छत्तीसगढ़

भोरमदेव अभ्यारण्य में लौटी बाघों की ‘दहाड़’: जल्द शुरू होगी जंगल सफारी

कवर्धा। वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक शानदार खबर सामने आई है. कबीरधाम जिले के भोरमदेव की सुरम्य पहाड़ियों और सघन जंगलों में एक बार फिर बाघों की दहाड़ गूंजने लगी है. वन विभाग द्वारा लगाए गए ट्रैप कैमरों में बाघ-बाघिन और उनके शावकों की बेखौफ विचरण करती तस्वीरें कैद हुई हैं. यह इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि भोरमदेव अभ्यारण्य अब बाघों के लिए एक सुरक्षित और पसंदीदा ठिकाना बन चुका है.

सुरक्षा के कड़े इंतजाम

बाघों की मौजूदगी ने वन विभाग को अलर्ट मोड पर ला दिया है. प्रभूझोल से लेकर जामुनपानी मार्ग तक बाघों के पगमार्क (पैरों के निशान) मिले हैं. सुरक्षा और वन्यजीवों के संरक्षण को ध्यान में रखते हुए विभाग ने उनकी सटीक लोकेशन को गोपनीय रखा है, हालांकि निगरानी के लिए गश्त बढ़ा दी गई है. जंगल में बाघों का शावकों के साथ शिकार करना यह संकेत देता है कि यहां वन्यजीवों के लिए भोजन और प्राकृतिक चक्र पूरी तरह संतुलित है.

पर्यटकों के लिए खुशखबरी: अप्रैल-मई से शुरू होगी सफारी

बाघों की बढ़ती संख्या को देखते हुए वन विभाग अब भोरमदेव में जंगल सफारी शुरू करने की तैयारी में है. विभागीय सूत्रों के अनुसार, अप्रैल या मई के महीने से इसे आम पर्यटकों के लिए खोला जा सकता है. सफारी के संचालन का जिम्मा गुजरात की एक अनुभवी कंपनी को सौंपा गया है. पर्यटकों के लिए टिकटों की बुकिंग ऑनलाइन उपलब्ध होगी. इस पहल से न केवल इको-टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे.

भोरमदेव में बाघों की स्थायी वापसी छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है. यह साबित करता है कि यदि संरक्षण के प्रयास ईमानदारी से किए जाएं, तो प्रकृति अपनी खोई हुई रौनक दोबारा हासिल कर लेती है.

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