तकनीकी

चंद्रमा की सतह दो परतों वाले केक जैसी, चंद्रयान-3 के अध्ययन में खुलासा, विक्रम लैंडर की छोटी छलांग ने खोला राज

नई दिल्ली, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने एक महत्त्वपूर्ण खुलासा किया है। चंद्रयान-3 मिशन के प्रयोग से पता चला है कि चांद की सतह एक समान धूल का ढेर नहीं है, बल्कि दो अलग-अलग परतों वाली केक जैसी संरचना है। ऊपरी परत पर 3-4 सेंटीमीटर ढीली धूल है, जबकि 6.5 सेंटीमीटर नीचे की परत दोगुनी घनी और पांच गुना ज्यादा मजबूत है। यह खोज चंद्रयान-3 के विक्रम लैंडर के उस हॉप (छोटी छलांग) के दौरान हुई, जो दो सितंबर, 2023 को की गई थी। जब लैंडर के इंजन चालू किए गए, तो निकलने वाली गर्म गैस ने ऊपरी तीन सेंटीमीटर मोटी ढीली धूल को उड़ा दिया। इससे नीचे की पुरानी और मजबूत परत सामने आ गई। फिजिकल रिसर्च लेबोरेटरी (पीआरएल) अहमदाबाद के वैज्ञानिकों ने इस डाटा की जांच की। उन्होंने पाया कि चांद की सतह पर लगातार छोटे-छोटे उल्कापिंडों के टकराने से ऊपरी परत बारीक और ढीली हो गई है।

अध्ययन के लिए वैज्ञानिकों ने उस स्थान का परीक्षण किया, जहां चंद्रयान-3 का ‘विक्रम’ लैंडर दो सितंबर, 2023 को कुछ दूर तक उछला था। इसरो ने कहा कि जब लैंडर के इंजन ‘उछाल’ के दौरान सक्रिय हुए, तब निकास गैसों ने ब्लोअर की तरह काम किया और ऊपर की तीन सेंटीमीटर धूल को हटा दिया। इससे नीचे मौजूद अधिक पुरानी और सघन चंद्र सतह उजागर हुई। अध्ययन में यह भी पाया गया कि सतह पर हल्की धूल है, लेकिन केवल 6.5 सेंटीमीटर की गहराई पर उसका घनत्व दोगुना और सघनता पांच गुना अधिक हो जाती है। अध्ययन के अनुसार, किसी अंतरिक्ष यात्री के लिए सतह पर चलना सूखे आटे पर चलने जैसा महसूस होगा, जबकि कुछ सेंटीमीटर नीचे की परत नम और कठोर मिट्टी जैसी प्रतीत होगी।

दोनों लेयर में अंतर

ऊपरी परत: सिर्फ 3-4 सेंटीमीटर मोटी, बहुत ढीली और हल्की धूल। नीचे की परत: 6.5 सेंटीमीटर की गहराई पर यह परत ऊपरी परत से दोगुनी घनी और पांच गुना ज्यादा चिपकने वाली पाई गई। इसरो ने इसे आसान भाषा में समझाते हुए कहा कि अगर कोई अंतरिक्ष यात्री चांद पर चलेगा तो ऊपरी सतह सूखे आटे जैसी लगेगी, जबकि कुछ सेंटीमीटर नीचे यह नम और सख्त मिट्टी जैसा व्यवहार करेगी।

Related Articles

Back to top button