‘वहां सेना ही शासन और सेना ही कानून’, यूएन में भारत ने पाकिस्तान को घेरा

संयुक्त राष्ट्र। कानून के शासन पर टिप्पणियों को लेकर भारत ने संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान को आईना दिखाते हुए कहा कि वह इस मुद्दे पर उपदेश’ नहीं दे सकता, क्योंकि उसके यहां सेना ही शासन है और सेना ही कानून।
भारत ने पाकिस्तान के 26वें संवैधानिक संशोधन को न्यायिक स्वतंत्रता के लिए बड़ा आघात बताया। इस संशोधन को कानून के शासन व मानवाधिकार संरक्षण के विरुद्ध माना जा रहा है।
‘हमें उपदेश न दे पाकिस्तान’
संयुक्त राष्ट्र (यूएन) महासभा की छठी समिति में ‘राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कानून का शासन’ विषय पर चर्चा के दौरान पाकिस्तान की टिप्पणियों के बाद भारत ने शुक्रवार को जवाब देने के अधिकार का इस्तेमाल किया। भारत की काउंसलर आर. मेथिली ने कहा, ‘अजीब विडंबना है कि ऐसे देश से कानून के शासन पर उपदेश सुनने को मिल रहे हैं, जिसका अपना रिकार्ड इसका मजाक बनाता है। जो देश अपने सैन्य शासकों को अपनी अदालतों के दायरे से बाहर रखता है, वह कानून के शासन पर उपदेश नहीं दे सकता।’
मेथिली ने कहा कि जिस शासन तंत्र में किसी भी निर्वाचित सरकार को कार्यकाल पूरा नहीं करने दिया गया हो और एक पूर्व प्रधानमंत्री (इमरान खान) को मनमाने ढंग से जेल में डालकर, अपने ही सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के विपरीत, चिकित्सा से वंचित कर दिया गया हो, वह कानून के शासन का मजाक है।
उन्होंने पाकिस्तान पर एक लोकप्रिय पार्टी को चुनाव लड़ने से रोकने, सैन्य अदालतों के जरिये नागरिकों को सजा देने, सुप्रीम कोर्ट के जजों की आवाज दबाने और मानवाधिकारों का दमन करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा, ‘मैं अपने पाकिस्तानी सहयोगी से केवल एक बात कहूंगी- अपने लोगों की सुनिए।’
ऑपरेशन सिंदूर को लेकर क्या कहा?
भारतीय काउंसलर ने मई, 2025 में पाकिस्तान और गुलाम जम्मू-कश्मीर में आतंकी ढांचे को निशाना बनाकर शुरू किए गए ‘आपरेशन सिंदूर’ का भी बचाव किया। उन्होंने इसे भीषण आतंकी हमले का नपा-तुला, आनुपातिक और केंद्रित जवाब करार दिया। उन्होंने कहा, ‘जहां तक इसके परिणाम की बात है, अगर बमबारी से क्षतिग्रस्त हवाई अड्डे और नष्ट हैंगर ही जीत हैं, तो वे इसका आनंद लें।’
भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों के साथ व्यवहार को लेकर पाकिस्तान के आरोप को मेथिली ने उसके अपने यहां अल्पसंख्यकों के साथ किए जा रहे व्यवहार से ध्यान हटाने की रणनीतिक कोशिश बताया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के अस्तित्व में आने के बाद से उसकी आबादी में अल्पसंख्यकों का प्रतिशत लगातार घटा है। उन्होंने पाकिस्तान को उसके यहां प्रेस की स्वतंत्रता को लेकर भी घेरा।




