम के तहत मोबाइल बनाने वाली कंपनियों को उनके उत्पादन पर 2.25% से 5% तक इंसेंटिव मिलेगा. भारतीय ब्रांड्स को सीधे 5% का सबसे ज्यादा इंसेंटिव मिलेगा. अगर कंपनी देश में बने पुर्जों का इस्तेमाल करती है तो उसे 1.5% तक अतिरिक्त इंसेंटिव मिलेगा. वहीं, भारत में डिजाइन और रिसर्च करने वाली भारतीय कंपनियों को 3% अतिरिक्त फायदा दिया जाएगा.
मोबाइल के पुर्जे भी होंगे ‘मेड इन इंडिया’
सरकार डिस्प्ले, कैमरा मॉड्यूल, बैटरी सेल, बैक कवर, चेसिस और USB केबल या चार्जर जैसे पुर्जों को भारत में बनाने पर भी इंसेंटिव देगी. हालांकि, इसके लिए कंपनी को कम से कम 25% फोन में इन देसी पुर्जों का इस्तेमाल करना होगा. यानी सरकार अब सिर्फ ‘Made in India’ मोबाइल नहीं, बल्कि मोबाइल के अंदर ज्यादा से ज्यादा ‘Made in India’ पार्ट्स चाहती है.
मोबाइल सेक्टर में भारत की ताकत बढ़ी
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2014 से 2026 के बीच भारत का मोबाइल उत्पादन 33 गुना बढ़ा है. मोबाइल एक्सपोर्ट में भी करीब 166 गुना बढ़ोतरी हुई है. भारत अब संख्या के हिसाब से दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल बनाने वाला देश है. देश में इस्तेमाल होने वाले करीब 99.2% मोबाइल भारत में ही बनते हैं.
अब नई स्कीम के जरिए सरकार इस बढ़त को अगले स्तर पर ले जाना चाहती है, जहां भारत सिर्फ दुनिया के लिए मोबाइल बनाए ही नहीं, बल्कि मोबाइल की सप्लाई चेन और टेक्नोलॉजी में भी अपनी पकड़ मजबूत करे.
5 साल में ₹39 लाख करोड़ का उत्पादन
सरकार का अनुमान है कि MPMS के पांच साल में मोबाइल उत्पादन करीब ₹39 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है. मोबाइल एक्सपोर्ट करीब ₹15 लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है.
इसके साथ मोबाइल और इससे जुड़े सेक्टर में करीब 60000 सीधी नौकरियां बनने की उम्मीद है. सरकार का संदेश है मोबाइल की दुनिया में भारत अब सिर्फ असेंबली सेंटर नहीं, बल्कि एक बड़ा मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी हब बनना चाहता है.




