नासा भी देखता रह गया! अंतरिक्ष में बजा भारत की देसी चिप्स का डंका, विक्रम प्रोसेसर ने दी सबको मात

India semiconductor: भारत की स्वदेशी सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी का जलवा अब अंतरिक्ष मिशन में नजर आने लगा है. बात चंद्रयान-3 की हो, या बात फिर सूर्य मिशन आदित्य-L1 की हो, इन सभी मिशन्स की सफलता में भारतीय सेमीकंडक्टर का अहम भूमिका रही है. राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के मौके पर केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भारत की स्वदेशी सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी से जुड़ी इन उपलब्धियों को आज देश के साथ साझा किया है.
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि मोहाली स्थित सेमीकंडक्टर लैबोरेटरी (एससीएल) ने फ्लाइट-ग्रेड चिप्स तैयार की हैं. इन्हें खास तौर पर अंतरिक्ष में काम करने के लिए तैयार किया गया है. अंतरिक्ष में चिप्स के सामने कई तरह की चुनौतियां होती हैं. तापमान में तेज बदलाव, रेडिएशन, दबाव और कंपन इन चिप्स के लिए बड़ी चुनौती होती हैं. एससीएल की चिप्स को इन्हीं परिस्थितियों में काम करने के हिसाब से तैयार किया गया है.
चंद्रयान-3 के लैंडर में इस्तेमाल हुई कैमरा चिप
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, भारत के चंद्र मिशन चंद्रयान-3 में एससीएल की बनाई कैमरा चिप का इस्तेमाल हुआ था. यह चिप चंद्रयान-3 के लैंडर में लगे कैमरे में लगाई गई थी. लैंडर की चांद पर लैंडिंग के दौरान कैमरा सिस्टम ने अहम भूमिका निभाई थी. इस सिस्टम के जरिए लैंडर से जुड़ी जरूरी तस्वीरें हासिल की गईं थीं. ऐसे में कैमरा सिस्टम में इस्तेमाल होने वाली चिप का अंतरिक्ष के मुश्किल माहौल में सफलतापूर्वक काम करना किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं है.
एससीएल ने तैयार किया देश का अपना ‘विक्रम’ प्रोसेसर
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि एससीएल ने ‘विक्रम’ नाम का प्रोसेसर भी विकसित किया है. इसका इस्तेमाल सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल और रॉकेट में किया जा रहा है. अंतरिक्ष मिशनों में प्रोसेसर की भूमिका बेहद अहम होती है. रॉकेट और लॉन्च व्हीकल के कई इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम इसी तकनीक पर काम करते हैं. भारत में तैयार इस प्रोसेसर का अंतरिक्ष मिशनों में इस्तेमाल देश की बढ़ती सेमीकंडक्टर क्षमता को दर्शाने के लिए काफी है.
आदित्य-L1 में लगी थीं रेडिएशन-हार्डन्ड एडीसी चिप्स
चंद्रयान-3 के बाद भारत की स्वदेशी चिप्स का इस्तेमाल सूर्य मिशन आदित्य-L1 में भी हुआ था. एससीएल ने इस मिशन के लिए रेडिएशन-हार्डन्ड एडीसी चिप्स तैयार की थीं. अंतरिक्ष में मौजूद रेडिएशन इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम के लिए चुनौती बन सकता है. रेडिएशन-हार्डन्ड चिप्स को इसी समस्या से निपटने के लिए तैयार किया जाता है. आदित्य-L1 सूर्य का अध्ययन कर रहा है, इसलिए इस मिशन में इस्तेमाल होने वाले इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम को रेडिएशन से सुरक्षित रखना बेहद जरूरी होता है.
अंतरिक्ष में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता भारत
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि चंद्रयान-3 और आदित्य-L1 जैसे मिशनों में भारतीय चिप्स का इस्तेमाल देश के लिए बड़ी उपलब्धि है. अंतरिक्ष मिशनों में चिप्स और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स की अहम भूमिका होती है. ऐसे में इनका देश में ही तैयार होना भारत की बढ़ती तकनीकी क्षमता को दिखाता है. उन्होंने कहा कि चांद से लेकर सूरज तक, स्वदेशी सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी भारत के अंतरिक्ष मिशनों को मजबूत कर रही है और यह अंतरिक्ष के क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक अहम कदम है.




